भारत की पारंपरिक खाद्य विरासत में कई ऐसे व्यंजन शामिल हैं, जो किसी क्षेत्र की संस्कृति और स्थानीय जीवनशैली की पहचान बन चुके हैं. इन्हीं में से एक है कुटकी खीर, जो मध्य प्रदेश के शहडोल जिले की प्रसिद्ध पारंपरिक मिठाई मानी जाती है. यह व्यंजन विशेष रूप से वहां के आदिवासी समुदायों के बीच काफी लोकप्रिय है.
स्थानीय स्तर पर तैयार की जाने वाली यह खीर स्वाद के साथ-साथ पोषण के लिए भी जानी जाती है.
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क्या होती है कुटकी?
कुटकी एक प्रकार का लघु अनाज (Millet) है, जिसे अंग्रेजी में Little Millet कहा जाता है. भारत में सदियों से इसका उपयोग भोजन के रूप में किया जाता रहा है.
कुटकी में फाइबर, खनिज और अन्य आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं. यही कारण है कि हाल के वर्षों में मिलेट आधारित खाद्य पदार्थों की लोकप्रियता लगातार बढ़ी है.
कैसे बनाई जाती है कुटकी खीर?
कुटकी खीर तैयार करने के लिए पहले कुटकी के दानों को साफ कर हल्का पकाया जाता है. इसके बाद इसमें दूध, चीनी या गुड़ और स्वादानुसार इलायची मिलाई जाती है.
कुछ स्थानों पर इसे काजू, बादाम और अन्य सूखे मेवों के साथ भी परोसा जाता है, जिससे इसका स्वाद और अधिक समृद्ध हो जाता है.
शहडोल की पहचान बन चुकी है यह मिठाई
शहडोल क्षेत्र में कुटकी खीर केवल एक मिठाई नहीं, बल्कि स्थानीय खान-पान और आदिवासी संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है.
त्योहारों, पारिवारिक आयोजनों और विशेष अवसरों पर इसे पारंपरिक तरीके से तैयार किया जाता है. स्थानीय लोगों के बीच यह व्यंजन लंबे समय से लोकप्रिय है.
मिलेट आधारित भोजन को मिल रहा बढ़ावा
पिछले कुछ वर्षों में भारत में मोटे अनाज (Millets) को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है. ऐसे में कुटकी खीर जैसे पारंपरिक व्यंजन भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं.
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विशेषज्ञों का मानना है कि मिलेट आधारित खाद्य पदार्थ पोषण के साथ-साथ टिकाऊ कृषि को भी बढ़ावा देते हैं और स्थानीय खाद्य परंपराओं को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
Source: District Administration, Shahdol (Madhya Pradesh)


