Critical Mineral Processing Scheme: भारत को महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने वाली 2,814 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान इसकी जानकारी दी. इस योजना के तहत देश में लिथियम और निकेल के प्रसंस्करण के लिए चार औद्योगिक इकाइयां स्थापित की जाएंगी. सरकार पात्र निवेश पर 30 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी भी देगी.
पांच साल में खर्च होंगे 2,814 करोड़ रुपये
इस योजना का संचालन वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक किया जाएगा. इसका मुख्य उद्देश्य भारत में महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण की घरेलू क्षमता विकसित करना है. इसके तहत लिथियम और निकेल के अयस्क या मध्यवर्ती उत्पादों को उच्च शुद्धता वाले यौगिकों में बदलने के लिए आधुनिक प्रोसेसिंग सुविधाएं विकसित की जाएंगी.
निकेल के उत्पादन के दौरान कोबाल्ट की भी उप-उत्पाद के रूप में प्राप्ति की योजना है. इन खनिजों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम, रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और विशेष इस्पात जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में होता है.
लिथियम और निकेल के दो-दो प्लांट लगेंगे
सरकार की योजना के तहत कुल चार प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किए जाएंगे. इनमें दो लिथियम और दो निकेल प्रसंस्करण इकाइयां शामिल होंगी.
- लिथियम प्लांट: दो इकाइयां, प्रत्येक की न्यूनतम क्षमता 30 हजार टन.
- निकेल प्लांट: दो इकाइयां, प्रत्येक की न्यूनतम क्षमता 50 हजार टन.
- लिथियम के लिए सहायता: प्रति लाभार्थी अधिकतम 500 करोड़ रुपये.
- निकेल के लिए सहायता: प्रति लाभार्थी अधिकतम 900 करोड़ रुपये.
इन परियोजनाओं में पात्र निवेश का 30 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी के रूप में दिया जाएगा.
दो चरणों में होगा कंपनियों का चयन
योजना का लाभ देने के लिए कंपनियों का चयन दो चरणों में किया जाएगा. पहले चरण में आवेदकों की तकनीकी योग्यता का आकलन होगा. इसमें सफल होने वाली कंपनियां दूसरे चरण में वित्तीय बोली लगा सकेंगी.
प्रत्येक खनिज के लिए दो लाभार्थियों का चयन किया जाएगा. इसके लिए सबसे कम पूंजीगत सहायता मांगने वाली कंपनी को प्राथमिकता मिलेगी. सरकार प्रोत्साहन राशि तीन किस्तों में जारी करेगी. ये किस्तें परियोजना के निर्धारित लक्ष्यों और निर्माण की प्रगति से जुड़ी होंगी.
विदेशी निर्भरता कम करना है सरकार का लक्ष्य
फिलहाल महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण का काम दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों तक सीमित है. भारत लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे खनिजों से तैयार उच्च शुद्धता वाली सामग्री के लिए काफी हद तक विदेशों पर निर्भर है.
केंद्र सरकार के मुताबिक, वैश्विक राजनीतिक तनाव, कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति पर प्रतिबंध जैसी परिस्थितियां देश की आर्थिक सुरक्षा और औद्योगिक विकास के लिए चुनौती पैदा कर सकती हैं. वहीं, घरेलू स्तर पर प्रसंस्करण क्षमता सीमित होने के कारण बड़े पैमाने पर उत्पादन में भी कई बाधाएं आती हैं.
EV और बैटरी उद्योग को मिलेगी मजबूती
इस योजना से इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी निर्माण उद्योग को विशेष फायदा मिलने की उम्मीद है. लिथियम और निकेल आधुनिक बैटरी तकनीक के महत्वपूर्ण घटक हैं. इनके घरेलू प्रसंस्करण से भारत में मूल्य संवर्धन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी.
सरकार का मानना है कि यह पहल आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देने के साथ महत्वपूर्ण खनिजों की पूरी आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने में अहम भूमिका निभाएगी. इससे भारत भविष्य की तकनीकों, उन्नत विनिर्माण और ऊर्जा परिवर्तन के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत कर सकेगा.
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