Varanasi News: वाराणसी स्थित श्री काशी विश्वनाथ धाम में सावन की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं. मंगलवार को मंदिर प्रशासन, जिला प्रशासन, पुलिस और सीआरपीएफ की उच्च स्तरीय बैठक में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और सुविधाओं से जुड़े 50 से अधिक मुद्दों पर चर्चा हुई. बैठक में तय किया गया कि इस बार पूरे सावन में वीआईपी और प्रोटोकॉल दर्शन पूरी तरह बंद रहेंगे. सभी श्रद्धालुओं को सामान्य कतार से ही बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने होंगे.
मंदिर प्रशासन ने बताया कि सावन 30 जुलाई से 28 अगस्त तक रहेगा. इस दौरान बाबा विश्वनाथ के पांच विशेष शृंगार किए जाएंगे. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए धाम में प्रवेश के सात रास्ते निर्धारित किए गए हैं. इनमें गेट नंबर-4, काशी द्वार मार्ग-4बी, नंदू फारिया मार्ग, सिल्को प्रवेश मार्ग, ढुंढिराज प्रवेश मार्ग, सरस्वती फाटक और भैरव द्वार (मंदिर घाट की ओर से) शामिल हैं. हालांकि गंगा का जलस्तर बढ़ने पर घाट की ओर से प्रवेश अस्थायी रूप से बंद किया जा सकता है.
सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए सीसीटीवी, बिजली व्यवस्था और बैरिकेडिंग की विशेष निगरानी होगी. धाम परिसर के बाहर लटक रहे बिजली के तारों को भी व्यवस्थित करने के निर्देश दिए गए हैं. इस बार भी निशुल्क बैगेज काउंटर बंद रहेंगे. श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे मोबाइल, कैमरा, डिजिटल वॉच, पेन और अन्य प्रतिबंधित सामान लेकर न आएं.
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए धाम परिसर में ठंडे पानी, चिकित्सा सहायता, ओआरएस, इंडस्ट्रियल एयर कूलर, साफ-सफाई और भीड़ नियंत्रण के व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं. वहीं, जो श्रद्धालु धाम नहीं पहुंच पाएंगे, वे मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट, आधिकारिक यूट्यूब चैनल और टाटा स्काई के माध्यम से पूरे सावन बाबा विश्वनाथ के लाइव दर्शन कर सकेंगे.
मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं को दलालों और विशेष दर्शन के नाम पर पैसे मांगने वाले लोगों से सतर्क रहने की सलाह दी है. यदि कोई व्यक्ति पैसे लेकर विशेष दर्शन कराने का दावा करता है तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस या मंदिर प्रशासन को देने की अपील की गई है.
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बुजुर्ग, दिव्यांग और अशक्त श्रद्धालुओं के लिए गोदौलिया से मैदागिन तक निशुल्क गोल्फ कार्ट और ई-रिक्शा सेवा उपलब्ध रहेगी. वहीं भीड़ में बिछड़ने वालों की सहायता के लिए शंकराचार्य चौक, गेट नंबर-1, गेट नंबर-2, गेट नंबर-4 और श्री काशी विश्वनाथ मंदिर घाट पर पांच खोया-पाया केंद्र स्थापित किए जाएंगे.


