भारत सरकार का Coffee Development Programme in North Eastern Region (CDPNEREC) पूर्वोत्तर राज्यों में कॉफी की खेती को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है. इस योजना का मुख्य लक्ष्य मौजूदा कॉफी बागानों की उत्पादकता बढ़ाना, नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना और गुणवत्तापूर्ण कॉफी उत्पादन को बढ़ावा देना है.
यह योजना विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत के उन क्षेत्रों पर केंद्रित है जहां कॉफी की खेती की संभावनाएं मौजूद हैं. इसके तहत किसानों को कॉफी पौधों के पुनर्जीवन, गैप फिलिंग और बेहतर कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए सहायता प्रदान की जाती है.
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योजना का उद्देश्य
कॉफी विकास कार्यक्रम का उद्देश्य कॉफी उत्पादक किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ना और उत्पादन क्षमता में सुधार करना है. इसके माध्यम से कॉफी बागानों की गुणवत्ता बढ़ाने, पौधों के रखरखाव और दीर्घकालिक उत्पादकता सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाता है.
किसानों को मिलने वाले लाभ
योजना के अंतर्गत किसानों को कॉफी बागानों के विकास और रखरखाव के लिए सहायता उपलब्ध कराई जाती है. इसमें पुराने पौधों के पुनर्जीवन, खाली स्थानों पर नए पौधे लगाने और बेहतर खेती तकनीकों को अपनाने के लिए सहयोग शामिल है. इससे उत्पादन बढ़ाने और कॉफी की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलती है.
पूर्वोत्तर राज्यों में बढ़ रहा कॉफी का दायरा
पूर्वोत्तर भारत में जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां कॉफी उत्पादन के लिए अनुकूल मानी जाती हैं. ऐसे में यह योजना क्षेत्र के किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ नकदी फसल के रूप में कॉफी उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करती है. इससे ग्रामीण रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है.
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कृषि विविधीकरण को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि कॉफी जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने से किसानों की आय के स्रोतों में विविधता आएगी. साथ ही पूर्वोत्तर क्षेत्र को देश के प्रमुख कॉफी उत्पादक क्षेत्रों में विकसित करने में भी मदद मिलेगी.
इसी उद्देश्य के साथ केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियां कॉफी खेती के विस्तार, तकनीकी मार्गदर्शन और उत्पादकता सुधार पर लगातार काम कर रही हैं ताकि क्षेत्र के अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें.
स्रोत: Government of India


