सड़क हादसों में घायल लोगों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई PM-RAHAT Scheme के तहत अब तक 22,481 लोगों को लाभ मिला है. Road Accident Victims’ Hospitalisation and Assured Treatment यानी PM-RAHAT योजना को 13 फरवरी 2026 से देशभर में लागू किया गया था. इसका मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को समय पर और बिना रुकावट चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराकर मौतों को कम करना है.
योजना के तहत सड़क हादसे के प्रत्येक पीड़ित को अधिकतम ₹1.5 लाख तक का इलाज कवर मिलता है. यह सुविधा दुर्घटना की तारीख से अधिकतम 7 दिनों तक उपलब्ध है. यह कवर किसी भी श्रेणी की सड़क पर मोटर वाहन के इस्तेमाल से हुए सड़क हादसों में शामिल पीड़ितों के लिए लागू है.
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Golden Hour में इलाज दिलाने पर खास जोर
PM-RAHAT Scheme का एक प्रमुख उद्देश्य सड़क हादसे के बाद Golden Hour के दौरान घायल व्यक्ति को जल्द से जल्द चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है.
क्या है Golden Hour
Golden Hour उस एक घंटे की अवधि को कहा जाता है जो किसी गंभीर चोट के बाद शुरू होती है और जिसमें तत्काल चिकित्सा सहायता मिलने पर पीड़ित की जान बचाने की संभावना सबसे अधिक होती है.
योजना के जरिए इसी महत्वपूर्ण समय में घायल व्यक्ति को अस्पताल तक पहुंचाने और उपचार शुरू कराने पर जोर दिया गया है.
34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 22,481 लोगों को लाभ
सरकार के अनुसार, 13 फरवरी 2026 को योजना के देशव्यापी क्रियान्वयन के बाद से 31 जुलाई 2026 तक कुल 22,481 पीड़ितों ने PM-RAHAT Scheme का लाभ उठाया है. ये मामले 34 States और UTs से सामने आए हैं.
गुजरात और मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा मामले
योजना के तहत राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के आंकड़ों में गुजरात सबसे ऊपर है. वहां कुल 7,036 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 6,416 cases approved रहे.
मध्य प्रदेश में कुल 6,761 मामले दर्ज हुए, जिनमें 6,275 cases approved थे. इसके बाद असम में 2,091, उत्तर प्रदेश में 887 और जम्मू-कश्मीर में 749 कुल मामले दर्ज किए गए.
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में कुल 18,149 मामले approved हुए, जबकि 3,674 मामलों को निर्धारित समयसीमा में पुलिस की ओर से response नहीं मिलने के बाद scheme से discharge किया गया. वहीं 658 life-threatening cases को State Police द्वारा योजना के तहत eligible नहीं पाया गया.
अस्पतालों को ₹10.56 करोड़ का भुगतान
PM-RAHAT के तहत अस्पतालों की ओर से उठाए गए कुल claims में से State Health Agencies ने ₹12.59 करोड़ के claims को approve किया है.
अस्पतालों को मिली भुगतान की राशि
स्वीकृत ₹12.59 करोड़ के claims में से ₹10.56 करोड़ का भुगतान अस्पतालों को किया जा चुका है. योजना के तहत अस्पतालों की भूमिका सड़क हादसे के पीड़ितों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण है.
किन अस्पतालों में मिलेगा PM-RAHAT का लाभ
योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार designated hospitals को PM-RAHAT के तहत उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है.
AB PM-JAY से जुड़े अस्पताल भी हो सकते हैं designated
Ayushman Bharat Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana यानी AB PM-JAY के तहत empanelled ऐसे अस्पताल जो National Health Authority द्वारा इस योजना के लिए जारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हैं, उन्हें PM-RAHAT के लिए designated hospitals माना जाएगा.
इसके अलावा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को National Health Authority की 20 मई 2025 की विस्तृत guidelines के आधार पर अतिरिक्त अस्पतालों को designate और onboard करने की सलाह दी गई है.
इलाज या भर्ती से इनकार पर कार्रवाई का प्रावधान
PM-RAHAT के तहत पात्र पीड़ित को अस्पताल में भर्ती करने या उपचार देने से इनकार करना scheme provisions का non-compliance माना जाता है.
अस्पतालों पर हो सकती है कार्रवाई
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को Clinical Establishments (Registration and Regulation) Act, 2010 या संबंधित राज्य के कानूनों के तहत कार्रवाई करने का अधिकार है.
इसके अलावा hospital empanelment guidelines में non-compliance के मामलों में disciplinary proceedings, suspension और de-empanelment जैसे प्रावधान भी हैं.
112 नंबर से मिलेगी नजदीकी अस्पताल की जानकारी
घायल व्यक्ति को Golden Hour के भीतर अस्पताल तक पहुंचाने के लिए PM-RAHAT को 112 Emergency Response Support System यानी ERSS से जोड़ा गया है.
112 पर कॉल करके ले सकते हैं मदद
पीड़ित या Good Samaritan 112 नंबर पर कॉल करके नजदीकी designated hospital की जानकारी प्राप्त कर सकता है. इसके अलावा 112 के जरिए ambulance support भी मांगा जा सकता है.
इस व्यवस्था का उद्देश्य सड़क दुर्घटना के बाद अस्पताल तक पहुंचने में होने वाली देरी को कम करना है.
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PM-RAHAT Scheme के राज्यवार आंकड़े
31 जुलाई 2026 तक योजना के तहत कुल 22,481 मामले दर्ज हुए. इनमें 18,149 approved cases, 3,674 ऐसे cases शामिल हैं जिन्हें निर्धारित समयसीमा में पुलिस से response नहीं मिलने के कारण scheme से discharge किया गया और 658 life-threatening cases ऐसे रहे जिन्हें State Police ने scheme के तहत eligible नहीं माना.
योजना से जुड़े आंकड़ों के अनुसार गुजरात में कुल 7,036, मध्य प्रदेश में 6,761, असम में 2,091, उत्तर प्रदेश में 887, जम्मू-कश्मीर में 749, आंध्र प्रदेश में 677 और छत्तीसगढ़ में 644 मामले दर्ज किए गए.
यह जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को राज्यसभा में लिखित जवाब में दी.


