Bhadli Navami 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की नवमी को भड़ली नवमी या भड़रिया नवमी कहा जाता है. यह दिन सनातन परंपरा में अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि इसे अबूझ मुहूर्त की श्रेणी में रखा जाता है. यानी ऐसी तिथि, जिस पर कई शुभ और मांगलिक कार्य बिना अलग से मुहूर्त निकाले भी किए जा सकते हैं.
राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात और देश के कई हिस्सों में इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, भूमि पूजन, नए व्यापार की शुरुआत, वाहन खरीद और अन्य शुभ कार्य करने की परंपरा है.
भड़ली नवमी 2026 कब है?
वर्ष 2026 में नवमी तिथि का आरंभ 22 जुलाई 2026 को शाम 5:16 बजे होगा और समापन 23 जुलाई 2026 को सुबह 7:03 बजे होगा. सूर्योदय व्यापिनी तिथि के अनुसार भड़ली नवमी का व्रत 22 जुलाई 2026 (बुधवार) को रखा जाएगा.
क्यों कहा जाता है अबूझ मुहूर्त?
‘अबूझ मुहूर्त’ का अर्थ है ऐसा शुभ समय जिसमें सामान्यतः अलग से ग्रह-नक्षत्र देखकर मुहूर्त निकालने की आवश्यकता नहीं मानी जाती. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन शुभ कार्यों के लिए ग्रहों का प्रभाव अनुकूल माना जाता है.
इसी कारण बड़ी संख्या में लोग इस दिन विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, भूमि पूजन, दुकान या कार्यालय का उद्घाटन और अन्य नए कार्य शुरू करते हैं.
भड़ली नवमी का धार्मिक महत्व
भड़ली नवमी को अक्षय तृतीया की तरह अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से पूजा-पाठ, दान और शुभ कार्य करने से सुख-समृद्धि प्राप्त होती है.
इस तिथि का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसके कुछ दिनों बाद देवशयनी एकादशी से चातुर्मास आरंभ हो जाता है. चातुर्मास के दौरान कई परंपराओं में विवाह और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते. इसलिए भड़ली नवमी को शुभ कार्यों के लिए अंतिम महत्वपूर्ण अवसरों में से एक माना जाता है.
वास्तु शास्त्र में भड़ली नवमी का महत्व
वास्तु शास्त्र में शुभ समय पर कार्य आरंभ करना सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भड़ली नवमी पर निम्न कार्य शुभ माने जाते हैं.
- नए घर का निर्माण शुरू करना.
- भूमि पूजन.
- गृह प्रवेश.
- दुकान, ऑफिस या फैक्ट्री का उद्घाटन.
- नया व्यवसाय शुरू करना.
- तिजोरी स्थापना.
- वाहन या संपत्ति खरीदना.
- नए कार्यालय में प्रवेश.
यदि इस दिन घर या कार्यालय में भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा कर शुभ संकल्प लिया जाए तो इसे मंगलकारी माना जाता है.
भड़ली नवमी पर क्या करें?
- सुबह स्नान कर भगवान विष्णु, गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा करें.
- घर के मंदिर में दीपक जलाएं.
- जरूरतमंद लोगों को अन्न या वस्त्र दान करें.
- नए कार्य की शुरुआत से पहले ईश्वर का स्मरण करें.
- परिवार के साथ मंगल कार्यों का संकल्प लें.
किन बातों का रखें ध्यान?
हालांकि भड़ली नवमी को शुभ माना जाता है, लेकिन किसी भी बड़े निर्णय में कानूनी, आर्थिक और पारिवारिक पक्षों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए. विवाह, संपत्ति या व्यवसाय से जुड़े निर्णय संबंधित विशेषज्ञों और परिवार की सहमति से ही लेना बेहतर होता है.
शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत मंगलकारी
भड़ली नवमी भारतीय संस्कृति की उन विशेष तिथियों में से एक है जिन्हें शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह अबूझ मुहूर्त होने के कारण विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए लोकप्रिय है. यदि आप इस दिन कोई शुभ कार्य करने की योजना बना रहे हैं तो स्थानीय पंचांग और परंपरा की भी पुष्टि अवश्य करें.
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FAQs
1. भड़ली नवमी 2026 कब है?
सूर्योदय व्यापिनी तिथि के अनुसार 22 जुलाई 2026 को भड़ली नवमी का व्रत रखा जाएगा.
2. भड़ली नवमी को अबूझ मुहूर्त क्यों कहा जाता है?
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन बिना अलग मुहूर्त निकाले कई शुभ कार्य किए जा सकते हैं.
3. क्या भड़ली नवमी पर विवाह किया जा सकता है?
कई परंपराओं में इसे विवाह के लिए शुभ माना जाता है, लेकिन स्थानीय परंपरा और योग्य आचार्य की सलाह लेना उचित रहता है.
4. वास्तु के अनुसार इस दिन कौन से कार्य शुभ हैं?
गृह प्रवेश, भूमि पूजन, नया व्यापार, कार्यालय उद्घाटन और संपत्ति खरीद जैसे कार्य शुभ माने जाते हैं.
5. भड़ली नवमी और भड़रिया नवमी में क्या अंतर है?
दोनों नाम एक ही तिथि के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित हैं.


