Karwa Chauth 2026: करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं. साल 2026 में करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा. इस बार करवा चौथ के दिन सुबह कुछ समय के लिए भद्रा का समय भी रहेगा. ऐसे में पूजा और श्रृंगार को लेकर महिलाओं के मन में कई सवाल हैं.
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29 अक्टूबर को इस समय रहेगी भद्रा
NDTV की रिपोर्ट में आचार्य मदन मोहन ने बताया है कि 29 अक्टूबर को सुबह 6:25 बजे से 6:46 बजे तक भद्रा रहेगी. यानी करीब 21 मिनट तक भद्रा का समय रहेगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है.
करवा चौथ के दिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर रात में चंद्रमा के दर्शन और पूजा के बाद व्रत खोलती हैं. इस दिन नए कपड़े पहनने, मेहंदी लगाने और सोलह श्रृंगार करने की भी परंपरा है.
भद्रा के समय न पहनें सुहाग की चीजें
रिपोर्ट के मुताबिक, भद्रा के दौरान महिलाओं को सुहाग से जुड़ी वस्तुएं पहनने से बचने की सलाह दी गई है. इसमें श्रृंगार और सुहाग की अन्य वस्तुएं शामिल हैं. भद्रा समाप्त होने के बाद महिलाएं अपना श्रृंगार कर सकती हैं.
यह ध्यान रखना जरूरी है कि भद्रा और इससे जुड़े नियम धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं. अलग-अलग पंचांग और परंपराओं में मुहूर्त को लेकर अंतर हो सकता है.
भद्रा के दौरान भगवान शिव का करें ध्यान
भद्रा के समय को लेकर परेशान होने के बजाय भगवान शिव का ध्यान और पूजन करने की सलाह दी गई है. धार्मिक मान्यता के अनुसार महादेव की पूजा मन को शांति प्रदान करती है.
महिलाएं इस दौरान शांत मन से भगवान शिव का स्मरण कर सकती हैं और अपने पति तथा परिवार के सुख-स्वास्थ्य की कामना कर सकती हैं.
चंद्रमा को अर्घ्य देते समय रखें इन बातों का ध्यान
करवा चौथ की पूजा में चंद्रमा को अर्घ्य देने का विशेष महत्व माना जाता है. व्रत रखने वाली महिलाएं रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद विधि-विधान से पूजा करती हैं और अर्घ्य देकर पति के हाथों से जल ग्रहण कर व्रत खोलती हैं.
आचार्य की सलाह के अनुसार अर्घ्य के जल में सफेद चंदन और शमी पत्र डालकर चंद्रमा को अर्पित किया जा सकता है. इसके साथ सुखी दांपत्य जीवन और मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करने की बात कही गई है.
पूजा में लें परिवार की खुशहाली का संकल्प
करवा चौथ की पूजा के दौरान महिलाएं अपने परिवार की सुख-शांति और वैवाहिक जीवन की खुशहाली का संकल्प ले सकती हैं. श्रद्धा के साथ पूजा और प्रार्थना करना इस पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.
करवा चौथ केवल व्रत रखने का पर्व नहीं बल्कि पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और पारिवारिक सुख की कामना से जुड़ी परंपरा भी है. इसलिए पूजा के दौरान मन को शांत रखते हुए श्रद्धा के साथ भगवान का स्मरण करना चाहिए.


