पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब ग्लोबल ऑयल मार्केट पर भी दिखने लगा है. बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यमन के ईरान समर्थित हूती समूह ने सऊदी अरब की एक बड़ी तेल रिफाइनरी पर मिसाइल से हमला करने का दावा किया है. इस खबर के बाद तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई और क्रूड ऑयल के दाम फिर चढ़ने लगे.
ब्रेंट क्रूड के दिसंबर वायदा भाव में 1.55 डॉलर यानी 1.36% की बढ़ोतरी हुई. इसके साथ ही इसकी कीमत 115.43 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई. वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क WTI क्रूड का भाव 1.43% बढ़कर 101.32 डॉलर प्रति बैरल हो गया.
ब्रेंट और WTI क्रूड के दाम में कितनी तेजी आई?
बुधवार को ब्रेंट क्रूड और WTI, दोनों की कीमतों में तेजी दर्ज की गई. ब्रेंट क्रूड का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों के प्रमुख बेंचमार्क के तौर पर किया जाता है, जबकि WTI अमेरिकी बाजार का अहम बेंचमार्क है.
ब्रेंट क्रूड के दिसंबर वायदा भाव में 1.55 डॉलर की बढ़ोतरी हुई और यह 115.43 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. दूसरी ओर, WTI क्रूड 1.43% चढ़कर 101.32 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा.
खास बात यह है कि एक दिन पहले ही कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट आई थी. उस समय पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद से बाजार को राहत मिली थी. लेकिन अब रिफाइनरी पर हमले के दावे के बाद सप्लाई को लेकर चिंता फिर बढ़ गई है.
सऊदी अरब की रिफाइनरी पर हमले का दावा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हूती समूह ने सऊदी अरब की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी को मिसाइल से निशाना बनाने का दावा किया है. इस रिफाइनरी की क्षमता करीब 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन बताई गई है.
हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने इस हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. इसलिए फिलहाल इसे हमले के दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए. इसके बावजूद बाजार में यह चिंता बढ़ गई कि अगर तेल उत्पादन, रिफाइनिंग या सप्लाई पर असर पड़ा, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें और बढ़ सकती हैं.
सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादकों और निर्यातकों में शामिल है. ऐसे में वहां तेल से जुड़ी किसी भी गतिविधि में रुकावट की आशंका का असर ग्लोबल ऑयल मार्केट पर पड़ सकता है.
एक दिन पहले क्यों गिर गए थे तेल के दाम?
बुधवार की तेजी से पहले कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट आई थी. इसकी एक वजह पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद और कूटनीतिक बातचीत को माना गया.
इसके अलावा, अमेरिकी कच्चे तेल के भंडार में बढ़ोतरी की संभावना से भी कीमतों पर दबाव पड़ा था. लेकिन रिफाइनरी पर हमले के दावे ने बाजार का रुख फिर बदल दिया और सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई.
तेल बाजार में फिलहाल दो तरह के संकेत दिखाई दे रहे हैं. एक तरफ बातचीत के जरिए तनाव कम होने की उम्मीद है, तो दूसरी तरफ संभावित हमलों और सप्लाई में रुकावट का खतरा बना हुआ है. इसी वजह से कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है.
तेहरान में सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान की बातचीत
हाल ही में तेहरान में सऊदी अरब, तुर्किये, पाकिस्तान और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच क्षेत्रीय तनाव कम करने को लेकर बैठक हुई थी. रिपोर्ट्स के अनुसार, सभी पक्ष शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत जारी रखने के लिए सहमत हुए.
इस बैठक से पहले बाजार में उम्मीद जगी थी कि कूटनीतिक प्रयासों से तनाव कम हो सकता है और तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं घट सकती हैं. हालांकि, रिफाइनरी पर हमले के दावे और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण अनिश्चितता अब भी बनी हुई है.
OPEC+ की बैठक पर भी नजर
रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को होने वाली OPEC+ की बैठक में दिसंबर के उत्पादन लक्ष्यों में बदलाव नहीं किया जाएगा. इस समूह के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में सऊदी अरब, रूस और इराक शामिल हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि इन देशों का उत्पादन अभी भी तय लक्ष्यों से नीचे चल रहा है.
OPEC+ के फैसले ग्लोबल ऑयल सप्लाई और कीमतों के लिए अहम होते हैं. इसलिए बाजार की नजर इस बैठक पर भी बनी हुई है.
Strait of Hormuz क्यों है इतना अहम?
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच Strait of Hormuz यानी होर्मुज स्ट्रेट पर भी दबाव बना हुआ है. यह दुनिया में तेल और एनर्जी सप्लाई के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है.
दिए गए स्रोत के मुताबिक, संघर्ष शुरू होने से पहले ग्लोबल एनर्जी शिपमेंट का करीब 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता था. अगर यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो दुनिया के कई देशों तक तेल पहुंचने में दिक्कत आ सकती है. इससे सप्लाई घटने और कीमतें बढ़ने का जोखिम पैदा होता है.
फिलहाल ब्रेंट क्रूड 115.43 डॉलर और WTI क्रूड 101.32 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. आने वाले दिनों में तेल की कीमतों पर पश्चिम एशिया के तनाव, सप्लाई की स्थिति और कूटनीतिक बातचीत का असर देखने को मिल सकता है.


