नई दिल्ली: भारत के बड़े शहरों में शॉपिंग और रिटेल कारोबार की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है. यही वजह है कि अच्छी क्वालिटी वाले Grade-A मॉल में खाली जगह लगातार कम हो रही है. Cushman & Wakefield की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की तीसरी तिमाही में Grade-A मॉल की vacancy घटकर 4.8 फीसदी रह गई, जो पिछली तिमाही में 5 फीसदी थी. रिपोर्ट के मुताबिक, एक तरफ बड़े ब्रांड और रिटेलर्स लगातार नई जगह तलाश रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अच्छी लोकेशन और बेहतर सुविधाओं वाले मॉल में उपलब्ध जगह सीमित है. इससे ऐसे प्रीमियम रिटेल स्पेस की मांग बनी हुई है.
यह भी पढ़ें- फ्लाईदुबई कॉकपिट हमले की UAE में जांच, आतंकी कनेक्शन और साजिश के एंगल भी खंगाले जाएंगे
आठ बड़े शहरों में 2.22 MSF रिटेल लीजिंग
2026 की जुलाई-सितंबर तिमाही में देश के आठ प्रमुख शहरों में कुल 2.22 मिलियन वर्गफुट (MSF) रिटेल स्पेस लीज पर लिया गया. यह आंकड़ा पिछली तिमाही के मुकाबले 7.3 फीसदी और पिछले साल की समान तिमाही से 4.4 फीसदी कम है. हालांकि, पूरे साल के अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर काफी स्थिर है. जनवरी से सितंबर 2026 के बीच कुल 6.57 MSF रिटेल स्पेस की लीजिंग हुई, जो पिछले साल की इसी अवधि से 0.4 फीसदी अधिक है.
लगातार तीसरी तिमाही नहीं आया नया Grade-A मॉल
रिपोर्ट की एक अहम बात यह है कि 2026 की तीसरी तिमाही में भी कोई नया Grade-A मॉल बाजार में नहीं आया. यह लगातार तीसरी तिमाही है जब नई Grade-A मॉल सप्लाई नहीं हुई. इसका असर उपलब्ध जगह पर साफ दिखाई दे रहा है. अच्छी लोकेशन वाले मॉल में खाली स्पेस कम होने से रिटेलर्स के लिए विस्तार करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है.
2028 तक 12.7 MSF नया मॉल स्पेस आने की उम्मीद
हालांकि, आने वाले वर्षों में स्थिति बदल सकती है. Cushman & Wakefield के मुताबिक, 2028 तक करीब 12.7 मिलियन वर्गफुट Grade-A मॉल स्पेस बाजार में आने की उम्मीद है. इसमें से करीब 1.35 MSF स्पेस 2026 में पूरा होने का अनुमान है, जबकि बाकी सप्लाई 2028 तक अलग-अलग चरणों में आने की उम्मीद है. इस नए सप्लाई पाइपलाइन में दिल्ली-NCR सबसे आगे है. इसके बाद बेंगलुरु और चेन्नई का नंबर है.
Cushman & Wakefield के एग्जीक्यूटिव मैनेजिंग डायरेक्टर- मुंबई एंड न्यू बिजनेस गौतम सराफ ने कहा कि सीमित उपलब्धता फिलहाल रिटेल लीजिंग की रफ्तार को प्रभावित कर रही है. उनके मुताबिक, आने वाली नई सप्लाई से ब्रांड्स को विस्तार के लिए ज्यादा जगह मिल सकती है.
मुख्य बाजारों में बढ़ी दुकानों की मांग
रिटेल मार्केट की तस्वीर में एक और बड़ा बदलाव मुख्य बाजारों यानी Main Streets में देखने को मिला है. तीसरी तिमाही में इन इलाकों में 1.51 MSF स्पेस लीज हुआ, जो कुल तिमाही लीजिंग का 67.9 फीसदी है. Main Streets की लीजिंग पिछली तिमाही के मुकाबले 29.3 फीसदी और पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 33.1 फीसदी बढ़ी.
इसके उलट मॉल लीजिंग में गिरावट देखने को मिली. मॉल में लीजिंग पिछली तिमाही की तुलना में 42.1 फीसदी और सालाना आधार पर 37.8 फीसदी कम रही.
देसी कंपनियों का दबदबा, फैशन सबसे आगे
रिटेल स्पेस लेने में घरेलू कंपनियों और ब्रांड्स का दबदबा बरकरार है. कुल लीजिंग गतिविधि में 86.3 फीसदी हिस्सेदारी घरेलू रिटेलर्स की रही. कैटेगरी के हिसाब से देखें तो फैशन सबसे आगे रहा. कुल रिटेल लीजिंग में फैशन की हिस्सेदारी 24.9 फीसदी रही. इसके बाद फूड एंड बेवरेज (F&B) 19.2 फीसदी और एक्सेसरीज एंड लाइफस्टाइल 13.1 फीसदी हिस्सेदारी के साथ रहे. यानी इन तीनों कैटेगरी ने मिलकर कुल लीजिंग का 57.2 फीसदी हिस्सा अपने नाम किया.
यह भी पढ़ें- UP Rajya Sabha Election: अखिलेश यादव के साथ दिखे मंत्री राकेश सचान, तस्वीर के बाद सियासी कयास तेज
दिल्ली-NCR, हैदराबाद और मुंबई की बड़ी हिस्सेदारी
शहरों की बात करें तो दिल्ली-NCR, हैदराबाद और मुंबई ने मिलकर तीसरी तिमाही की कुल रिटेल लीजिंग में करीब 61 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की. Cushman & Wakefield के मुताबिक, आने वाले समय में रिटेल मार्केट का फोकस ऐसी जगहों पर ज्यादा रहने की उम्मीद है, जहां सिर्फ खरीदारी ही नहीं बल्कि ग्राहकों को बेहतर अनुभव भी मिले. यानी अच्छी लोकेशन, ब्रांड्स की विविधता, मनोरंजन और बेहतर ग्राहक अनुभव वाले रिटेल डेस्टिनेशन की मांग आगे और मजबूत हो सकती है. वहीं, फेस्टिव सीजन शुरू होने के साथ कंपनियों को ग्राहकों की खरीदारी में तेजी की उम्मीद है. ऐसे में आने वाले महीनों में मजबूत कंजम्पशन सेंटीमेंट रिटेल कारोबार के लिए अतिरिक्त सहारा बन सकता है.


