नई दिल्ली: देश के ऊर्जा क्षेत्र में वित्तपोषण को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए Power Finance Corporation (PFC) और REC Limited के निदेशक मंडलों ने दोनों कंपनियों के विलय (Merger) की योजना को मंजूरी दे दी है. इस विलय के बाद बनने वाली नई संस्था का कुल लोन बुक 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगा.
ऊर्जा मंत्रालय के तहत आने वाली दोनों सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का यह विलय कंपनी अधिनियम, 2013 की संबंधित धाराओं के तहत प्रस्तावित किया गया है.
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विलय के बाद बनेगी बड़ी फाइनेंसिंग कंपनी
प्रस्तावित योजना के तहत REC Limited का विलय Power Finance Corporation (PFC) में किया जाएगा. विलय के बाद PFC नई संयुक्त कंपनी के रूप में कार्य करेगी.
सरकार का मानना है कि इससे ऊर्जा क्षेत्र में परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण क्षमता और मजबूत होगी तथा एक बड़ी और अधिक सक्षम सरकारी वित्तीय संस्था तैयार होगी.
किन शर्तों पर होगा विलय?
यह विलय अभी अंतिम नहीं है. इसे लागू करने से पहले कई जरूरी मंजूरियां मिलना बाकी हैं.
इनमें शामिल हैं:
- दोनों कंपनियों के शेयरधारकों की मंजूरी
- लेनदारों (Creditors) की मंजूरी
- संबंधित नियामक और सरकारी संस्थाओं की स्वीकृति
- विलय के बाद भी नई कंपनी का Government Company बने रहना
- भारत सरकार के पास नई कंपनी में बहुमत मतदान अधिकार और नियंत्रण बना रहना
शेयरधारकों को कैसे मिलेंगे नए शेयर?
स्वीकृत वैल्यूएशन रिपोर्ट के अनुसार विलय के बाद शेयरों का एक्सचेंज इस प्रकार होगा:
- REC के प्रत्येक 100 इक्विटी शेयरों के बदले PFC के 88 इक्विटी शेयर दिए जाएंगे.
रिकॉर्ड डेट का निर्धारण भविष्य में दोनों कंपनियों के बोर्ड द्वारा किया जाएगा.
कई विशेषज्ञ संस्थानों ने निभाई भूमिका
विलय प्रक्रिया के लिए कई प्रमुख सलाहकार संस्थानों को नियुक्त किया गया है.
इनमें शामिल हैं:
- Deloitte Touche Tohmatsu India LLP – Transaction एवं Tax Advisor
- Cyril Amarchand Mangaldas – Legal Advisor
- RBSA Valuation Advisors LLP – PFC के लिए Valuation Advisor
- Ernst & Young Merchant Banking Services LLP – REC के लिए Valuation Advisor
- SBI Capital Markets – PFC के लिए Fairness Opinion
- Nuvama Wealth Management – REC के लिए Fairness Opinion
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ऊर्जा क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ
सरकार के अनुसार PFC और REC के विलय से ऊर्जा अवसंरचना परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण क्षमता बढ़ेगी. इससे बिजली क्षेत्र में निवेश को गति मिलने, परियोजनाओं के लिए पूंजी उपलब्ध कराने और सार्वजनिक क्षेत्र की वित्तीय संस्थाओं को अधिक मजबूत बनाने में मदद मिलेगी.
विलय की प्रक्रिया सभी आवश्यक वैधानिक और नियामकीय मंजूरियां मिलने के बाद पूरी की जाएगी.
Source: Ministry of Power


