नई दिल्ली: देशभर में बिगड़ती शिक्षा व्यवस्था और लगातार हो रहे पेपर लीक के मामलों को लेकर छात्रों और विपक्षी दलों का आंदोलन उग्र होता जा रहा है. विपक्ष द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की पुरजोर मांग के बीच मोदी सरकार ने अपनी रणनीति साफ कर दी है. सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि धर्मेंद्र प्रधान पद से इस्तीफा नहीं देंगे, बल्कि संसद के पटल पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देंगे और पलटवार करेंगे.
धर्मेंद्र प्रधान ने खुद संभाला मोर्चा
संसद भवन के बाहर प्रदर्शन, कांग्रेस के प्रधानमंत्री आवास घेराव और जंतर-मंतर पर छात्रों के बड़े जमावड़े के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने खुद मोर्चा संभाल लिया है. मंगलवार देर रात (10:51 बजे) एक बयान जारी करते हुए उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य की जवाबदेही सरकार की है और सरकार इस पर सुधार करने तथा चर्चा करने के लिए पूरी तरह तैयार है.
प्रधान ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष इस संवेदनशील मुद्दे पर लोकतांत्रिक बहस करने के बजाय राजनीति और “तमाशा” कर रहा है. सरकार का यह रुख साफ करता है कि उन पर इस्तीफे का कोई दबाव नहीं है और वे सदन के भीतर विपक्ष से दो-दो हाथ करने के मूड में हैं.
संसद में गतिरोध दूर करने की कोशिशें नाकाम
संसद के मानसून सत्र के शुरुआती दो दिन पूरी तरह से हंगामे की भेंट चढ़ चुके हैं, जिससे सरकार के कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य अटके हुए हैं. गतिरोध को खत्म करने के लिए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से बातचीत की कोशिश की थी. हालांकि, वार्ता बेनतीजा रही. जितेंद्र सिंह के अनुसार, राहुल गांधी पहले चर्चा के लिए सहमत हुए थे, लेकिन बाद में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ गए.
जंतर-मंतर पर छात्रों का डेरा, सुरक्षा सख्त
जंतर-मंतर पर विभिन्न छात्र संगठनों और आंदोलकारियों का विरोध प्रदर्शन जारी है. सोनम वांगचुक के अनशन और आंदोलन को देखते हुए प्रशासन अलर्ट पर है.
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
स्थिति को नियंत्रण में रखने और भीड़ को एकत्र होने से रोकने के लिए सेंट्रल दिल्ली के 16 मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया है, जिससे जंतर-मंतर और इंडिया गेट की ओर जाने वाले रास्ते प्रभावित हुए हैं. दूसरी ओर, सरकार आंदोलन को समाप्त कराने के लिए सक्रिय हो गई है. केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने मेदांता अस्पताल जाकर सोनम वांगचुक से मुलाकात की है. सरकार को उम्मीद है कि यदि वांगचुक का अनशन समाप्त होता है, तो जंतर-मंतर पर जमा भीड़ भी धीरे-धीरे कम हो जाएगी.
आज संसद में हंगामे के आसार
संसद के तीसरे दिन आज यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सरकार की चर्चा की पेशकश और धर्मेंद्र प्रधान के आक्रामक रुख के सामने विपक्ष क्या रणनीति अपनाता है. क्या सदन में काम-काज सामान्य हो पाएगा या पेपर लीक के मुद्दे पर रार और बढ़ेगी, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं.


