वैश्विक बाजारों में मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) के सख्त रुख के कारण सोना और चांदी की कीमतों पर दबाव बना हुआ है. हाल के दिनों में दोनों कीमती धातुओं में गिरावट दर्ज की गई है और निवेशक अब आगामी आर्थिक संकेतकों तथा वैश्विक घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखने के संकेतों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है. इसका असर सीधे सोना और चांदी जैसे गैर-ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों पर पड़ा है.
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मजबूत डॉलर बना प्रमुख कारण
फेड की हालिया बैठक के बाद अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में मजबूती देखने को मिली. डॉलर मजबूत होने से सोना और चांदी विदेशी निवेशकों के लिए महंगे हो जाते हैं, जिससे इनकी मांग प्रभावित होती है. इसी कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में लगातार दबाव बना हुआ है.
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि डॉलर की मजबूती और ऊंची ब्याज दरों का वातावरण फिलहाल बुलियन बाजार के लिए चुनौती बना हुआ है.
फेड के संकेतों से बढ़ी चिंता
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने हालिया बैठक में ब्याज दरों को यथावत रखा, लेकिन कई नीति निर्माताओं ने वर्ष के आगे के महीनों में दरें बढ़ाने की संभावना जताई है. इससे बाजार में यह धारणा मजबूत हुई है कि दरों में कटौती जल्द देखने को नहीं मिलेगी.
उच्च ब्याज दरों का माहौल सोने जैसे गैर-प्रतिफल (Non-Yielding) निवेश को कम आकर्षक बना देता है, क्योंकि निवेशक बेहतर रिटर्न देने वाले अन्य वित्तीय साधनों की ओर रुख कर सकते हैं.
सोना और चांदी में हालिया गिरावट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें हाल के सत्रों में कमजोर हुई हैं. वहीं चांदी की कीमतों में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है. कुछ रिपोर्टों के अनुसार भारतीय बाजार में भी सोना 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से नीचे फिसला, जबकि चांदी में दो दिनों के भीतर बड़ी गिरावट देखी गई.
विश्लेषकों का मानना है कि कीमतों में यह कमजोरी मुख्य रूप से मजबूत डॉलर, फेड के रुख और भू-राजनीतिक तनाव में आई नरमी के कारण आई है.
निवेशकों की नजर किन कारकों पर
आने वाले दिनों में सोना और चांदी की दिशा कई वैश्विक कारकों पर निर्भर करेगी. इनमें अमेरिका-ईरान वार्ता, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की नीतियां शामिल हैं.
यदि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है या भू-राजनीतिक तनाव दोबारा तेज होता है, तो सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में सोने की मांग बढ़ सकती है. दूसरी ओर डॉलर में और मजबूती आने पर कीमतों पर दबाव जारी रह सकता है.
भारतीय बाजार पर असर
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में से एक है. अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई देता है. सोने की कीमतें वैश्विक दरों, डॉलर-रुपया विनिमय दर, आयात शुल्क और स्थानीय मांग के आधार पर तय होती हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि शादी और त्योहारों के मौसम से पहले निवेशक कीमतों की दिशा पर नजर बनाए रखेंगे. यदि गिरावट का दौर जारी रहता है तो आभूषण खरीदारों और दीर्घकालिक निवेशकों के लिए अवसर पैदा हो सकते हैं.
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आगे क्या रहेगा रुख
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निकट भविष्य में सोना और चांदी सीमित दायरे में कारोबार कर सकते हैं. निवेशकों को अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, फेड के अगले संकेतों और पश्चिम एशिया की स्थिति पर विशेष नजर रखने की सलाह दी जा रही है.
फिलहाल मजबूत डॉलर और सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदें बुलियन बाजार पर दबाव बनाए हुए हैं, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता के किसी भी नए संकेत से कीमतों में तेजी भी लौट सकती है.
स्रोत: Akashvani News


