Bihar News: बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने की तैयारी है. गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के बिहार वाले हिस्से पर करीब 28,302 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. इस परियोजना के तहत लगभग 417 किलोमीटर सड़क बिहार से होकर गुजरेगी, जिससे राज्य के आठ जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है. इसके साथ ही केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना के तहत बिहार में कुल 2,424 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी है. इन परियोजनाओं पर करीब 1.64 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है.
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गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे से इन 8 जिलों को होगा फायदा
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे बिहार की महत्वपूर्ण प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं में शामिल है. इसकी कुल लंबाई करीब 568 किलोमीटर बताई गई है, जिसमें लगभग 417 किलोमीटर हिस्सा बिहार में होगा. यह एक्सप्रेसवे बिहार के पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज से होकर गुजरेगा. इसके निर्माण से इन जिलों के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है.
इस मार्ग से उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच कनेक्टिविटी मजबूत हो सकती है. पूर्वोत्तर भारत की ओर जाने वाले यातायात को भी बेहतर सड़क संपर्क मिलने की संभावना है. हालांकि, परियोजना का वास्तविक लाभ इसके निर्माण और चालू होने के बाद ही सामने आएगा.
बिहार में 2,424 KM सड़क परियोजनाओं को मंजूरी
केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना के तहत बिहार में कुल 32 सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी है. इनकी कुल लंबाई लगभग 2,424 किलोमीटर है और अनुमानित लागत 1,64,518 करोड़ रुपये बताई गई है. इनमें राष्ट्रीय राजमार्ग प्रभाग और बिहार के पथ निर्माण विभाग की 18 परियोजनाएं शामिल हैं. इनकी कुल लंबाई लगभग 739 किलोमीटर और अनुमानित लागत 24,940 करोड़ रुपये है.
वहीं, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की 14 परियोजनाओं की लंबाई करीब 1,685 किलोमीटर है. इन पर लगभग 1,39,578 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. इन परियोजनाओं में हाईवे का चौड़ीकरण, सड़कों को मजबूत करना, नए बाईपास बनाना और रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण शामिल है.
रक्सौल-हल्दिया से बक्सर-भागलपुर तक, कई बड़े प्रोजेक्ट शामिल
बिहार की वार्षिक सड़क कार्ययोजना में कई अहम मार्गों को जगह मिली है. इनमें गोरखपुर-किशनगंज-सिलीगुड़ी, रक्सौल-हल्दिया, बक्सर-भागलपुर और मुजफ्फरपुर-बरौनी जैसे सड़क प्रोजेक्ट शामिल हैं. इसके अलावा छपरा-रेवाघाट-मुजफ्फरपुर सड़क और पटना नॉर्दर्न रिंग रोड से जुड़ी परियोजनाओं को भी योजना में शामिल किया गया है.
इन मार्गों के विकास से प्रमुख शहरों, औद्योगिक क्षेत्रों और व्यापारिक केंद्रों के बीच संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है. इससे मालवाहक वाहनों को भी सुविधा मिल सकती है और कारोबार की रफ्तार बढ़ सकती है.
राम जानकी पथ के दो नए पैकेजों को भी मंजूरी
बिहार में धार्मिक पर्यटन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए राम जानकी पथ परियोजना के तीसरे और चौथे पैकेज को भी वार्षिक कार्ययोजना में मंजूरी दी गई है. इन दोनों हिस्सों पर करीब 8,600 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. परियोजना के पहले और दूसरे पैकेज पर पहले से काम चल रहा है. नए हिस्सों के निर्माण से धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होने और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. इससे पर्यटन गतिविधियों को भी लाभ मिल सकता है.
दरभंगा-जयनगर से सीतामढ़ी तक सड़कों का होगा विकास
स्वीकृत योजनाओं में एनएच-333ए पर बरबीघा से झारखंड की ओर जाने वाले मार्ग का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण भी शामिल है. इसके अलावा दरभंगा-जयनगर राष्ट्रीय राजमार्ग, बरियारपुर-बिशनपुर और सीतामढ़ी-चिरौत खंड से संबंधित कार्यों को मंजूरी मिली है. योजना के तहत विभिन्न स्थानों पर चार लेन की सड़कें और बाईपास विकसित किए जाएंगे. एनएच-120 और एनएच-727 के कुछ हिस्सों में रेलवे ओवरब्रिज से जुड़े कार्य भी प्रस्तावित हैं. इनका उद्देश्य यातायात का दबाव कम करना और सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाना है.
कारोबार, पर्यटन और रोजगार को मिल सकती है नई रफ्तार
बिहार में सड़क नेटवर्क के विस्तार से यात्रा समय घटाने, कृषि उत्पादों की ढुलाई आसान बनाने और व्यापारिक केंद्रों को बेहतर संपर्क देने में मदद मिल सकती है. इसके साथ ही निर्माण कार्यों के दौरान रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है. पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल के अनुसार, इन परियोजनाओं से राज्य की परिवहन व्यवस्था मजबूत होगी और आर्थिक विकास को गति मिलेगी.
हालांकि, 2,424 किलोमीटर की परियोजनाओं को मंजूरी मिलने का मतलब यह नहीं है कि सभी सड़कों का निर्माण तत्काल शुरू हो जाएगा. अलग-अलग परियोजनाओं की लागत, निर्माण की समयसीमा और काम शुरू होने की तारीख संबंधित प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी. अब नजर इस बात पर रहेगी कि इन योजनाओं को जमीन पर उतारने का काम कितनी तेजी से आगे बढ़ता है.
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