लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार के नौ साल पूरे होने पर प्रदेश की विकास यात्रा को “संकल्प से सिद्धि” की मिसाल के तौर पर पेश किया जा रहा है. बीते वर्षों में सरकार ने इन्फ्रास्ट्रक्चर को विकास का आधार बनाते हुए कनेक्टिविटी, ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग के क्षेत्र में बड़े बदलाव किए हैं.
कनेक्टिविटी में बड़ा विस्तार
प्रदेश में पिछले नौ वर्षों के दौरान 16 हवाई अड्डों का संचालन शुरू हुआ है, जबकि 8 अन्य प्रक्रियाधीन हैं. जेवर एयरपोर्ट समेत 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों की योजना को यूपी को वैश्विक स्तर पर जोड़ने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. सड़क क्षेत्र में भी तेजी से काम हुआ है. 63 हजार किमी से अधिक सड़कों का चौड़ीकरण और 2.72 लाख किमी नई सड़कों का निर्माण किया गया. एक्सप्रेसवे नेटवर्क 1.5 से बढ़कर 22 तक पहुंच गया है, जिसमें 7 चालू, 5 निर्माणाधीन और 10 प्रस्तावित हैं.
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रेल कनेक्टिविटी में 16 हजार किमी से अधिक नेटवर्क के साथ दादरी में ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का जंक्शन यूपी को लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित कर रहा है. वहीं वाराणसी में देश का पहला इनलैंड वाटरवे और 11 राष्ट्रीय जलमार्ग मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी को मजबूती दे रहे हैं.
ऊर्जा क्षेत्र में सुधार
ऊर्जा को विकास की रीढ़ मानते हुए प्रदेश में अब जिला मुख्यालयों को 24 घंटे, तहसीलों को 22 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों को 20 घंटे बिजली आपूर्ति दी जा रही है. 2017 के मुकाबले 2.94 लाख से अधिक मजरों का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा किया जा चुका है.
शिक्षा और स्वास्थ्य में विस्तार
‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के जरिए सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं बढ़ाई गई हैं. 18 मंडलों में अटल आवासीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं. स्वास्थ्य क्षेत्र में 2017 से 2025 के बीच 83 मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं. “वन डिस्ट्रिक्ट-वन मेडिकल कॉलेज” योजना तेजी से आगे बढ़ रही है. गोरखपुर और रायबरेली में एम्स तथा लखनऊ में अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दे रहे हैं.
शहरी और ग्रामीण विकास
प्रदेश के 58 नगर निकायों को स्मार्ट सिटी की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है. जल जीवन मिशन के तहत 2.43 करोड़ परिवारों को नल कनेक्शन दिए गए हैं. इसके अलावा 62 लाख से अधिक घरों का निर्माण और 1.10 करोड़ परिवारों को घरौनी का वितरण किया गया है.
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औद्योगिक विकास को बढ़ावा
बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर के चलते प्रदेश में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़े हैं. सरकार का दावा है कि यह विकास मॉडल उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार कर रहा है.


