दिव्यांगजनों की शिक्षा, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार दीन दयाल दिव्यांग पुनर्वास योजना (Deen Dayal Disabled Rehabilitation Scheme – DDRS) संचालित कर रही है. यह सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र (Central Sector) योजना है, जिसके तहत दिव्यांगजनों के लिए काम करने वाली पात्र स्वैच्छिक संस्थाओं (NGOs) को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है.
इस योजना की शुरुआत वर्ष 1999 में हुई थी और 2003 में इसमें संशोधन कर इसका वर्तमान स्वरूप दिया गया.
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योजना का उद्देश्य क्या है?
DDRS का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां उन्हें समान अवसर, सामाजिक न्याय और सम्मानजनक जीवन मिल सके.
इसके साथ ही योजना का उद्देश्य दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) के प्रभावी क्रियान्वयन में स्वैच्छिक संगठनों की भागीदारी बढ़ाना भी है.
योजना के तहत क्या-क्या लाभ मिलते हैं?
DDRS के तहत सरकार पात्र संस्थाओं को विभिन्न परियोजनाओं के संचालन के लिए अनुदान (Grant-in-Aid) देती है. इन परियोजनाओं के माध्यम से दिव्यांगजनों को कई प्रकार की सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं.
मुख्य लाभों में शामिल हैं.
- छोटे बच्चों के लिए प्रारंभिक हस्तक्षेप (Early Intervention) कार्यक्रम.
- दैनिक जीवन के कौशल विकसित करने का प्रशिक्षण.
- विशेष एवं समावेशी शिक्षा.
- रोजगारोन्मुख कौशल विकास.
- स्टाफ और देखभाल करने वालों का प्रशिक्षण.
- दिव्यांग अनुकूल भवन और सुविधाओं का विकास.
- पुनर्वास और सामाजिक समावेशन से जुड़ी सेवाएं.
किन परियोजनाओं को मिलता है समर्थन?
योजना के तहत कई मॉडल परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दी जाती है. इनमें प्रमुख हैं.
- बौद्धिक दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष विद्यालय.
- श्रवण एवं वाक दिव्यांग बच्चों के लिए विद्यालय.
- दृष्टिबाधित बच्चों के लिए विशेष विद्यालय.
- सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों के पुनर्वास कार्यक्रम.
- कुष्ठ रोग से स्वस्थ हुए व्यक्तियों का पुनर्वास.
- मानसिक बीमारी से उपचार प्राप्त व्यक्तियों के लिए हाफ-वे होम.
- होम बेस्ड रिहैबिलिटेशन कार्यक्रम.
- सामुदायिक आधारित पुनर्वास (Community Based Rehabilitation).
- लो विजन सेंटर.
- मानव संसाधन विकास परियोजनाएं.
कौन कर सकता है आवेदन?
इस योजना के लिए व्यक्तिगत लाभार्थी सीधे आवेदन नहीं करते. आवेदन केवल पात्र स्वैच्छिक संस्थाएं (NGOs) कर सकती हैं.
आवेदन करने वाली संस्था के लिए प्रमुख पात्रता शर्तें हैं.
- संस्था का पंजीकरण संबंधित कानून के तहत होना चाहिए.
- संस्था कम से कम दो वर्ष पुरानी हो.
- संस्था का विधिवत गठित प्रबंधन मंडल हो.
- संस्था के पास परियोजना संचालित करने के लिए आवश्यक संसाधन और अनुभव हो.
- संस्था लाभ कमाने के उद्देश्य से संचालित न हो.
- किसी भी आधार पर भेदभाव न किया जाता हो.
आवेदन कैसे करें?
सरकार ने आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन उपलब्ध कराई है.
आवेदन की सामान्य प्रक्रिया इस प्रकार है.
- सबसे पहले संस्था को NITI Aayog के NGO Darpan Portal पर पंजीकरण करना होगा.
- वहां से Unique ID प्राप्त करनी होगी.
- इसके बाद सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के E-Anudaan Portal पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा.
- आवेदन के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे.
किन दस्तावेजों की जरूरत होती है?
आवेदन के दौरान सामान्य तौर पर निम्न दस्तावेज मांगे जाते हैं.
- आवेदन पत्र.
- संस्था का पंजीकरण प्रमाणपत्र.
- RPwD Act के तहत पंजीकरण प्रमाणपत्र.
- प्रबंधन समिति का विवरण.
- स्टाफ सूची.
- लाभार्थियों की सूची.
- वार्षिक रिपोर्ट.
- आय-व्यय विवरण और बैलेंस शीट.
- परियोजना का बजट.
- उपयोगिता प्रमाणपत्र.
- बैंक प्राधिकरण पत्र सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज.
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योजना क्यों है महत्वपूर्ण?
विशेषज्ञों का मानना है कि DDRS दिव्यांगजनों के लिए शिक्षा, प्रशिक्षण और पुनर्वास सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. इसके माध्यम से सरकार स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से देशभर में ऐसे कार्यक्रमों को समर्थन देती है, जो दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद करते हैं.
Source: Ministry of Social Justice and Empowerment


