अमेरिका में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की व्यवस्था वाले नए कानून को लेकर चीन ने कड़ा विरोध जताया है. चीन के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी कांग्रेस की इस पहल की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे कानूनों का अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है.
चीन ने कहा है कि वह इस तरह के कानूनों का विरोध करता है, जिनके जरिए अमेरिका दूसरे देशों पर एकतरफा पाबंदियां या अपना अधिकार जताने की कोशिश करता है. यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब अमेरिकी कांग्रेस ने रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से एक व्यापक sanctions और tariff bill पारित किया है. Reuters के मुताबिक, अमेरिकी House of Representatives ने संबंधित विधेयक 262-159 के vote से पारित किया और इसे राष्ट्रपति के पास भेजा है.
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चीन ने क्या कहा?
चीन के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया platform X पर कहा कि चीन दूसरे देशों के साथ बराबरी और आपसी फायदे के आधार पर सामान्य economic और trade cooperation करता है.
चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह सहयोग किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है और इसमें किसी तरह की रुकावट या दबाव नहीं होना चाहिए.
चीन ने ऐसे कानूनों का भी विरोध किया जिनके जरिए दूसरे देशों पर अधिकार जताने या unilateral sanctions लगाने की कोशिश की जाती है. चीन के अनुसार, अगर ऐसे कदमों का international law में आधार नहीं है और उन्हें United Nations Security Council की मंजूरी भी नहीं मिली है, तो चीन उनका विरोध करता है.
रूस से जुड़े कारोबार पर कितना टैरिफ?
दिए गए विवरण के अनुसार, इस विधेयक में रूसी products पर 500 प्रतिशत तक tariff लगाने का प्रावधान है.
इसके अलावा रूस से oil और gas खरीदने वाले देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक tariff लगाया जा सकता है. इस व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है जो रूस से energy imports जारी रखते हैं.
Reuters के अनुसार भी bill में China, India और अन्य देशों पर Russian energy dependence कम करने के उद्देश्य से 100 प्रतिशत तक tariffs की authority का प्रावधान है.
कुछ देशों को मिल सकती है छूट
सीनेटर केटी ब्रिट के कार्यालय के अनुसार, कुछ देशों को इस व्यवस्था से exemption दी जा सकती है.
ऐसे देशों में वे देश शामिल हो सकते हैं जहां रूस से imported natural gas, रूस के कुल gas exports का 15 प्रतिशत से कम है और जो अपनी Russian gas purchases कम करने के लिए गंभीर कदम उठा रहे हैं.
इसका मतलब है कि proposed tariff व्यवस्था में कुछ परिस्थितियों के तहत देशों को छूट देने का प्रावधान भी बताया गया है.
कानून का उद्देश्य क्या है?
इस कानून का उद्देश्य रूस को मिलने वाले उन economic resources को कम करना है, जिनसे यूक्रेन के खिलाफ उसका युद्ध जारी रखने में मदद मिलती है.
इसके तहत Russian officials, banks, energy sector से जुड़ी entities और रूस के military operations का समर्थन करने वाली foreign entities को target किया गया है.
विधेयक के प्रावधान उन बड़े देशों को भी प्रभावित कर सकते हैं जो रूस से बड़ी मात्रा में energy imports करते हैं या Russia पर लगाए गए oil restrictions को bypass करने में मदद करते हैं.
अमेरिकी कानून के तहत proposed व्यवस्था में बड़े Russian energy buyers पर अतिरिक्त economic pressure डालने का रास्ता बनाया गया है. Reuters ने भी बताया है कि legislation Russia के energy और defence sectors के साथ sanctions से बचने वाले oil tankers को target करता है.
हर 180 दिन में होगी समीक्षा
दिए गए विवरण के अनुसार, अमेरिकी trade representative हर 180 दिन में इस व्यवस्था की समीक्षा करेगा.
जरूरत पड़ने पर अन्य देशों को भी इस list में जोड़ा जा सकता है. यानी यह व्यवस्था केवल शुरुआती तौर पर तय किए गए देशों तक सीमित नहीं रहने की संभावना रखती है.
हालांकि, मौजूदा स्थिति में यह ध्यान रखना जरूरी है कि source में बताए गए tariff provisions को लेकर कानून की प्रक्रिया और उसके लागू होने की स्थिति अलग-अलग चरणों में हो सकती है. Reuters के अनुसार House से पारित bill राष्ट्रपति के पास approval के लिए भेजा गया है.
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चीन और अमेरिका के बीच बढ़ा मुद्दा
चीन की आपत्ति मुख्य रूप से इस बात पर है कि अमेरिका ऐसे कदमों के जरिए दूसरे देशों के सामान्य economic और trade relations को प्रभावित न करे. चीन ने international law और United Nations Security Council authorization का हवाला देते हुए unilateral restrictions का विरोध किया है.
वहीं, अमेरिकी विधेयक का घोषित उद्देश्य रूस पर economic pressure बढ़ाना और उसके energy revenues को प्रभावित करना है. इस तरह Russia से जुड़े energy trade पर प्रस्तावित tariffs को लेकर Washington और Beijing के बीच मतभेद सामने आए हैं.
इस मामले में आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिकी प्रशासन इन tariff provisions को किस तरह लागू करता है और संबंधित देशों पर इनका प्रभाव किस रूप में पड़ता है.


