देहरादून: उत्तराखंड के पहाड़ों में सड़क सिर्फ आने-जाने का रास्ता नहीं, बल्कि गांवों को स्कूल, अस्पताल, बाजार और रोजगार से जोड़ने वाली सबसे अहम कड़ी है. इसी कड़ी को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना यानी PMGSY के तहत राज्य में सड़क नेटवर्क का लगातार विस्तार किया जा रहा है. PMGSY के पहले तीन चरणों में उत्तराखंड में अब तक 21,915 किलोमीटर लंबी 2,826 सड़कों का निर्माण पूरा हो चुका है. इन सड़कों से प्रदेश के 1,860 गांवों को सड़क कनेक्टिविटी मिली है. अब योजना के चौथे चरण में 309 और गांवों को सड़क से जोड़ने की तैयारी तेज हो गई है.
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11,595 करोड़ रुपये से बनीं 2,826 सड़कें
उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां सड़क निर्माण के लिए काफी चुनौतीपूर्ण हैं. ऊंचे पहाड़, खड़ी ढलान और दुर्गम इलाकों के बीच सड़क पहुंचाना आसान नहीं है. इसके बावजूद PMGSY के तीन चरणों में 11,595 करोड़ रुपये की लागत से 2,826 सड़कों का निर्माण पूरा किया गया है. इन सड़कों की कुल लंबाई 21,915 किलोमीटर है. इसका सीधा फायदा उन ग्रामीण इलाकों को मिला है, जहां पहले सड़क तक पहुंचने के लिए लोगों को लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती थी.
अब 309 गांवों की बारी
PMGSY के चौथे चरण के पहले चक्र में 309 गांवों को सड़क से जोड़ने का काम किया जा रहा है. इसके लिए 1,707 करोड़ रुपये की लागत से 184 सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है. इन परियोजनाओं के तहत कुल 1,228.20 किलोमीटर सड़क बनाई जा रही है. सरकार का लक्ष्य है कि पहाड़ के दूरस्थ गांवों तक सड़क कनेक्टिविटी जल्द से जल्द पहुंचाई जाए.
पौड़ी के सबसे ज्यादा 68 गांव होंगे कनेक्ट
चौथे चरण के पहले चक्र में पौड़ी गढ़वाल के सबसे ज्यादा 68 गांवों को सड़क सुविधा का लाभ मिलेगा. इसके अलावा अल्मोड़ा और टिहरी के 47-47 गांव, बागेश्वर के 35 गांव, पिथौरागढ़ के 25 गांव, नैनीताल और उत्तरकाशी के 24-24 गांव, चमोली के 17 गांव, देहरादून और रुद्रप्रयाग के 10-10 गांव, हरिद्वार के 2 गांव का नाम शामिल है, यानी चौथे चरण के इस पहले चक्र में पहाड़ से लेकर मैदानी क्षेत्र तक कई इलाकों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है.
चौथे चरण में 1,490 गांवों तक पहुंचेगा सड़क नेटवर्क
PMGSY के चौथे चरण का दायरा इससे कहीं बड़ा है. प्रस्तावित योजना के मुताबिक उत्तराखंड के 13 जिलों के 1,490 गांवों को सड़क नेटवर्क से जोड़ा जाएगा. इसके लिए करीब 9,344 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण प्रस्तावित है. जिलेवार प्रस्तावित योजना में पिथौरागढ़ में 249 गांवों के लिए 1,819.6 किलोमीटर, अल्मोड़ा में 221 गांवों के लिए 1,395.5 किलोमीटर और पौड़ी में 185 गांवों के लिए 1,227.8 किलोमीटर सड़क का प्रावधान है.
चमोली, टिहरी और उत्तरकाशी में भी बड़ा काम
चमोली में 175 गांवों को 996.15 किलोमीटर सड़क नेटवर्क से जोड़ने का प्रस्ताव है. टिहरी में 168 गांवों के लिए 941.5 किलोमीटर और उत्तरकाशी में 112 गांवों के लिए 721.99 किलोमीटर सड़क का प्रावधान किया गया है. वहीं, रुद्रप्रयाग में 111 गांवों के लिए 469.2 किलोमीटर और बागेश्वर में 101 गांवों के लिए 569.82 किलोमीटर सड़क का प्रस्ताव है.
सड़क पहुंचेगी तो बदलेंगे गांव के कई रास्ते
पहाड़ के किसी गांव तक सड़क पहुंचने का मतलब सिर्फ सफर आसान होना नहीं है. इसका असर रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ता है. स्कूल-कॉलेज तक पहुंच आसान होती है, मरीजों को अस्पताल ले जाने में समय बचता है और किसानों के लिए अपनी उपज बाजार तक पहुंचाना आसान हो जाता है. सड़क कनेक्टिविटी बेहतर होने से दूरस्थ इलाकों में पर्यटन और स्थानीय कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद रहती है. इससे गांवों के लोगों को रोजगार और बाजार से जुड़ने के नए अवसर मिल सकते हैं.
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धामी सरकार ने केंद्र के सामने उठाया मुद्दा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि दूरदराज और दुर्गम गांवों को सड़क नेटवर्क से जोड़ना राज्य सरकार की प्राथमिकता है. राज्य सरकार के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने केंद्र के सामने PMGSY के तहत अधिक से अधिक गांवों को शामिल करने और सड़क कनेक्टिविटी बढ़ाने का मुद्दा उठाया है. चौथे चरण के विस्तार के साथ सरकार का फोकस उन गांवों तक सड़क पहुंचाने पर है, जहां आज भी बेहतर कनेक्टिविटी लोगों की बड़ी जरूरत बनी हुई है.


