राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (DIPR) द्वारा संचालित ‘दिवंगत पत्रकारों एवं साहित्यकारों के आश्रितों के लिए आर्थिक सहायता योजना’ का उद्देश्य ऐसे परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान करना है, जिनके परिवार के पत्रकार या साहित्यकार सदस्य का निधन हो चुका है और आश्रितों के सामने आजीविका या इलाज जैसी चुनौतियां हैं.
इस योजना के तहत पात्र आश्रितों को मासिक आर्थिक सहायता के साथ गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए एकमुश्त वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है.
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योजना का उद्देश्य
इस योजना का मुख्य उद्देश्य दिवंगत पत्रकारों और साहित्यकारों के आश्रितों को कठिन परिस्थितियों में आर्थिक सहयोग प्रदान करना है.
विशेष रूप से यह सहायता उन परिवारों के लिए है जहां.
- आय का कोई अन्य स्रोत नहीं है.
- चिकित्सा संबंधी गंभीर आवश्यकता है.
- बेरोजगारी के कारण आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है.
किन लोगों को मिलेगा लाभ?
योजना का लाभ केवल दिवंगत पत्रकार या साहित्यकार के पात्र आश्रितों को दिया जाता है.
इनमें शामिल हैं.
- विधवा पत्नी, यदि आय का कोई अन्य स्रोत न हो.
- 28 वर्ष से कम आयु का बेरोजगार पुत्र.
- अविवाहित पुत्री.
- माता या पिता, यदि उनके पास आय का कोई अन्य साधन न हो.
एक समय में केवल एक पात्र आश्रित को ही आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है.
कितनी आर्थिक सहायता मिलेगी?
1. गंभीर बीमारी के इलाज के लिए सहायता
योजना के तहत गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए.
- अधिकतम ₹1 लाख तक की आर्थिक सहायता दी जाती है.
- विशेष परिस्थितियों में यह राशि ₹2 लाख तक स्वीकृत की जा सकती है.
2. मासिक आर्थिक सहायता
पात्र आश्रितों को.
- ₹1,000 से ₹2,500 प्रति माह तक सहायता दी जा सकती है.
- यह सहायता अधिकतम एक वर्ष तक प्रदान की जाती है.
किन बीमारियों के इलाज पर सहायता मिलती है?
योजना के तहत कई गंभीर बीमारियों और जटिल चिकित्सा स्थितियों को शामिल किया गया है.
इनमें प्रमुख हैं.
- कैंसर
- किडनी प्रत्यारोपण
- बाईपास सर्जरी
- एंजियोप्लास्टी
- हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट
- ब्रेन स्ट्रोक
- न्यूरोलॉजिकल रोग
- मिर्गी
- दुर्घटना में गंभीर चोट
- निमोनिया और अन्य गंभीर संक्रमण
- हर्निया
- अपेंडिक्स
- किडनी और पित्त की पथरी
- सिजेरियन डिलीवरी
- गंभीर स्त्री रोग
- अत्यधिक रक्तस्राव संबंधी रोग
- लकवा (पैरालिसिस)
- अस्थमा
- अल्जाइमर
- कोविड-19
- थायरॉयड सहित अन्य गंभीर बीमारियां
पात्रता क्या है?
योजना का लाभ लेने के लिए.
- आवेदक दिवंगत पत्रकार या साहित्यकार का आश्रित होना चाहिए.
- दिवंगत व्यक्ति राजस्थान का निवासी होना चाहिए.
- आश्रित निर्धारित पात्रता श्रेणियों में शामिल होना चाहिए.
- संबंधित पात्र के पास आर्थिक सहायता का अन्य पर्याप्त स्रोत नहीं होना चाहिए.
आवेदन कैसे करें?
इस योजना के लिए आवेदन ऑफलाइन स्वीकार किए जाते हैं.
आवेदन की प्रक्रिया इस प्रकार है.
- जयपुर स्थित सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय (DIPR) से आवेदन पत्र प्राप्त करें.
- आवेदन पत्र में सभी आवश्यक जानकारी भरें.
- जरूरी दस्तावेज संलग्न करें.
- भरा हुआ आवेदन पत्र निदेशक, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, राजस्थान सरकार, जयपुर में जमा करें.
इसके बाद आवेदन की जांच राजस्थान पत्रकार एवं साहित्यकार कल्याण कोष समिति द्वारा की जाती है. पात्रता सत्यापित होने पर समिति की अनुशंसा के अनुसार सहायता स्वीकृत की जाती है.
आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज
आवेदन के साथ सामान्यतः निम्न दस्तावेज जमा करने होते हैं.
- पहचान पत्र
- आय प्रमाण
- बैंक पासबुक की प्रति
- चिकित्सा रिपोर्ट एवं डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन (यदि चिकित्सा सहायता के लिए आवेदन हो)
- अन्य आवश्यक दस्तावेज (यदि मांगे जाएं)
योजना क्यों है महत्वपूर्ण?
पत्रकार और साहित्यकार समाज को जानकारी और विचार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. उनके निधन के बाद कई परिवार आर्थिक कठिनाइयों का सामना करते हैं.
राजस्थान सरकार की यह योजना ऐसे परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने का प्रयास करती है, ताकि जरूरतमंद आश्रित कठिन समय में आर्थिक सहयोग प्राप्त कर सकें.
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. इस योजना का लाभ किन लोगों को मिलता है?
दिवंगत पत्रकार या साहित्यकार की विधवा पत्नी, 28 वर्ष से कम आयु का बेरोजगार पुत्र, अविवाहित पुत्री या आय के अन्य स्रोत से वंचित माता-पिता इस योजना के पात्र हो सकते हैं.
2. चिकित्सा सहायता के तहत अधिकतम कितनी राशि मिलती है?
सामान्य मामलों में ₹1 लाख और विशेष परिस्थितियों में ₹2 लाख तक की आर्थिक सहायता दी जा सकती है.
3. क्या मासिक आर्थिक सहायता भी मिलती है?
हां. पात्र लाभार्थी को ₹1,000 से ₹2,500 प्रति माह तक की सहायता अधिकतम एक वर्ष के लिए दी जा सकती है.
4. आवेदन कैसे किया जाता है?
आवेदन ऑफलाइन माध्यम से सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय (DIPR), जयपुर में निर्धारित आवेदन पत्र के जरिए किया जाता है.
Source: Rajasthan Govt.


