नॉर्वे सरकार ने प्राथमिक विद्यालयों में जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स के उपयोग पर लगभग पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है. सरकार का कहना है कि छोटे बच्चों द्वारा AI का अधिक उपयोग उनकी बुनियादी सीखने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. यह नई व्यवस्था आगामी शैक्षणिक सत्र से लागू की जाएगी.
नॉर्वे के प्रधानमंत्री Jonas Gahr Store ने कहा कि स्कूलों में बच्चों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज पढ़ना, लिखना और गणित सीखना है. उनका मानना है कि AI के बढ़ते उपयोग से बच्चे सीखने की प्रक्रिया के महत्वपूर्ण चरणों को छोड़ सकते हैं, जिससे उनकी शैक्षणिक नींव कमजोर हो सकती है.
किन छात्रों पर लागू होगी नई नीति
सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार पहली से सातवीं कक्षा तक के 6 से 13 वर्ष आयु वर्ग के छात्रों को सामान्य रूप से जनरेटिव AI टूल्स का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी. वहीं 14 से 16 वर्ष आयु के छात्रों को शिक्षकों की निगरानी में सीमित उपयोग की अनुमति दी जा सकती है.
इसके अलावा 17 से 19 वर्ष आयु वर्ग के छात्रों को AI का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग सिखाया जाएगा ताकि वे उच्च शिक्षा और भविष्य के कार्यक्षेत्र के लिए तैयार हो सकें.
शिक्षा व्यवस्था में पहले भी हुए बदलाव
नॉर्वे सरकार हाल के वर्षों में बच्चों के बीच बढ़ती डिजिटल निर्भरता को लेकर कई कदम उठा चुकी है. वर्ष 2024 में स्कूलों में स्मार्टफोन पर प्रतिबंध लगाया गया था और शिक्षकों को अनुशासन बनाए रखने के लिए अतिरिक्त अधिकार दिए गए थे. यह फैसला शिक्षा संबंधी परीक्षणों में गिरते प्रदर्शन के बाद लिया गया था.
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि कक्षाओं में टैबलेट और डिजिटल उपकरणों पर निर्भरता कम करने के लिए अधिक भौतिक पुस्तकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा. इसके लिए नए कानून लाने की तैयारी की जा रही है.
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क्यों बढ़ी चिंता
सरकार का मानना है कि छोटी उम्र में AI पर अत्यधिक निर्भरता बच्चों की स्वतंत्र सोच, समस्या समाधान क्षमता और मूलभूत कौशलों के विकास को प्रभावित कर सकती है. इसी वजह से नॉर्वे ने शिक्षा के शुरुआती वर्षों में AI के उपयोग को सीमित करने का निर्णय लिया है.
यह कदम ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में स्कूलों और कॉलेजों में AI के उपयोग को लेकर बहस तेज हो रही है. कुछ विशेषज्ञ AI को सीखने का उपयोगी साधन मानते हैं, जबकि कई शिक्षाविद् इसके अत्यधिक उपयोग से बच्चों की रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जता रहे हैं.
स्रोत: आकाशवाणी


