उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए बाराबंकी से बहराइच तक करीब 101 किलोमीटर लंबा एक्सेस कंट्रोल्ड नेशनल हाईवे-927 बनाने की तैयारी है. केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद इस परियोजना से जुड़ी तैयारियां तेज हो गई हैं. इस हाईवे के बनने से लखनऊ से बहराइच पहुंचने में लगने वाला समय काफी कम होने की उम्मीद है. अभी इस सफर में करीब 3 से 4 घंटे लगते हैं, जबकि नया रास्ता बनने के बाद इसे लगभग डेढ़ घंटे में पूरा करने का अनुमान है.
इस परियोजना पर करीब ₹6,969.04 करोड़ खर्च होने का अनुमान है. शुरुआत में हाईवे चार लेन का बनाया जाएगा. भविष्य में वाहनों की संख्या और ट्रैफिक का दबाव बढ़ने पर इसे छह लेन तक विस्तारित करने की योजना है.
चार लेन का बनेगा बाराबंकी-बहराइच हाईवे
बाराबंकी-बहराइच एक्सप्रेसवे लखनऊ-रुपईडीह कॉरिडोर का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा. करीब 101 किलोमीटर लंबा यह हाईवे आबादी और भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर बनाया जाएगा.
यह एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे होगा. इसका मतलब है कि इस पर वाहनों के प्रवेश और निकास के लिए निर्धारित स्थान होंगे. अनियंत्रित क्रॉसिंग और बीच रास्ते में आने वाली दूसरी रुकावटों को सीमित किया जाएगा. इससे वाहनों को लगातार सफर करने में मदद मिलेगी और यात्रा का समय कम हो सकता है.
शुरुआत में चार लेन की सड़क बनाई जाएगी. बाद में जरूरत के अनुसार इसे छह लेन तक बढ़ाने की योजना है. इसके अलावा स्थानीय वाहनों की आवाजाही के लिए सर्विस लेन भी विकसित की जाएगी.
बाराबंकी, रामनगर और कैसरगंज समेत इन इलाकों को फायदा
इस हाईवे से बाराबंकी, रामनगर, जरवल, कैसरगंज, कुंडासर, फखरपुर और बहराइच जैसे क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा गोंडा, बलरामपुर और श्रावस्ती के लोगों को भी आसपास के इलाकों तक पहुंचने में सुविधा हो सकती है.
परियोजना में करीब 48.28 किलोमीटर लंबा बाईपास बनाने की भी योजना है. इससे स्थानीय आबादी वाले क्षेत्रों में ट्रैफिक का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है.
नया हाईवे नेशनल हाईवे-27, NH-330N, NH-730 और स्टेट हाईवे-13 व 30B जैसे मार्गों से भी संपर्क बेहतर करेगा. इससे आसपास के जिलों के बीच सड़क परिवहन को फायदा मिलने की संभावना है.
नेपाल बॉर्डर तक कारोबार और पर्यटन को मिल सकती है रफ्तार
बाराबंकी-बहराइच हाईवे का महत्व केवल लखनऊ और बहराइच के बीच यात्रा का समय कम करने तक सीमित नहीं है. बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से नेपाल सीमा के आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचना भी आसान हो सकता है.
इससे सीमा क्षेत्र में व्यापार, पर्यटन और मालवाहक वाहनों की आवाजाही को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. तराई क्षेत्र में पैदा होने वाले फल और सब्जियों को लखनऊ और दूसरे बड़े शहरों की मंडियों तक पहुंचाने में भी सुविधा हो सकती है.
बेहतर परिवहन व्यवस्था से किसानों को अपनी उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने का अवसर मिल सकता है. वहीं, माल की ढुलाई में लगने वाला समय और ईंधन बचने की भी संभावना है.
₹6,969 करोड़ की परियोजना, जमीन अधिग्रहण पर खर्च होंगे ₹1,574 करोड़
बाराबंकी-बहराइच हाईवे को Hybrid Annuity Model यानी HAM के तहत विकसित करने की योजना है. इस मॉडल में निजी भागीदार परियोजना के निर्माण में निवेश करते हैं और सरकार तय शर्तों के अनुसार भुगतान करती है.
परियोजना की कुल अनुमानित लागत ₹6,969.04 करोड़ है. इसमें करीब ₹1,574 करोड़ जमीन अधिग्रहण पर खर्च होने का अनुमान है.
हाईवे के रास्ते में वन विभाग की लगभग 70 हेक्टेयर जमीन भी आ रही है. इसके लिए करीब ₹900 करोड़ मुआवजे का प्रावधान बताया गया है. वन क्षेत्र से जुड़े नियमों के तहत काटे जाने वाले पेड़ों के बदले दस गुना पौधे लगाने की योजना भी शामिल है.
79 लाख लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान
इस परियोजना से क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. अनुमान के मुताबिक, हाईवे के निर्माण और उससे जुड़ी गतिविधियों से करीब 36 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और 43 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है.
बेहतर सड़क नेटवर्क से कृषि, व्यापार, परिवहन और पर्यटन जैसे क्षेत्रों को फायदा पहुंचने की संभावना है. खासकर तराई क्षेत्र के जिलों को बड़े बाजारों से जोड़ने में यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
कुल मिलाकर, बाराबंकी-बहराइच हाईवे बनने के बाद लखनऊ से बहराइच के बीच यात्रा आसान और तेज होने की उम्मीद है. इसके साथ ही आसपास के जिलों की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है.
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