Ayodhya News: अयोध्या स्थित डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग में बुधवार को जिंगल बेल स्कूल की कक्षा पांच के विद्यार्थियों के लिए एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया गया. इस दौरान विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय परिसर स्थित ‘सीता राम सरोवर’ और सरयू प्रयोगशाला का अवलोकन कर जल संरक्षण, नदी पारितंत्र और वैज्ञानिक अनुसंधानों की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की. शैक्षणिक भ्रमण गुंजन के समन्वय में आयोजित किया गया. इस दौरान शिक्षिकाएं स्वीटी मंध्यान, मौमिता प्रमाणिक और काजल सिंह भी विद्यार्थियों के साथ मौजूद रहीं.
3 सितंबर को बंद रहेंगे स्कूल? भारी बारिश के बीच जानें किन राज्यों में छुट्टी का फैसला
कुलपति कर्नल डॉ. बिजेंद्र सिंह ने अपने संदेश में कहा कि जल संरक्षण भावी पीढ़ी के अस्तित्व से जुड़ा एक मूल संस्कार है. उन्होंने कहा कि कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा से विकसित ‘सीता राम सरोवर’ वर्षाजल संचयन और भूजल पुनर्भरण का एक जीवंत मॉडल है. इस दौरान उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रकृति और विज्ञान के सीधे संपर्क में लाना है, ताकि वे भविष्य में जल और नदी संरक्षण के प्रति सजग प्रहरी बन सकें. भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को सरोवर की भूमिका, वर्षाजल संचयन, स्थानीय जैव विविधता और भूजल पुनर्भरण के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई.
वहीं, सरयू प्रयोगशाला में विद्यार्थियों ने जल गुणवत्ता परीक्षण की वैज्ञानिक प्रक्रियाओं को प्रत्यक्ष रूप से देखा. उन्हें जल के भौतिक, रासायनिक और जैविक मानकों के परीक्षण के साथ ही नदी स्वास्थ्य निगरानी की वैज्ञानिक विधियों की जानकारी दी गई. पर्यावरण विज्ञान विभाग के शिक्षकों ने विद्यार्थियों को गंगा, यमुना और सरयू समेत प्रमुख नदियों की विशेषताओं से भी अवगत कराया. साथ ही प्रदूषण नियंत्रण, सीवेज उपचार और आर्द्रभूमि पुनर्जीवन के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की गई.
पर्यावरण विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार चौधरी ने कहा कि कम उम्र से ही बच्चों में जल संसाधनों और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना जरूरी है. वहीं, डॉ. महिमा चौरसिया ने प्रत्यक्ष अवलोकन के माध्यम से प्रकृति और पर्यावरण को समझने की महत्ता पर जोर दिया. शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने वैज्ञानिक प्रक्रियाओं को उत्सुकता के साथ समझा और जल एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का संकल्प लिया.


