Meerut Blue Drum Case: उत्तर प्रदेश के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड यानी ‘ब्लू ड्रम केस’ में नया मोड़ आया है. हत्या के मामले में फांसी की सजा पाने वाले मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने मेरठ की जिला अदालत के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है. दोनों ने संयुक्त अपील दाखिल कर अपनी दोषसिद्धि और मौत की सजा रद्द करने की मांग की है. मामले की सुनवाई अगले सप्ताह हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष होने की संभावना जताई गई है.
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अपील में दोनों दोषियों ने अभियोजन पक्ष के सबूतों और जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. उनका दावा है कि मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था और अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहा. हालांकि, ये अपीलकर्ताओं की दलीलें हैं, जिन पर हाईकोर्ट सुनवाई के दौरान विचार करेगा.
14 अक्टूबर को सुनाई गई थी फांसी की सजा
मेरठ के ब्रह्मपुरी इलाके से जुड़े इस हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने 30 सितंबर 2026 को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी ठहराया था. इसके बाद 14 अक्टूबर को अदालत ने दोनों को मौत की सजा सुनाई थी. अदालत ने अपराध को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ यानी दुर्लभतम श्रेणी का मामला माना था.
दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था. हत्या के अलावा सबूत नष्ट करने से जुड़े आरोपों में भी उन्हें सजा सुनाई गई थी. अब दोनों ने दोषसिद्धि और सजा के आदेश को निरस्त करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट का रुख किया है.
क्या है ब्लू ड्रम हत्याकांड?
यह मामला सौरभ राजपूत की हत्या से जुड़ा है. अभियोजन के अनुसार, हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए नीले प्लास्टिक के ड्रम में रखा गया था. शव को छिपाने के लिए ड्रम में सीमेंट और कंक्रीट भरे जाने का भी आरोप है.
मामले का खुलासा होने के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में इसकी व्यापक चर्चा हुई थी. पुलिस ने जांच के बाद मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया. इसके बाद मेरठ की अदालत में मुकदमा चला, जिसमें दोनों को हत्या और सबूत नष्ट करने से जुड़े अपराधों में दोषी ठहराया गया.
अपील में गवाहों के बयान और CCTV फुटेज पर सवाल
हाईकोर्ट में दाखिल अपील में बचाव पक्ष ने दावा किया है कि निचली अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और लागू कानूनी सिद्धांतों का समुचित मूल्यांकन नहीं किया. अपील के अनुसार, अभियोजन का मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था, लेकिन कथित तौर पर साक्ष्यों की कड़ियों को पर्याप्त रूप से साबित नहीं किया गया.
अपीलकर्ताओं ने हथियार, सीमेंट और ड्रम की खरीद से जुड़े गवाहों के बयानों में विरोधाभास होने की बात भी कही है. उनका दावा है कि इन खरीद से संबंधित CCTV फुटेज और वैध रसीदें अदालत में पेश नहीं की गईं.
इसके अलावा, बरामदगी से जुड़े दस्तावेजों पर स्वतंत्र गवाहों के हस्ताक्षर न होने, वीडियोग्राफी की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के लिए जरूरी प्रमाणपत्र उपलब्ध न होने जैसे तकनीकी आधार भी उठाए गए हैं.
दोषमुक्त करने और सजा रद्द करने की मांग
मुस्कान और साहिल ने हाईकोर्ट से भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के साथ धारा 3(5) के तहत हत्या की दोषसिद्धि तथा धारा 238(a) के तहत सबूत नष्ट करने से संबंधित दोषसिद्धि को रद्द करने की मांग की है. दोनों ने सभी आरोपों से बरी किए जाने की अपील की है.
अपील में वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील शुक्ला और अधिवक्ता निधि त्रिवेदी, रवितेंद्र प्रताप सिंह चंदेल तथा संदीप कुमार दुबे के नाम शामिल हैं.
अब हाईकोर्ट में सुनवाई पर नजर रहेगी. निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली अपील में उठाए गए सवालों पर न्यायालय का रुख अहम होगा. फिलहाल, अपील में किए गए दावे बचाव पक्ष की दलीलें हैं; उनकी वैधता और सजा पर अंतिम निर्णय हाईकोर्ट की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा.
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