Uttar Pradesh News: यूजीसी इक्विटी नियमावली लागू करने की मांग को लेकर आजमगढ़ में आंदोलन तेज हो गया है. पूर्वांचल किसान यूनियन और सोशलिस्ट किसान सभा के बैनर तले कार्यकर्ताओं ने फूलपुर तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन उप जिलाधिकारी फूलपुर को सौंपा. प्रदर्शन के दौरान ‘यूजीसी रेगुलेशन लागू करो’, ‘न्यायपालिका में प्रतिनिधित्व की गारंटी करो’, ‘रोहित वैमूला अमर रहें’ और ‘पायल तड़वी अमर रहें’ जैसे नारे लगाए गए.
किसान संगठनों ने बताया कि मेंहनगर और निजामाबाद तहसीलों में ज्ञापन देने के बाद अब फूलपुर में कार्यक्रम आयोजित किया गया है. आगे जिले की सभी तहसीलों और ब्लॉक मुख्यालयों पर भी ज्ञापन सौंपे जाएंगे. साथ ही, यूजीसी के मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाने के लिए गांवों और कस्बों में ‘यूजीसी चौपाल’ आयोजित करने की योजना बनाई गई है.

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि रोहित वैमूला और पायल तड़वी की माताओं के लंबे संघर्ष के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी को गाइडलाइन बनाने का निर्देश दिया था. उत्पीड़न की घटनाओं को देखते हुए यूजीसी ने नियमावली तैयार की, लेकिन एक जाति विशेष के विरोध के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उस पर रोक लगा दी, जिसे वक्ताओं ने न्यायसंगत नहीं बताया. उनका कहना था कि हाल के प्रदर्शनों में छात्रों और संगठनों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, उससे यह संदेश जाता है कि वंचित वर्गों को उनके अधिकार देने में अनिच्छा दिखाई जा रही है.
इन बातों पर भी हुई चर्चा
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि लखनऊ में विश्वविद्यालय छात्रों और विधानसभा के बाहर प्रदर्शन करने वाले संगठनों के साथ उत्पीड़न हुआ. दिल्ली में यूजीसी समर्थकों के साथ अराजकता की घटनाओं और थाने में शिकायत दर्ज कराने गई महिला आंदोलनकारियों के साथ कथित अभद्र व्यवहार को भी उन्होंने गंभीर चिंता का विषय बताया. उनका कहना था कि भेदभाव को हथियार बनाकर सामाजिक असमानता को बनाए रखने की कोशिश की जा रही है.
सभा में यह भी कहा गया कि यूजीसी के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 से 2024 के बीच विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाति आधारित भेदभाव की शिकायतों में 118 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. ऐसे में विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को जातीय भेदभाव और उत्पीड़न से मुक्त बनाने के लिए यूजीसी इक्विटी नियमावली को न्यूनतम लेकिन जरूरी कदम बताते हुए इसे तुरंत लागू करने की मांग की गई.
सामाजिक न्याय को मजबूत करने के लिए ठोस नीतियां और योजनाएं बनाने पर जोर देते हुए वक्ताओं ने जाति जनगणना की आवश्यकता बताई. उनका कहना था कि जनगणना फॉर्म में जाति का कॉलम शामिल किया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक आंकड़ों के आधार पर नीतियां बनाई जा सकें.

वक्ताओं ने रखी ये मांग
न्यायपालिका में सामाजिक विविधता के मुद्दे पर वक्ताओं ने कहा कि संविधान पीठों में प्रतिनिधित्व का अभाव लोकतंत्र को कमजोर करता है. उन्होंने मांग की कि संविधान पीठ में अनिवार्य रूप से एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों का समुचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए.
ये लोग रह मौजूद
सभा को पूर्वांचल किसान यूनियन के महासचिव वीरेंद्र यादव, सोशलिस्ट किसान सभा के महासचिव राजीव यादव, डॉ. राजेंद्र यादव और मुलायम यादव ने संबोधित किया. प्रदर्शन में अधिवक्ता विनोद यादव, अवधेश यादव, साहब दीन, हीरालाल यादव, चंद्रशेखर मौर्या और नंदलाल यादव सहित कई लोग मौजूद रहे.


