August 20: कैंसर के इलाज को लेकर वैज्ञानिकों ने एक नई “स्मार्ट” दवा विकसित की है, जिसे खास तौर पर कैंसर कोशिकाओं के अंदर एक्टिव होने के लिए डिजाइन किया गया है. RK-251 नाम की इस दवा का मकसद कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाना और आसपास की स्वस्थ कोशिकाओं को कम से कम नुकसान पहुंचाना है.
प्रीक्लिनिकल स्टडी में RK-251 ने आक्रामक ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ अच्छे नतीजे दिखाए हैं. हालांकि, अभी इसे मरीजों के इलाज के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. इंसानों पर इसके इस्तेमाल से पहले आगे की रिसर्च और क्लीनिकल ट्रायल जरूरी होंगे.
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कीमोथेरेपी में स्वस्थ कोशिकाओं को भी हो सकता है नुकसान
कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी लंबे समय से इस्तेमाल की जाती है. इसका मकसद तेजी से बढ़ने वाली कैंसर कोशिकाओं को खत्म करना होता है. लेकिन इस प्रक्रिया में शरीर की कुछ स्वस्थ कोशिकाएं भी प्रभावित हो सकती हैं.
इसी वजह से मरीजों में अलग-अलग साइड इफेक्ट देखने को मिल सकते हैं. वैज्ञानिक अब ऐसे ट्रीटमेंट पर काम कर रहे हैं, जो सामान्य कोशिकाओं में कम एक्टिव रहे और कैंसर कोशिकाओं के अंदर जाकर ज्यादा प्रभावी तरीके से काम करे.
RK-251 इसी तरह के targeted treatment approach पर आधारित है.
IAAST और IIT गुवाहाटी के वैज्ञानिकों ने विकसित की दवा
RK-251 पर यह रिसर्च भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत आने वाले Institute of Advanced Study in Science and Technology (IAAST) और IIT गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने की है.
रिसर्च का नेतृत्व IAAST के डॉ. असीस बाला और IIT गुवाहाटी के डॉ. K.P. भाबक ने किया. वैज्ञानिकों ने RK-251 को कैंसर कोशिकाओं के अंदर मौजूद खास जैव-रासायनिक माहौल का फायदा उठाने के लिए डिजाइन किया है.
कैंसर कोशिकाओं का ROS बना दवा के एक्टिव होने का ट्रिगर
इस दवा की खास बात इसका activation mechanism है. कैंसर कोशिकाओं में अक्सर Reactive Oxygen Species यानी ROS का स्तर सामान्य कोशिकाओं की तुलना में ज्यादा होता है.
RK-251 कैंसर कोशिका के अंदर पहुंचने के बाद इन बढ़े हुए ROS के संपर्क में आने पर एक्टिव होता है. एक्टिव होने के बाद यह NBDHEX नाम के एक शक्तिशाली anti-cancer compound को रिलीज करता है.
यानी दवा को इस तरह डिजाइन किया गया है कि कैंसर कोशिका के अंदर मौजूद एक खास स्थिति ही उसके एक्टिव होने का ट्रिगर बन जाए.
एक्टिव होने के बाद कैंसर कोशिकाओं के प्रोटीन को करता है टारगेट
RK-251 के एक्टिव होने के बाद रिलीज होने वाला NBDHEX उन खास प्रोटीनों को ब्लॉक करता है, जिनका इस्तेमाल कई कैंसर कोशिकाएं अपने survival और treatment resistance में करती हैं.
इस तरह दवा का पूरा डिजाइन कैंसर कोशिका के अंदर मौजूद उसकी अपनी जैविक परिस्थितियों का इस्तेमाल उसके खिलाफ करने पर आधारित है.
ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर में दिखा असर
प्रीक्लिनिकल स्टडी में RK-251 ने आक्रामक ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ मजबूत प्रभाव दिखाया.
वहीं, स्वस्थ कोशिकाओं पर इसका असर काफी कम पाया गया. शोधकर्ताओं के मुताबिक, कैंसर और स्वस्थ कोशिकाओं के बीच दिखा यह अंतर targeted cancer treatment की दिशा में RK-251 की संभावित उपयोगिता को दिखाता है.
हालांकि, लैब और प्रीक्लिनिकल स्टडी के नतीजों को सीधे इंसानों में इलाज की सफलता नहीं माना जा सकता.
Zebrafish embryos में भी नहीं मिले स्पष्ट toxicity संकेत
शोध के दौरान zebrafish embryos पर भी उम्मीदवार दवा का परीक्षण किया गया. व्यवहार से जुड़े अध्ययनों में RK-251 के कारण toxicity के कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले.
इसके अलावा, ROS की मौजूदगी में दवा ने अपेक्षित fluorescence भी दिखाया. इससे उस mechanism को support मिलता है, जिसके तहत RK-251 कैंसर कोशिकाओं के ज्यादा ROS वाले वातावरण में एक्टिव होने के लिए डिजाइन की गई है.
क्या RK-251 कीमोथेरेपी की जगह ले सकती है?
फिलहाल इसका जवाब नहीं दिया जा सकता. RK-251 के शुरुआती नतीजे जरूर promising हैं, लेकिन अभी यह एक preclinical drug candidate है.
मरीजों में इस्तेमाल से पहले यह पता लगाना जरूरी होगा कि इंसानों में यह कितनी सुरक्षित है, कितनी dose दी जा सकती है, इसका असर कितना होगा और इसके क्या side effects हो सकते हैं.
इसके लिए पहले आगे के laboratory और preclinical studies के बाद clinical trials की जरूरत होगी. इसलिए अभी इसे कीमोथेरेपी का proven alternative कहना सही नहीं होगा.
ACS Journal of Medicinal Chemistry में प्रकाशित हुई रिसर्च
RK-251 से जुड़ी यह रिसर्च ACS Journal of Medicinal Chemistry में प्रकाशित हुई है. शोध में कैंसर कोशिकाओं के अंदर मौजूद ROS के आधार पर दवा को एक्टिव करने के approach का अध्ययन किया गया है.
अगर आगे के studies और clinical trials में इसके safety और effectiveness के नतीजे अच्छे रहते हैं, तो भविष्य में इस तरह की targeted medicines कैंसर treatment में एक नई दिशा दे सकती हैं.


