Rajasthan Liquor Price Hike: नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ राजस्थान में शराब के शौकीनों को बड़ा झटका लगने वाला है. 1 अप्रैल 2026 से प्रदेश में शराब और बीयर की कीमतों में 5 से 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी लागू होने जा रही है. आबकारी विभाग ने एक्साइज ड्यूटी के साथ-साथ ‘एक्स डिस्टिलरी प्राइस’ (EDP) में इजाफा करने का फैसला लिया है, जिसका सीधा असर अब बाजार में मिलने वाली शराब की कीमतों पर दिखाई देगा. हालांकि, विभाग की ओर से अभी तक नई रेट लिस्ट आधिकारिक रूप से जारी नहीं की गई है, लेकिन बाजार में इसके प्रभाव की चर्चा शुरू हो चुकी है.
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इस बढ़ोतरी का सबसे अधिक असर देसी शराब पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है. अनुमान के मुताबिक, देसी शराब की कीमतों में 8 से 9 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है. उदाहरण के तौर पर, 900 रुपये तक की देसी शराब की बोतल पर अब उपभोक्ताओं को 80 से 85 रुपये अधिक खर्च करने पड़ सकते हैं. वहीं, राजस्थान में उत्पादित अन्य शराब की कीमतों में भी करीब 8 प्रतिशत तक का इजाफा संभव है.
अंग्रेजी शराब या विदेशी ब्रांड्स की बात करें तो इनमें अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. रिपोर्ट्स के अनुसार, इनकी कीमतों में लगभग 2.6 प्रतिशत तक का इजाफा होने की संभावना है. हालांकि यह बढ़ोतरी कम जरूर है, लेकिन इसका असर भी उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा.
बीयर के शौकीनों के लिए भी यह खबर राहत भरी नहीं है. कीमतों में वृद्धि के चलते 1000 रुपये की बीयर पर लगभग 25 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि बीयर कैन पर यह अंतर करीब 33 रुपये तक पहुंच सकता है. यानी हर कैटेगरी में उपभोक्ताओं को अब पहले से अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी.
आबकारी विभाग के अनुसार, इस बार कीमतों में वृद्धि सिर्फ टैक्स बढ़ाने के कारण नहीं हुई है, बल्कि शराब उत्पादन की लागत यानी ‘एक्स डिस्टिलरी प्राइस’ में बढ़ोतरी भी इसका एक बड़ा कारण है. उत्पादन लागत बढ़ने से कंपनियों पर दबाव बढ़ा है, जिसका असर अब अंतिम कीमतों में दिखाई देगा.
राज्य सरकार को इस फैसले से राजस्व में बड़ा फायदा होने की उम्मीद है. पिछले डेढ़ साल के आंकड़ों के मुताबिक, एक्साइज ड्यूटी के जरिए राज्य के राजस्व में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे सरकारी खजाने में लगभग 3500 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है. विभाग का अनुमान है कि वर्ष 2026 में इस नई बढ़ोतरी के चलते राज्य को करीब 1500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी हो सकती है.
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इसके अलावा, इस साल आबकारी विभाग ने 98 प्रतिशत शराब की दुकानों की सफल नीलामी भी की है, जो तय समय सीमा के भीतर पूरी की गई. वर्तमान में प्रदेश में कुल 7665 लाइसेंस प्राप्त शराब की दुकानें संचालित हो रही हैं. कुल मिलाकर, नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ यह बदलाव आम उपभोक्ताओं के खर्च को बढ़ाने वाला है, वहीं सरकार के लिए राजस्व बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा.


