केंद्र सरकार ने सोना और चांदी खरीदने वालों को बड़ा झटका देते हुए इन पर लगने वाली Import Duty को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में लोगों से विदेशी मुद्रा बचाने के लिए कुछ समय तक सोना खरीदने से बचने की अपील की थी.
सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी मुद्रा पर बढ़ते दबाव को देखते हुए यह कदम उठाया गया है.
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सरकार ने अचानक क्यों बढ़ाई ड्यूटी?
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक अब सोना और चांदी पर कुल प्रभावी आयात शुल्क 15% होगा. वहीं प्लैटिनम पर यह शुल्क 15.4% तक पहुंच गया है. सरकार का मानना है कि गैर-जरूरी आयात को कम करके विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटाया जा सकता है.
रिपोर्ट्स के अनुसार भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर सोना विदेशों से आयात करता है. ऐसे में जब वैश्विक स्तर पर तेल और शिपिंग लागत बढ़ रही है, तब सरकार आयात बिल को नियंत्रित करना चाहती है.
PM मोदी की अपील के बाद पहला बड़ा कदम
कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से अपील की थी कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए फिलहाल सोना खरीदने से बचें. उन्होंने विदेशी यात्रा और गैर-जरूरी खर्चों को कम करने की भी बात कही थी.
अब सरकार का यह नया फैसला उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें विदेशी मुद्रा को जरूरी क्षेत्रों जैसे:
- कच्चा तेल
- खाद
- रक्षा
- औद्योगिक जरूरतों
के लिए सुरक्षित रखने पर जोर दिया जा रहा है.
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
Import Duty बढ़ने का सीधा असर सोने और चांदी की कीमतों पर देखने को मिल सकता है. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में ज्वेलरी खरीदना और महंगा हो सकता है, खासकर शादी और त्योहार सीजन में.
रिपोर्ट्स के अनुसार ड्यूटी बढ़ने के बाद MCX पर सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल भी देखा गया. कुछ ETFs में भी तेजी दर्ज की गई.
क्या बढ़ सकती है तस्करी?
विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादा Import Duty का एक साइड इफेक्ट सोने की तस्करी बढ़ना भी हो सकता है. पहले जब सोने पर अधिक टैक्स था, तब अवैध तरीके से गोल्ड लाने के कई मामले सामने आए थे.
अब एक बार फिर यह आशंका जताई जा रही है कि ऊंचे टैक्स की वजह से ग्रे मार्केट सक्रिय हो सकता है.
सरकार की चिंता क्या है?
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है. रिपोर्ट्स के मुताबिक 2025-26 में भारत का गोल्ड इंपोर्ट काफी बढ़ा. वहीं पश्चिम एशिया संकट की वजह से तेल की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी देखी गई है.
ऐसे में सरकार Current Account Deficit (CAD) और रुपये पर दबाव को नियंत्रित रखना चाहती है. आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम “macro-economic stability” बनाए रखने की कोशिश का हिस्सा है.
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आगे और क्या कदम उठा सकती है सरकार?
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि सरकार विदेशी मुद्रा बचाने के लिए आने वाले समय में और सख्त कदम उठा सकती है. इसमें विदेशी खर्चों और कुछ आयात श्रेणियों पर अतिरिक्त नियंत्रण जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं. हालांकि फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.


