Rishikesh Ganga Corridor: ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर परियोजना के लिए अंग्रेजों के जमाने के पुराने रेलवे स्टेशन की जमीन इस्तेमाल करने की तैयारी है. सरकार के संकेतों के बाद व्यापारियों ने विरोध शुरू कर दिया है. ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर की राह में आया अंग्रेजों के जमाने का रेलवे स्टेशन, बंद होने के संकेत से मचा विरोध उत्तराखंड के धार्मिक और पर्यटन शहर ऋषिकेश में प्रस्तावित ‘ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर’ परियोजना को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है. इस महत्वाकांक्षी योजना की राह में अब अंग्रेजों के दौर का पुराना ऋषिकेश रेलवे स्टेशन आ गया है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की केंद्रीय रेल मंत्री के साथ हुई बैठक के बाद संकेत मिले हैं कि भविष्य में इस ऐतिहासिक स्टेशन पर ट्रेनों का संचालन बंद किया जा सकता है.
रेलवे स्टेशन की जमीन पर बनेगा गंगा कॉरिडोर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, गंगा कॉरिडोर के विकास के लिए पुराने रेलवे स्टेशन की बहुमूल्य भूमि का उपयोग करने की योजना है. उत्तराखंड सरकार और रेल विकास निगम (RVNL) के बीच इस प्रस्ताव को लेकर सहमति बनने की दिशा में बातचीत चल रही है. सरकार की योजना इस क्षेत्र को उत्तराखंड की संस्कृति, कला और विरासत को प्रदर्शित करने वाले भव्य परिसर के रूप में विकसित करने की है.
व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी
सरकार की योजना सामने आने के बाद स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है. व्यापार मंडल का कहना है कि पुराना रेलवे स्टेशन ऋषिकेश की ऐतिहासिक पहचान है और इसे बंद करने से न केवल शहर की विरासत प्रभावित होगी, बल्कि स्थानीय कारोबार पर भी असर पड़ेगा.
व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है. उनका कहना है कि जरूरत पड़ने पर इस मुद्दे को लेकर आंदोलन भी किया जाएगा.
सरकार बोली- पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
वहीं भाजपा नेताओं और सरकार का कहना है कि ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर शहर के विकास में मील का पत्थर साबित होगा. उनका दावा है कि इस परियोजना से उत्तराखंड के पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक महत्व को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी. सरकार का मानना है कि रेलवे स्टेशन की जमीन पर बनने वाला कॉरिडोर शहर की सुंदरता और पर्यटन क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा.
विकास बनाम विरासत की बहस तेज
फिलहाल ऋषिकेश में विकास और विरासत को बचाने की बहस तेज हो गई है. एक ओर सरकार गंगा कॉरिडोर को भविष्य की बड़ी परियोजना बता रही है, तो दूसरी ओर स्थानीय लोग ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन को बचाने की मांग कर रहे हैं. अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इस विवाद का समाधान किस तरह निकालती है.


