नई दिल्ली, 28 जून 2026. अमेरिका ने ईरान के खिलाफ लगातार दूसरे दिन सैन्य कार्रवाई करते हुए कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है. अमेरिकी सेना के अनुसार यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर की गई. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में हुए युद्धविराम (सीज़फायर) पर फिर से तनाव के बादल मंडराने लगे हैं.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि ईरानी सैन्य ठिकानों पर की गई कार्रवाई एक व्यापारी जहाज पर हुए ड्रोन हमले के जवाब में की गई.
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किन ठिकानों को बनाया गया निशाना?
CENTCOM के अनुसार अमेरिकी सैन्य विमानों ने ईरान के कई सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया, जिनमें शामिल हैं-
- सैन्य निगरानी (Surveillance) ढांचा
- संचार प्रणाली (Communication Systems)
- वायु रक्षा ठिकाने (Air Defence Sites)
- ड्रोन भंडारण केंद्र
- माइन बिछाने (Minelayer) से जुड़ी क्षमताएं
अमेरिकी सेना का कहना है कि इन लक्ष्यों पर हमला क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नौवहन की रक्षा के उद्देश्य से किया गया.
तेल टैंकर पर ड्रोन हमले का आरोप
अमेरिका ने आरोप लगाया कि ईरानी बलों ने ‘किकु (Kiku)’ नामक तेल टैंकर पर एकतरफा (One-Way) ड्रोन से हमला किया.
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह टैंकर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजर रहा था और इसमें 20 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल लदा हुआ था.
CENTCOM ने कहा कि ईरान के पास युद्धविराम का पालन करने का अवसर था, लेकिन व्यापारी जहाज पर हमला करके उसने ऐसा नहीं किया.
ईरानी मीडिया ने विस्फोटों की पुष्टि की
ईरान के सरकारी टेलीविजन ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के उत्तर में स्थित एक क्षेत्र में विस्फोटों की सूचना दी है. हालांकि, इन विस्फोटों के कारणों और नुकसान को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.
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युद्धविराम पर फिर बढ़ा तनाव
हालिया घटनाक्रम से संकेत मिल रहे हैं कि क्षेत्र में घोषित युद्धविराम पर फिर दबाव बढ़ सकता है. अमेरिका और ईरान की ओर से एक-दूसरे पर लगाए जा रहे आरोपों के बीच पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है.
फिलहाल दोनों देशों की ओर से आगे की सैन्य या कूटनीतिक कार्रवाई को लेकर स्थिति पर करीबी निगरानी रखी जा रही है.
Source: U.S. Central Command (CENTCOM), International News Reports


