भारत के समुद्री क्षेत्रों से जुड़े लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की गई है. भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) ने El Nino की स्थिति को देखते हुए पहला विशेष बुलेटिन जारी किया है. इस बुलेटिन में आने वाले महीनों में समुद्री तापमान बढ़ने, समुद्री जीवों पर दबाव बढ़ने और मछली उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई गई है.
INCOIS के अनुसार El Nino की स्थिति अभी विकसित हो रही है और इसके नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच अपने चरम पर पहुंचने की संभावना है. इसका असर भारतीय महासागर और उससे जुड़े समुद्री क्षेत्रों पर लंबे समय तक देखने को मिल सकता है.
अप्रैल-मई 2027 तक सामान्य से अधिक रह सकता है समुद्री तापमान
बुलेटिन के अनुसार भारतीय महासागर का समुद्री सतह तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है. यह स्थिति अप्रैल या मई 2027 तक बनी रह सकती है.
विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्र के तापमान में वृद्धि का सीधा असर समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ता है. जब पानी ज्यादा गर्म होता है तो कई समुद्री जीवों के लिए परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हो जाती हैं.
समुद्री जीवों और मछली उत्पादन पर पड़ सकता है असर
INCOIS ने चेतावनी दी है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में समुद्री जीवों पर तापीय दबाव बढ़ सकता है. खासकर मार्च से मई 2027 के दौरान स्थिति अधिक गंभीर हो सकती है.
इसके संभावित प्रभावों में शामिल हैं:
| संभावित असर | विवरण |
|---|---|
| कोरल ब्लीचिंग | प्रवाल भित्तियों को नुकसान |
| मरीन हीट वेव | समुद्र में असामान्य गर्मी |
| मछलियों का पलायन | अनुकूल क्षेत्रों की ओर जाना |
| मछली उत्पादन में कमी | पकड़ में गिरावट की आशंका |
| मछलियों का आकार प्रभावित | विकास की गति पर असर |
विशेष रूप से सार्डिन और मैकेरल जैसी मछलियों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है क्योंकि ये प्रजातियां तापमान में बदलाव के प्रति संवेदनशील मानी जाती हैं.
पूर्वी तट पर बढ़ सकता है खतरा
बुलेटिन के मुताबिक मानसून के दौरान बंगाल की खाड़ी में समुद्र की स्थिति सामान्य से अधिक उग्र रह सकती है.
इसके कारण:
- पूर्वी तट पर तटीय कटाव बढ़ सकता है.
- कुछ इलाकों में समुद्री जलभराव की घटनाएं बढ़ सकती हैं.
- समुद्री गतिविधियों में अतिरिक्त सावधानी की जरूरत पड़ सकती है.
मछुआरों, बंदरगाहों और समुद्री परिवहन से जुड़े लोगों को मौसम और समुद्री चेतावनियों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है.
पश्चिमी तट के लिए राहत की खबर
जहां पूर्वी तट के लिए कुछ जोखिम बताए गए हैं, वहीं पश्चिमी तट के लिए स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रहने का अनुमान है.
INCOIS के अनुसार:
- अरब सागर में समुद्र अपेक्षाकृत शांत रह सकता है.
- समुद्री गतिविधियों के लिए ज्यादा अवसर मिल सकते हैं.
- पश्चिमी तट पर तटीय कटाव और जलभराव का खतरा कम रहने की संभावना है.
यह स्थिति शिपिंग, ऑफशोर ऑपरेशन और अन्य समुद्री गतिविधियों के लिए सकारात्मक मानी जा रही है.
समुद्री क्षेत्र से जुड़े लोगों को क्या करना चाहिए?
INCOIS ने सभी समुद्री क्षेत्र के हितधारकों, मछुआरों, बंदरगाह प्रबंधन, शिपिंग कंपनियों और तटीय प्रशासन से समय-समय पर जारी होने वाले अलर्ट और सलाह का पालन करने की अपील की है.
संस्था ने बताया है कि अगला विशेष El Nino बुलेटिन जुलाई 2026 के दूसरे सप्ताह में जारी किया जाएगा, जिसमें स्थिति का नया आकलन पेश किया जाएगा.
क्यों महत्वपूर्ण है यह बुलेटिन?
El Nino केवल मौसम को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि कृषि, मत्स्य पालन, समुद्री व्यापार और तटीय जीवन पर भी असर डाल सकता है. ऐसे में INCOIS द्वारा जारी यह विशेष बुलेटिन समुद्री क्षेत्रों से जुड़े लाखों लोगों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है.
यदि El Nino आने वाले महीनों में और मजबूत होता है, तो इसके प्रभाव भारतीय महासागर क्षेत्र में लंबे समय तक महसूस किए जा सकते हैं.
Source: PIB / Ministry of Earth Sciences


