नोएडा, 26 अगस्त 2026: उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में स्वाइन फ्लू और डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी की खबरों के बीच जिले के कई स्कूलों ने बच्चों की सेहत को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है. स्कूल प्रबंधन की ओर से अभिभावकों को advisory जारी कर बच्चों में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर उन्हें स्कूल नहीं भेजने की सलाह दी गई है.
स्कूलों ने साफ कहा है कि अगर बच्चे को सर्दी, खांसी, बुखार या flu जैसे symptoms हैं, तो उसे ठीक होने तक घर पर रखा जाए. जरूरत पड़ने पर medical advice लेने की भी सलाह दी गई है. स्कूलों का कहना है कि attendance बनाए रखने के लिए बीमार बच्चे को स्कूल भेजना उसकी सेहत के साथ-साथ दूसरे बच्चों के लिए भी संक्रमण का जोखिम बढ़ा सकता है.
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बीमार बच्चे को स्कूल न भेजने की सलाह
स्कूल managements ने अभिभावकों से बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने को कहा है. यदि बच्चे में cold, cough, fever या flu-like symptoms नजर आते हैं, तो उसे घर पर आराम कराने की सलाह दी गई है.
स्कूलों का संदेश है कि केवल regular attendance बनाए रखने के लिए बच्चे को कक्षा में भेजना उचित नहीं है. बीमारी की स्थिति में घर पर आराम करने से बच्चे को recovery के लिए समय मिलेगा और classroom में दूसरे छात्रों के बीच infection फैलने की संभावना भी कम हो सकती है.
स्कूलों में hygiene पर बढ़ा फोकस
बीमारियों से बचाव के लिए स्कूलों में hand hygiene और personal cleanliness पर भी जोर दिया जा रहा है. बच्चों को नियमित रूप से हाथ धोने और साफ-सफाई का ध्यान रखने के बारे में जागरूक किया जा रहा है.
स्कूलों में students और staff को respiratory hygiene से जुड़े जरूरी व्यवहार के बारे में भी बताया जा रहा है. इस तरह के preventive measures का उद्देश्य मौसमी बीमारियों के बीच संक्रमण की संभावना को कम करना है.
बच्चों को बिना जरूरत आंख, नाक और मुंह को छूने से बचने की सलाह भी दी जा रही है. इसके साथ classrooms और common areas की cleaning पर अतिरिक्त ध्यान दिया जा रहा है.
डेंगू को लेकर stagnant water की जांच
डेंगू के खतरे को देखते हुए स्कूल परिसरों में पानी जमा होने वाली जगहों की निगरानी बढ़ाई गई है. स्कूल managements कूलर, गमले, छत और ऐसी दूसरी जगहों की जांच कर रहे हैं जहां stagnant water जमा हो सकता है.
स्कूलों का फोकस ऐसे स्थानों को साफ रखने पर है ताकि मच्छरों के breeding की संभावना को कम किया जा सके. रिपोर्टों के अनुसार, स्कूल परिसरों में stagnant water की जांच और sanitation measures को भी precautionary steps का हिस्सा बनाया गया है.
गंभीर लक्षण दिखें तो डॉक्टर से सलाह
स्कूलों ने अभिभावकों से कहा है कि बच्चों में लगातार बने रहने वाले या गंभीर symptoms को नजरअंदाज न करें. बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर medical advice लेने की सलाह दी गई है.
खास तौर पर लगातार बुखार, बहुत ज्यादा कमजोरी, सांस लेने में परेशानी या दूसरे गंभीर लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी माना गया है. स्कूलों की advisory का मुख्य जोर precaution और timely medical attention पर है.
Attendance से ज्यादा जरूरी बच्चों की सेहत
स्कूल managements का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई और regular attendance महत्वपूर्ण है, लेकिन बीमारी की स्थिति में स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. बीमार बच्चे को घर पर रखने से उसे आराम मिल सकता है और स्कूल में दूसरे बच्चों के संपर्क में आने का जोखिम भी कम हो सकता है.
मौजूदा स्थिति में स्कूलों, अभिभावकों और स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच बेहतर coordination को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. स्कूलों की ओर से hygiene, sanitation और symptom-based precautions पर जोर इसी दिशा में उठाया गया कदम है.
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नोएडा में स्वाइन फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क
गौतम बुद्ध नगर में स्वाइन फ्लू के मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की निगरानी बढ़ने की भी रिपोर्ट सामने आई है. 25 अगस्त की रिपोर्टों में जिले में संक्रमण के मामलों को लेकर अस्पतालों में जरूरी व्यवस्थाएं तैयार रखने और निगरानी बढ़ाने की जानकारी दी गई.
ऐसे में स्कूलों की ओर से जारी advisory को बच्चों में बीमारी के शुरुआती लक्षणों पर सतर्क रहने और संक्रमण की संभावना कम करने के preventive effort के तौर पर देखा जा रहा है.
अभिभावकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि बच्चे में flu-like symptoms या बुखार होने पर उसे school भेजने के बजाय उसकी स्थिति पर नजर रखें और जरूरत के अनुसार healthcare professional से सलाह लें. स्कूलों ने भी इसी तरह बीमारी की स्थिति में बच्चे को घर पर रखने और hygiene precautions अपनाने पर जोर दिया है.


