किराए के घर में रहने वालों के लिए बिजली का बिल हर महीने परेशानी का कारण बन सकता है. खासकर तब, जब एक ही मुख्य बिजली कनेक्शन से कई कमरे या फ्लैट जुड़े हों और मकान मालिक कुल बिल को अलग-अलग किराएदारों में बांटकर लेता हो. ऐसे में यह समझना मुश्किल हो सकता है कि किसने कितनी बिजली इस्तेमाल की.
इस समस्या का एक तरीका सब-मीटर यानी अलग बिजली मीटर लगवाना है. इसे किसी कमरे, फ्लैट या घर के एक हिस्से की बिजली खपत को अलग से मापने के लिए लगाया जा सकता है. इससे किराएदार अपनी बिजली की यूनिट का हिसाब अलग से देख सकते हैं.
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सब-मीटर कैसे काम करता है?
सब-मीटर को उस कमरे, फ्लैट या हिस्से की बिजली लाइन में लगाया जाता है, जिसकी खपत अलग से मापनी हो. इसके बाद वहां चलने वाले बिजली के उपकरणों से होने वाली खपत मीटर में दर्ज होती रहती है.
मसलन, अगर किसी मकान में चार किराएदार रहते हैं और पूरे घर के लिए एक ही मुख्य बिजली कनेक्शन है, तो कुल बिल को चार हिस्सों में बांटना मुश्किल हो सकता है. लेकिन अगर हर हिस्से में अलग सब-मीटर लगा हो तो हर किराएदार की बिजली खपत अलग से देखी जा सकती है.
इससे यह पता चल सकता है कि किस हिस्से में कितनी यूनिट बिजली इस्तेमाल हुई.
किराएदारों के लिए क्या है इसका फायदा?
सब-मीटर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किराएदार अपनी बिजली खपत का अलग रिकॉर्ड रख सकते हैं. अगर किसी महीने बिजली का बिल अचानक बढ़ जाता है तो मीटर की रीडिंग देखकर यह समझने में मदद मिल सकती है कि वास्तव में कितनी यूनिट बिजली इस्तेमाल हुई.
यह लंबे समय तक किराए के घर में रहने वाले लोगों के लिए ज्यादा उपयोगी हो सकता है. अलग रीडिंग होने से मकान मालिक और किराएदार के बीच बिजली के बिल को लेकर होने वाला कन्फ्यूजन भी कम हो सकता है.
अगर किसी कमरे या फ्लैट में AC, गीजर, कूलर जैसे ज्यादा बिजली खपत करने वाले उपकरण चल रहे हैं तो उनकी वजह से बढ़ने वाली खपत भी मीटर की रीडिंग में दिखाई दे सकती है.
सब-मीटर की कीमत कितनी होती है?
सब-मीटर की कीमत उसके प्रकार, कंपनी और फीचर्स के आधार पर अलग-अलग हो सकती है.
दिए गए विवरण के मुताबिक बाजार में सामान्य single-phase digital sub-meter करीब 1,000 से 2,500 रुपये के आसपास मिल सकता है. वहीं smart features या ज्यादा सुविधाओं वाले मॉडल की कीमत इससे अधिक भी हो सकती है.
इसके अलावा मीटर की installation के लिए electrician का charge अलग से देना पड़ सकता है. इसलिए खरीदारी करते समय सिर्फ मीटर की कीमत नहीं, बल्कि installation cost के बारे में भी पहले जानकारी लेनी चाहिए.
मीटर खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें?
सब-मीटर खरीदते समय केवल कम कीमत को आधार नहीं बनाना चाहिए. सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि मीटर आपकी बिजली supply के हिसाब से उपयुक्त है या नहीं.
मीटर की reading आसानी से दिखाई दे, इसकी quality अच्छी हो और आपकी जरूरत के मुताबिक उसकी capacity होनी चाहिए. खासकर अगर कमरे या फ्लैट में AC, geyser या दूसरे ज्यादा बिजली खपत करने वाले उपकरण चलते हैं तो मीटर की क्षमता पर ध्यान देना जरूरी है.
इसे खुद install करने के बजाय किसी योग्य electrician से लगवाना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है.
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क्या सब-मीटर आधिकारिक बिजली मीटर की जगह ले सकता है?
सब-मीटर बिजली की खपत का अलग हिसाब रखने के लिए उपयोगी है, लेकिन इसे सरकारी या बिजली वितरण कंपनी के आधिकारिक meter का विकल्प नहीं समझना चाहिए.
मुख्य बिजली connection और official billing system बिजली वितरण कंपनी के नियमों के अनुसार ही चलता है. यानी सब-मीटर का इस्तेमाल कमरे या फ्लैट की खपत को अलग से मापने के लिए किया जा सकता है.
एक ही मुख्य मीटर से कई किराएदार जुड़े होने की स्थिति में इससे हर हिस्से की बिजली खपत का हिसाब ज्यादा स्पष्ट रखने में मदद मिल सकती है.


