Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में आने वाले पांच वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में 5.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाएं हैं. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दिल्ली में आयोजित भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो में निवेशकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को राज्य में निवेश के लिए आमंत्रित किया. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने के साथ ग्रीन एनर्जी की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है.
2 से 5 नवंबर तक आयोजित चार दिवसीय वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मंडपम में किया. इस मौके पर केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी और केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाईक भी मौजूद रहे.
5.60 लाख करोड़ के निवेश से बदलेगी छत्तीसगढ़ की ऊर्जा तस्वीर
समिट को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य की ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी निवेश योजनाओं का खाका पेश किया. उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में 23,923 मेगावाट क्षमता की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए करीब 1.33 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है. वहीं, थर्मल पावर उत्पादन क्षमता के विस्तार पर लगभग 3.27 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है.
राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक ग्रीन एनर्जी की क्षमता को मौजूदा 3,000 मेगावाट से बढ़ाकर 15,000 मेगावाट करना है. इसके साथ ही कुल बिजली मांग में हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 45 प्रतिशत से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ वर्ष 2030 तक गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से 500 गीगावाट बिजली उत्पादन के भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगा.
65 हजार करोड़ से बनेंगे 10 पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट
छत्तीसगढ़ में बिजली आपूर्ति को मजबूत और भरोसेमंद बनाने के लिए 12,300 मेगावाट क्षमता की 10 पंप्ड स्टोरेज जलविद्युत परियोजनाओं की पहचान की गई है. इन पर करीब 65,000 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है.
इसके अलावा अगले दो वर्षों में 10,000 मेगावाट-घंटे क्षमता के बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम स्थापित करने की योजना है. राजनांदगांव में 100 मेगावाट के सोलर प्रोजेक्ट के साथ 40 MW/120 MWh का बैटरी स्टोरेज सिस्टम पहले से संचालित है.
छत्तीसगढ़ का पहला सोलर गांव बना खेड़ा
मुख्यमंत्री ने राज्य में सौर ऊर्जा के विस्तार की जानकारी देते हुए बताया कि राजनांदगांव जिले का खेड़ा गांव छत्तीसगढ़ का पहला पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित गांव बन गया है. यहां सभी 141 घरों की छतों पर 2 किलोवाट के सोलर पैनल लगाए गए हैं. इनसे कुल 282 किलोवाट बिजली का उत्पादन हो रहा है. खास बात यह है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने 93 घर भी सौर ऊर्जा से रोशन हो रहे हैं. इसके लिए ग्रामीणों को कोई खर्च नहीं उठाना पड़ा है.
1.26 लाख घरों में लगे सोलर सिस्टम, किसानों को भी फायदा
प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत छत्तीसगढ़ में अब तक करीब 1.26 लाख सोलर पावर यूनिट स्थापित की जा चुकी हैं. वहीं, राज्य में 1.66 लाख सौर ऊर्जा संचालित सिंचाई पंपों के जरिए लगभग 1.94 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई की जा रही है. इसके अलावा प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत 395 मेगावाट क्षमता के सोलर पावर प्लांट स्थापित करने की योजना है. इससे किसानों को सिंचाई के लिए स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.
बायोगैस और ग्रीन हाइड्रोजन में भी निवेश की तैयारी
छत्तीसगढ़ में कृषि अपशिष्ट, गोबर और अन्य जैविक संसाधनों से कंप्रेस्ड बायोगैस, बायो-इथेनॉल और ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है. राज्य में 80 मीट्रिक टन की संयुक्त क्षमता वाले आठ कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट स्थापित करने की योजना है. इन पर करीब 800 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है. इसके अलावा निजी निवेशकों के लगभग 6,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावों पर प्रक्रिया चल रही है.
वहीं, करीब 4,200 मेगावाट क्षमता के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों समेत विभिन्न ऊर्जा परियोजनाओं के लिए लगभग 1.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना की गई है.
130 से अधिक देशों के प्रतिनिधि ले रहे हिस्सा
2 से 5 नवंबर तक आयोजित भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट में 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं. इसमें 40 से अधिक मंत्री, नीति निर्माता, निवेशक और प्रमुख उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हैं. ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और ब्रिटेन सहित नौ देश कंट्री पार्टनर के रूप में शामिल हुए हैं. सम्मेलन में छत्तीसगढ़ समेत 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी ऊर्जा क्षमता और निवेश की संभावनाओं को प्रदर्शित किया.
इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ के स्टॉल का भी दौरा किया और निवेशकों को राज्य की नीतियों, संसाधनों तथा ऊर्जा परियोजनाओं की जानकारी दी. उनके साथ मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे.
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार औद्योगिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ रही है.
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