Advice for Dog Lovers: क्या हुआ यह वीडियो देखकर…कलेजा मुंह को आ गया न… मन घिन से भर गया न… अब अगर कोई आपको इस तरह का पालतू कुत्ते का….
मैं कतई लिखना नहीं चाहती थी लेकिन आज मेरा मन इतना ज्यादा खराब हो गया कि मैं बहुत ज्यादा टूट गई हूं. इस धरती पर मौजूद हर एक जीव में जान है और मैं भी उनका सम्मान करती हूं लेकिन ईश्वर ने हर एक के लिए जगह भी बनाई है कि उन्हें कहां पर रखना है. आज हरियाणा के सोनीपत का एक वीडियो देखने के बाद मानो मेरी सांसें ही थम सी गई हों. मैं आधे घंटे समझ नहीं सकी कि आखिर क्या बीत रही होगी उस मां के दिल पर, जिसके हाथों से उसके मासूम को छीनकर खूंखार पिटबुल ने किसी सामान की तरह नोचना शुरू कर दिया. मैं जितनी बार उस वीडियो के बारे में सोच रही हूं, मेरा कलेजा कांप सा जा रहा है.
जरा आप सोचिए कि आप अपने कलेजे के टुकड़े को लेकर थोड़ा बाहर की हवा खिलाने निकलें. तक तक किसी पड़ोसी का गेट खुले और उसमें से खूंखार राक्षस की तरह मुंह खोले कोई कुत्ता आपके बच्चे पर टूट पड़े तो आपका क्या मन करेगा…यही न कि तुरंत उस कुत्ते की गोली मारकर हत्या कर दें या किसी पत्थर से ऐसे मारें कि वो दोबारा उठे न.
मुझे समझ नहीं आता कि जब लोगों को पता है कि इतने खूंखार कुत्ते को रखने के लिए सरकार तक न रखने से मना किया है तो ये उसे घर में पनाह क्यों दिए हैं…क्यों ऐसे राक्षस जीवों को लेकर किसी दूसरे ग्रह नहीं चले जाते. सोनीपत में मासूम बच्चे पर कुत्ता ऐसे टूटा, मानों महीनों से भूखा हो. जब सब बच्चे को छुड़ा रहे थे तो किसी में इतनी ताकत नहीं थी कि उस बच्चे को हैवान के जबड़ों से छुड़ा सके. लोग चीख रहे हैं… पूरी कोशिश कर रहे हैं लेकिन पिटबुल ने ऐसे बच्चे को नोंचा, जैसे उसे खा ही जाना चाहता था. शर्म की बात तो यह है कि मेरी यह वीडियो कुत्ता प्रेमियों के दिल को चीर रही होगी. लेकिन मेरा सवाल बस इतना है कि जब इन खूंखारों को सही से खिला-पिला नहीं सकते, सही से कंट्रोल नहीं कर सकते तो पालते क्यों हो… दूसरों को कटवाने के लिए…दूसरों की जान लेने के लिए.
अरे तुम लोग नहीं हो, जो खुद के लोगों को प्यार तो दे नहीं पाते हो, बड़े आए कुत्ते पर प्यार जताते हो. जताना है तो अपने महल में जताओ क्यों किसी और पर हमला करने के लिए छोड़ देते हो. देशभर से आए दिन कुत्ते के हमले की खबरें पढ़कर मन इतना विचलित हो जाता है कि क्या कहें. ऐसे लोगों से बस एक गुजारिश है कि अपने पशु प्रेम को अपने घर तक ही सीमित रखेें, दूसरों की जिंदगी में दुख या हमले के लिए नहीं.
एक आम नागरिक


