UPI को लेकर नए फ्रेमवर्क में आम लोगों और छोटे व्यापारियों के लिए राहत बरकरार रखी गई है. नए फ्रेमवर्क का पर्सन-टू-पर्सन यानी P2P लेन-देन पर कोई असर नहीं पड़ेगा. UPI से किसी व्यक्ति को पैसे भेजना या प्राप्त करना पूरी तरह निःशुल्क रहेगा, चाहे ट्रांसफर की राशि कितनी भी हो.
व्यापारियों को किए जाने वाले ₹2,000 तक के भुगतान भी बिना MDR के जारी रहेंगे. इसके अलावा छोटे व्यापारियों के लिए लागू Zero-MDR फ्रेमवर्क के तहत आने वाले लेन-देन भी निःशुल्क रहेंगे. आंकड़ों के अनुसार करीब 96% P2M यानी Person-to-Merchant लेन-देन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे.
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UPI में क्या-क्या रहेगा बिल्कुल फ्री
नए फ्रेमवर्क के तहत सभी P2P UPI ट्रांजैक्शन पूरी तरह निःशुल्क रहेंगे. लोगों से पैसा भेजने या प्राप्त करने के लिए कोई transaction fee, platform fee या अन्य शुल्क नहीं लिया जाएगा. कुल transaction value के करीब 70% के बराबर UPI लेन-देन MDR फ्रेमवर्क से बाहर रहेंगे.
₹2,000 तक के सभी P2M भुगतान पर भी MDR नहीं लगेगा. यानी UPI के जरिए इस सीमा तक व्यापारी को भुगतान करने वाले ग्राहक से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा.
छोटे व्यापारियों के लिए भी Zero-MDR व्यवस्था जारी रहेगी. P2PM श्रेणी के तहत UPI QR Code के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक भुगतान प्राप्त करने वाले स्ट्रीट वेंडर्स समेत छोटे व्यापारियों को सभी लेन-देन पर Zero-MDR का लाभ मिलता रहेगा.
₹2,000 से ज्यादा के भुगतान पर क्या होगा
नए फ्रेमवर्क में ₹2,000 से अधिक के निर्दिष्ट P2M लेन-देन पर 0.4% MDR लागू होगा. यह राशि बैंकों, Payment Service Providers और UPI Application Providers समेत भुगतान प्रणाली के प्रतिभागियों के बीच साझा की जाएगी.
₹75,000 और उससे अधिक के लेन-देन के लिए MDR को प्रति लेन-देन अधिकतम ₹300 तक सीमित रखा गया है.
रेलवे, टेलीकॉम और ईंधन जैसे क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था
रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे आवश्यक और कम लाभ वाले क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के लेन-देन पर ₹5 का समान MDR लागू होगा. इसका उद्देश्य इन क्षेत्रों में भुगतान लागत को निश्चित रखना है.
वहीं म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों, स्टॉकब्रोकरों और डीलरों से जुड़े पूंजी बाजार लेन-देन पर 0.02% MDR लागू होगा. इसे भी प्रति लेन-देन ₹300 तक सीमित रखा गया है.
ग्राहक को MDR नहीं देना होगा
MDR व्यापारी भुगतान प्रणाली के तहत लगने वाला शुल्क है. यह UPI से भुगतान करने वाले ग्राहक पर लगाया जाने वाला शुल्क नहीं है. बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी MDR की लागत ग्राहकों पर न डालें.
UPI Application Providers को platform fee या hidden charges लगाने से स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया गया है. साथ ही लोगों के लिए UPI के मुफ्त इस्तेमाल पर कोई मासिक कोटा, मात्रा सीमा या मुफ्त लेन-देन की सीमा नहीं होगी.
यहां यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि बैंक और NPCI द्वारा तय की गई दैनिक transaction limits अलग विषय हैं. ये सीमाएं सुरक्षा और risk management के लिए होती हैं, शुल्क लगाने की सीमा नहीं हैं.
96% व्यापारी लेन-देन पर नहीं पड़ेगा असर
उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार MDR करीब 4% व्यापारी लेन-देन पर ही लागू होगा. इसका मतलब है कि करीब 96% व्यापारी लेन-देन नए MDR फ्रेमवर्क से अप्रभावित रहेंगे.
इन लेन-देन में वे भुगतान शामिल हैं जो ₹2,000 की सीमा के भीतर हैं या छोटे व्यापारियों के Zero-MDR फ्रेमवर्क के अंतर्गत आते हैं.
छोटे व्यापारियों के लिए बनेगा अलग फंड
छोटे व्यापारियों के बीच UPI को बढ़ावा देने के लिए एक dedicated fund स्थापित किया जाएगा. इसमें कुल MDR collection के 5% के बराबर राशि जमा की जाएगी.
इस फंड का इस्तेमाल UPI की व्यापक स्वीकृति, लगातार इस्तेमाल और भारत के digital payment system में छोटे कारोबारों की भागीदारी को बढ़ाने में सहयोग के लिए किया जाएगा.
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नए फ्रेमवर्क का उद्देश्य क्या है
इस फ्रेमवर्क का उद्देश्य UPI की long-term sustainability को मजबूत करना है, जबकि लोगों के लिए भुगतान को निःशुल्क और छोटे व्यापारियों को अतिरिक्त लागत से सुरक्षित रखना है.
बड़े व्यापारी लेन-देन से मिलने वाला revenue बैंकों, Payment Service Providers और UPI Application Providers को ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों समेत payment infrastructure के विस्तार और सुधार में मदद करेगा.
यह फ्रेमवर्क वित्त संबंधी स्थायी समिति की 32वीं रिपोर्ट में दी गई उस सिफारिश के अनुरूप भी बताया गया है, जिसमें एक viable revenue की जरूरत पर जोर दिया गया था.


