UP Expressway News: उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने की तैयारी तेज हो गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में करीब 17,542.06 करोड़ रुपये की चार लिंक एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के निर्माणकर्ताओं के चयन को मंजूरी दी गई. इन परियोजनाओं के पूरा होने से प्रदेश के पश्चिमांचल, मध्यांचल और पूर्वांचल के बीच आवागमन आसान बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है. सरकार का लक्ष्य मौजूदा एक्सप्रेसवे नेटवर्क को आपस में जोड़कर यात्रा को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाना है.
फर्रुखाबाद से झांसी तक, इन 4 परियोजनाओं को मिली मंजूरी
योगी कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) की चार प्रमुख लिंक एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के विकासकर्ताओं के चयन को मंजूरी दी है. इनमें शामिल हैं-
- फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे: पैकेज-1 और पैकेज-2 के निर्माणकर्ताओं के चयन को मंजूरी.
- आगरा-लखनऊ से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे लिंक: दोनों एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाली परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ.
- झांसी लिंक एक्सप्रेसवे: पैकेज-1 और पैकेज-2 के लिए निर्माणकर्ताओं के चयन को मंजूरी.
- जेवर लिंक एक्सप्रेसवे: पैकेज-1 और पैकेज-2 के निर्माणकर्ताओं के चयन को मंजूरी.
इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल नई सड़कें बनाना नहीं, बल्कि प्रदेश में पहले से संचालित एक्सप्रेसवे के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करना भी है.
तीन साल में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य
सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक, इन परियोजनाओं को निर्माणकर्ताओं के चयन के बाद लगभग तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. निर्माण पूरा होने के बाद पांच वर्षों तक इनके रखरखाव की व्यवस्था भी की जाएगी. इनका विकास इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) मॉडल पर किया जाएगा. इस व्यवस्था के तहत निर्माण के साथ निर्धारित गुणवत्ता और समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा.
परियोजनाओं के निर्माण और अनुरक्षण का संभावित खर्च राज्य सरकार वहन करेगी. इसमें केंद्र सरकार की वित्तीय भागीदारी प्रस्तावित नहीं है. निर्माणकर्ताओं का चयन न्यूनतम वित्तीय प्रस्ताव देने वाले निविदाकर्ताओं के आधार पर किया गया है.
आगरा-लखनऊ से पूर्वांचल तक सफर होगा आसान
चारों परियोजनाओं में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाली सड़क खास मानी जा रही है. इससे प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है. वहीं, फर्रुखाबाद और झांसी लिंक एक्सप्रेसवे से संबंधित क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत हो सकती है. जेवर लिंक एक्सप्रेसवे से जेवर क्षेत्र को प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिलेगी.
इसका फायदा उन यात्रियों और व्यावसायिक वाहनों को भी मिल सकता है, जिन्हें अलग-अलग एक्सप्रेसवे तक पहुंचने के लिए अभी दूसरे मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ता है.
760 लाख मानव दिवस रोजगार का अनुमान
इन चारों परियोजनाओं के निर्माण और उनसे जुड़ी गतिविधियों के कारण प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 760 लाख मानव दिवस के रोजगार सृजित होने का अनुमान है. निर्माण कार्य के दौरान श्रमिकों, परिवहन सेवाओं, निर्माण सामग्री की आपूर्ति और दूसरे संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं. हालांकि, यह अनुमान मानव दिवस के आधार पर है, इसे इतने अलग-अलग व्यक्तियों को स्थायी नौकरी मिलने के आंकड़े के रूप में नहीं समझना चाहिए.
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यूपी के एक्सप्रेसवे नेटवर्क को जोड़ने पर जोर
यूपीडा प्रदेश में ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे विकसित करने के साथ मौजूदा सड़क नेटवर्क को मजबूत बनाने पर काम कर रहा है. प्राधिकरण के पांच एक्सप्रेसवे वर्तमान में संचालित हैं, जबकि आठ अन्य एक्सप्रेसवे का विकास प्रस्तावित है. चार नए लिंक एक्सप्रेसवे की परियोजनाओं को मंजूरी मिलने से इस नेटवर्क को आपस में जोड़ने की योजना को गति मिलने की उम्मीद है. इससे लंबी दूरी की यात्रा, माल परिवहन और विभिन्न क्षेत्रों के बीच संपर्क बेहतर हो सकता है.
फिलहाल, कैबिनेट की मंजूरी के बाद अगला अहम चरण परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर जमीन पर उतारना होगा. यदि निर्माण तय योजना के मुताबिक पूरा होता है, तो उत्तर प्रदेश के सड़क नेटवर्क को विस्तार देने के साथ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को भी मजबूती मिल सकती है.
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