Narmada Expressway: मध्य प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली बड़ी परियोजनाओं में नर्मदा एक्सप्रेसवे भी शामिल है. करीब 906 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित यह एक्सप्रेसवे मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से को पश्चिमी सीमा से जोड़ने की योजना का हिस्सा है. मध्य प्रदेश विधानसभा में सरकार की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इसकी कुल प्रस्तावित लंबाई 906 किलोमीटर है. परियोजना को लेकर मार्च 2022 में सैद्धांतिक अनुमोदन दिए जाने की जानकारी भी विधानसभा में रखी गई थी.
यह पूरा कॉरिडोर एक साथ तैयार होने के बजाय अलग-अलग हिस्सों में आगे बढ़ाया जा रहा है. कुछ हिस्सों में निर्माण संबंधी गतिविधियों की जानकारी दी गई है, जबकि कुछ हिस्से डीपीआर यानी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के स्तर पर रहे हैं. इसलिए पूरे एक्सप्रेसवे के निर्माण की अंतिम समयसीमा और कुल लागत को लेकर अभी स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं बताया गया था.
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अमरकंटक से शुरू होकर झाबुआ तक प्रस्तावित रूट
सरकारी रिकॉर्ड में नर्मदा एक्सप्रेसवे का रूट अमरकंटक से शुरू होकर जबलपुर, औबेदुल्लागंज, बुधनी, नसरुल्लागंज, संदलपुर, करनावद, इंदौर, धार और सरदारपुर होते हुए झाबुआ की ओर बताया गया है.
इसके आगे इसे मध्य प्रदेश-गुजरात सीमा तक पहुंचने के लिए प्रस्तावित किया गया है. इस तरह यह कॉरिडोर मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से को पश्चिमी हिस्से से जोड़ने वाली लंबी सड़क कड़ी के तौर पर काम कर सकता है.
इससे अलग-अलग शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच सड़क संपर्क को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
जबलपुर से चचवारा वाले हिस्से पर भी काम
सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक नर्मदा एक्सप्रेसवे के अलग-अलग हिस्सों में निर्माण संबंधी गतिविधियां चल रही थीं. विधानसभा में जबलपुर से चचवारा तक के कार्य के लिए 842.32 करोड़ रुपये की राशि से संबंधित जानकारी दी गई थी.
परियोजना के अलग-अलग हिस्सों पर अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से काम किया जा रहा है. वहीं कुछ हिस्सों के लिए डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया की जानकारी भी सरकारी जवाब में दी गई थी.
छत्तीसगढ़ से गुजरात तक कनेक्टिविटी की योजना
नर्मदा प्रगति पथ का कनेक्शन मध्य प्रदेश की सीमाओं से आगे भी महत्वपूर्ण हो सकता है. प्रस्तावित कॉरिडोर पूर्व में छत्तीसगढ़ के कबीरधाम और राजनांदगांव क्षेत्र की तरफ कनेक्टिविटी बढ़ाने में मदद कर सकता है.
पश्चिम में गुजरात की तरफ जाने वाले रास्तों से जुड़ने पर यह मध्य भारत को पश्चिमी भारत के बड़े बाजारों और पोर्ट नेटवर्क से जोड़ने में मदद कर सकता है.
गुजरात की तरफ अहमदाबाद-वडोदरा एक्सप्रेसवे और भरूच पोर्ट जैसे कनेक्शन से जुड़ने पर मध्य प्रदेश के उद्योगों के लिए माल को पश्चिमी तट तक पहुंचाना आसान होने की संभावना है.
धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच हो सकती है आसान
नर्मदा एक्सप्रेसवे का संभावित फायदा केवल इंडस्ट्री और माल परिवहन तक सीमित नहीं है. इसके रूट से जुड़े कई धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक सड़क कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है.
अमरकंटक, जबलपुर का भेड़ाघाट, ओंकारेश्वर और महेश्वर जैसे पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होने से धार्मिक पर्यटन और इको टूरिज्म को बढ़ावा मिल सकता है.
इससे होटल, रेस्टोरेंट, लोकल ट्रांसपोर्ट और दूसरे छोटे कारोबारों के लिए भी रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना बताई गई है.
906 KM का कॉरिडोर, लेकिन अभी पूरा तैयार नहीं
विधानसभा में सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक नर्मदा एक्सप्रेसवे की कुल प्रस्तावित लंबाई 906 किलोमीटर है. हालांकि इसे अभी पूरी तरह तैयार एक्सप्रेसवे मानना सही नहीं होगा.
परियोजना के अलग-अलग हिस्से अलग-अलग चरणों में रहे हैं. कहीं निर्माण संबंधी काम की जानकारी है तो कुछ हिस्से डीपीआर के स्तर पर हैं.
इसी वजह से पूरे प्रोजेक्ट की अंतिम निर्माण अवधि और कुल लागत का आंकड़ा उस समय उपलब्ध नहीं बताया गया था.
औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ने की भी योजना
नर्मदा एक्सप्रेसवे को औद्योगिक कनेक्टिविटी के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. विधानसभा में सरकार ने बताया था कि एक्सप्रेसवे को औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ने के संबंध में प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं.
यदि यह योजना प्रस्तावित स्वरूप में आगे बढ़ती है, तो भविष्य में माल ढुलाई और औद्योगिक गतिविधियों को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी का लाभ मिल सकता है.
यात्रियों और कारोबार को मिल सकता है फायदा
नर्मदा एक्सप्रेसवे के प्रस्तावित रूट में अमरकंटक, जबलपुर, भोपाल क्षेत्र, इंदौर, धार और झाबुआ जैसे इलाके शामिल हैं. ऐसे में परियोजना के आगे बढ़ने पर पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के बीच सड़क संपर्क मजबूत हो सकता है.
बेहतर कनेक्टिविटी का संभावित फायदा यात्रियों के साथ-साथ कारोबार और माल परिवहन को भी मिल सकता है. हालांकि परियोजना के सभी हिस्सों के निर्माण और संचालन की अंतिम तारीख अभी स्पष्ट नहीं है.
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इसलिए 906 किलोमीटर के इस प्रस्तावित कॉरिडोर को लेकर फिलहाल उपलब्ध जानकारी को परियोजना की मौजूदा स्थिति और अलग-अलग चरणों के संदर्भ में ही देखना जरूरी है.


