LPG Booking Rule Changed: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में तेजी देखी जा रही है. इस स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. सरकार का कहना है कि फिलहाल देश में पेट्रोल, डीजल और कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है. हालांकि घरेलू उपभोक्ताओं को रसोई गैस और पीएनजी की आपूर्ति सुचारू बनाए रखने के लिए कुछ कदम उठाए गए हैं. इनमें कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई में कटौती और घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग अवधि बढ़ाना शामिल है.
सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग अवधि 15 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन कर दी है. इसका मतलब है कि उपभोक्ता एक सिलेंडर की डिलीवरी के बाद अगले 25 दिन तक दूसरा सिलेंडर बुक नहीं कर पाएंगे. हालांकि सरकार का कहना है कि इससे आम उपभोक्ताओं को कोई परेशानी नहीं होगी, क्योंकि औसतन एक परिवार साल में करीब सात सिलेंडर ही इस्तेमाल करता है. इस हिसाब से एक सिलेंडर लगभग 50 दिन तक चलता है, इसलिए 25 दिन की बुकिंग अवधि पर्याप्त मानी जा रही है.
सोना-चांदी के दाम में अचानक गिरावट: MCX पर फिसले गोल्ड और सिल्वर दोनों
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की कोई संभावना नहीं है. पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी जरूर हैं, लेकिन अभी स्थिति ऐसी नहीं है कि ईंधन के दाम बढ़ाए जाएं. उनका कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमत 120 से 125 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती है तो तेल कंपनियों पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा, लेकिन इससे ज्यादा बढ़ने पर स्थिति अलग हो सकती है.
सरकार ने घरेलू पीएनजी उपभोक्ताओं को भी भरोसा दिलाया है कि गैस की आपूर्ति में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी. चूंकि गैस का बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता है, इसलिए एहतियात के तौर पर कुछ उद्योगों को उपलब्धता के आधार पर गैस देने का फैसला किया गया है. यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक बंद रहता है तो एलएनजी की आपूर्ति पर दबाव बन सकता है.
घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के लिए सरकार ने होटल और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई में कमी करने का निर्णय लिया है. जरूरत पड़ने पर कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति पूरी तरह रोकने की भी संभावना जताई गई है, क्योंकि सरकार की पहली प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ताओं को समय पर रसोई गैस उपलब्ध कराना है.
इसके अलावा सरकार ने देश की सभी रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे अन्य पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन कम कर एलपीजी का उत्पादन बढ़ाएं. साथ ही अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से एलपीजी आयात भी बढ़ाया जा रहा है ताकि घरेलू आपूर्ति प्रभावित न हो.
यूपी में आबू धाबी और शिकागो जैसा बसेगा नया शहर, 80 गांवों की जमीनें बनी सोना!
पेट्रोलियम मंत्रालय का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का ज्यादा असर अमेरिका के बाजार और उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है, क्योंकि वहां पेट्रोल और डीजल के दाम सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय होते हैं. इसलिए यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो इसका सबसे ज्यादा असर अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है.


