Health Desk: बदलती जीवनशैली और खान-पान की गलत आदतों के कारण आजकल ‘किडनी स्टोन’ यानी गुर्दे की पथरी एक आम समस्या बन गई है. जब किसी व्यक्ति को पथरी होती है, तो उसे सबसे पहले खान-पान के परहेज की एक लंबी लिस्ट थमा दी जाती है. इस लिस्ट में अक्सर ‘डेयरी प्रोडक्ट्स’ को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम होता है.
सोशल मीडिया और घरेलू नुस्खों की दुनिया में एक बड़ा सवाल अक्सर तैरता रहता है- ‘क्या पथरी में दही खाना चाहिए?’ कुछ लोग इसे कैल्शियम का स्रोत मानकर खतरनाक बताते हैं, तो कुछ इसे प्रोबायोटिक गुणों के कारण फायदेमंद. आज हम इस आर्टिकल में पत्रकारिता के निष्पक्ष नजरिए से इस उलझन को सुलझाएंगे.
आम के साथ ये 5 चीजें खाईं तो पड़ सकते हैं बीमार! जानिए सही तरीका
क्या वाकई दही से बढ़ जाती है पथरी?
किडनी स्टोन मुख्य रूप से कई प्रकार के होते हैं, जिनमें ‘कैल्शियम ऑक्सलेट’ (Calcium Oxalate) सबसे आम है. लोगों के मन में यह गलतफहमी है कि चूंकि पथरी कैल्शियम से बनी है, इसलिए कैल्शियम वाली चीजें जैसे दूध और दही बंद कर देनी चाहिए लेकिन विज्ञान इसके उलट बात करता है. शोध बताते हैं कि शरीर में कैल्शियम की कमी होने पर ऑक्सलेट का स्तर बढ़ जाता है, जो पथरी बनने की प्रक्रिया को तेज कर देता है. ऐसे में दही का सीमित और सही तरीके से सेवन करना नुकसानदेह नहीं, बल्कि फायदेमंद हो सकता है.
दही के फायदे, सिर्फ स्वाद नहीं, सेहत भी
दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स (Good Bacteria) पाचन तंत्र को दुरुस्त रखते हैं. यह न केवल भोजन को पचाने में मदद करता है, बल्कि आंतों में ऑक्सलेट के अवशोषण को कम करने में भी भूमिका निभा सकता है. इसके अलावा दही में फास्फोरस और मैग्नीशियम होता है जो किडनी के स्वास्थ्य के लिए अच्छा है. यह शरीर को हाइड्रेटेड रखने और पेट की गर्मी को शांत करने में मदद करता है. दही का सेवन करने से यूरिन के जरिए कैल्शियम निकलने की प्रक्रिया संतुलित रहती है.
क्या कहते हैं डॉक्टर?
इस विषय पर पॉपुलर डॉ. एम. के. शर्मा (सीनियर नेफ्रोलॉजिस्ट) का कहना है कि ‘ज्यादातर मरीज पथरी होने पर दूध और दही पूरी तरह बंद कर देते हैं, जो कि एक बड़ी गलती है. दरअसल, जब आप खाने के साथ दही लेते हैं, तो दही का कैल्शियम आंतों में मौजूद ऑक्सलेट के साथ चिपक जाता है और उसे किडनी तक पहुँचने से पहले ही शरीर से बाहर (मल के जरिए) निकाल देता है. इससे पथरी बनने का जोखिम कम होता है. हालांकि, जिन्हें यूरिक एसिड की समस्या है या बहुत गंभीर स्टोन की हिस्ट्री है, उन्हें इसकी मात्रा पर ध्यान देना चाहिए. बिना चीनी और बिना नमक का ताजा दही सबसे बेहतर है.’
कब और कैसे खाएं दही?
अगर आप पथरी के मरीज हैं, तो दही खाने के कुछ नियम अपनाना आपके लिए बेहतर होगा-
दोपहर का समय: दही की तासीर ठंडी होती है, इसलिए इसे दोपहर के भोजन में शामिल करना सबसे अच्छा है. रात के समय दही खाने से कफ और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं.
चीनी से बचें: दही में चीनी मिलाकर खाने से बचें, क्योंकि अतिरिक्त चीनी पथरी के खतरे को बढ़ा सकती है.
ताजा दही: हमेशा ताजा और घर का जमा हुआ दही ही इस्तेमाल करें. खट्टे या बासी दही से एसिडिटी हो सकती है.
मट्ठा या छाछ: अगर आपको गाढ़ा दही भारी लगता है, तो आप ‘छाछ’ पी सकते हैं. इसमें भुना हुआ जीरा मिलाकर पीना किडनी के लिए एक बेहतरीन क्लीन्ज़र का काम करता है.
इन बातों का भी रखें ख्याल
केवल दही खाना या न खाना ही काफी नहीं है. किडनी स्टोन से बचने के लिए इन बातों का भी रखें ध्यान-
पानी की मात्रा: दिन भर में कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं. यूरिन जितना साफ होगा, स्टोन बनने की संभावना उतनी ही कम होगी.
नमक पर लगाम: ज्यादा नमक (सोडियम) यूरिन में कैल्शियम की मात्रा बढ़ा देता है, जो पथरी का मुख्य कारण है.
ऑक्सलेट वाली चीजें कम करें: पालक, टमाटर के बीज, चॉकलेट और नट्स का सेवन सीमित मात्रा में करें.
नींबू पानी: नींबू में मौजूद सिट्रेट पथरी को बढ़ने से रोकता है.
बरेली से हल्द्वानी तक बनेगा 100 किमी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, बदल जाएगी यूपी-उत्तराखंड की तस्वीर
डरें नहीं, सतर्क रहें
हेल्थ फील्ड की जांच-पड़ताल यह कहती है कि किडनी स्टोन की स्थिति में दही का सेवन पूरी तरह सुरक्षित और अक्सर फायदेमंद होता है. यह कैल्शियम का एक ऐसा स्रोत है जो पथरी बनाने वाले तत्वों को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है. वैसे तो हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है. इसलिए अपनी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर एक बार अपने डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह जरूर लें. याद रखें, संयम और सही जानकारी ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है.
Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है. किसी भी गंभीर बीमारी या डाइट में बड़े बदलाव से पहले विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें.


