नई दिल्ली: मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं से कथित तौर पर हुए विवाद में फंसे देहरादून के जिम मालिक मोहम्मद दीपक कुमार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है.सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उनके खिलाफ दर्ज FIR से जुड़ी कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी.इसके साथ ही उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस आदेश के प्रभाव पर भी रोक लगा दी गई, जिसमें दीपक को इस घटना से जुड़े संदेश या वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से रोका गया था. न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मामले में संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है.
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‘मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में पहुंचे थे मोहम्मद दीपक’
मामले की सुनवाई के दौरान जिम मालिक मोहम्मद दीपक कुमार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल एक मुस्लिम दुकानदार की मदद के लिए पहुंचे थे.आरोप है कि बजरंग दल के कुछ सदस्यों ने दुकानदार की दुकान के नाम में ‘बाबा’ शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई थी, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच आमना-सामना हुआ.सिंघवी ने अदालत को बताया कि जब मोहम्मद दीपक से उनका नाम पूछा गया तो उन्होंने अपना नाम ‘मोहम्मद दीपक’ बताया.इसके बाद कथित तौर पर विवाद और बढ़ गया.
‘मदद करने वाले के खिलाफ कैसे दर्ज हो सकती है शिकायत?’
दीपक की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उन्होंने विवाद के बाद दुकानदार की मदद की और घटना को लेकर खुद भी शिकायतें दर्ज कराई थीं. हालांकि, उनके वकील के मुताबिक उनकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जबकि उनके खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई. अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत से सवाल किया, ‘एक मदद करने वाले व्यक्ति को इस तरह की शिकायत का सामना कैसे करना पड़ सकता है?’
वीडियो फुटेज का दिया हवाला
सुप्रीम कोर्ट में दीपक की ओर से घटना के कथित वीडियो फुटेज का भी हवाला दिया गया.उनके वकील ने दलील दी कि वीडियो में घटनाक्रम FIR में लगाए गए आरोपों से अलग दिखाई देता है. सिंघवी ने यह भी बताया कि शुरुआत में मोहम्मद दीपक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191 के तहत दंगे से जुड़ा अपराध लगाया गया था.हालांकि, बाद में अपराध के आवश्यक तत्व नहीं पाए जाने के बाद इस प्रावधान को हटा दिया गया.
गिरफ्तारी से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का भी दिया हवाला
दीपक के वकील ने दलील दी कि उनके खिलाफ बचे हुए आरोपों में सजा सात साल से कम है.ऐसे मामलों में गिरफ्तारी और जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा अर्नेश कुमार मामले में तय किए गए दिशा-निर्देश लागू होंगे.वकील ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस आदेश पर भी सवाल उठाया, जिसमें दीपक को इस घटना से संबंधित कोई संदेश या वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से रोक दिया गया था.उन्होंने कहा कि यह आदेश जरूरत से ज्यादा व्यापक है और प्रभावी रूप से उनके मुवक्किल पर पूर्ण प्रतिबंध जैसा है.
सुप्रीम कोर्ट ने FIR से जुड़ी कार्यवाही पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट किया कि मामले में FIR के आधार पर आगे की कार्यवाही फिलहाल स्थगित रहेगी.साथ ही, हाईकोर्ट के आदेश के प्रभाव और संचालन पर भी रोक लगा दी गई है, जिसमें मोहम्मद दीपक को घटना से जुड़े पोस्ट और वीडियो सोशल मीडिया पर डालने से प्रतिबंधित किया गया था.अब इस मामले में संबंधित अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करना होगा.


