Delhi, August 18: छोटे बच्चों में मोबाइल फोन और अन्य स्क्रीन के बढ़ते इस्तेमाल के कारण आंखों से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं. एम्स दिल्ली के डॉक्टरों ने बच्चों में मायोपिया यानी निकट दृष्टि दोष और ड्राई आई की बढ़ती समस्या को लेकर चिंता जताई है.
विशेषज्ञों के मुताबिक, कम उम्र में लंबे समय तक स्क्रीन देखने से बच्चों की आंखों के प्राकृतिक विकास पर असर पड़ सकता है. इसके कारण कुछ बच्चों में कम उम्र से ही आंखों का नंबर बढ़ने की समस्या सामने आ रही है.
लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों पर असर
बच्चों के बीच मोबाइल फोन और दूसरी डिजिटल स्क्रीन का इस्तेमाल बढ़ रहा है. कम उम्र में लंबे समय तक स्क्रीन देखने को लेकर एम्स दिल्ली के विशेषज्ञों ने चिंता जताई है.
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक स्क्रीन देखने से बच्चों की आंखों के प्राकृतिक विकास पर असर पड़ सकता है. इसके चलते बच्चों में मायोपिया यानी निकट दृष्टि दोष की समस्या कम उम्र में ही सामने आने की संभावना बढ़ रही है.
मायोपिया में दूर की चीजें साफ दिखाई देने में परेशानी होती है और व्यक्ति को देखने के लिए चश्मे की जरूरत पड़ सकती है. बच्चों में कम उम्र से आंखों का नंबर बढ़ने की समस्या अभिभावकों के लिए भी चिंता का विषय बन रही है.
ड्राई आई की समस्या भी बढ़ रही
स्क्रीन के बढ़ते इस्तेमाल के साथ बच्चों में ड्राई आई की समस्या को लेकर भी विशेषज्ञों ने चिंता जताई है. लंबे समय तक स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित करने के दौरान आंखों पर दबाव पड़ सकता है.
बच्चों में आंखों से जुड़ी किसी भी तरह की परेशानी सामने आने पर समय रहते विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है. खास तौर पर अगर बच्चे को दूर की चीजें देखने में परेशानी हो, आंखों में असहजता महसूस हो या लगातार आंखों से जुड़ी शिकायत हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
एम्स दिल्ली ने शुरू की रेटिना ट्रेनिंग फैसिलिटी
बच्चों में आंखों से जुड़ी समस्याओं के बीच एम्स दिल्ली ने नेत्र चिकित्सा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में एक अहम पहल की है. एम्स ने देश की पहली ‘स्टेट-ऑफ-द-आर्ट रेटिना ट्रेनिंग फैसिलिटी’ शुरू की है.
इस हाईटेक केंद्र में देशभर के डॉक्टरों को रेटिना से जुड़ी जटिल बीमारियों के इलाज और सर्जरी की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा.
इस सुविधा के जरिए डॉक्टरों को रेटिना से जुड़ी जटिल स्थितियों के उपचार और आधुनिक सर्जरी तकनीकों को समझने और उनका प्रशिक्षण लेने का अवसर मिलेगा.
बेहतर नेत्र चिकित्सा सुविधाओं पर जोर
एम्स दिल्ली की इस पहल का उद्देश्य देश में रेटिना उपचार की गुणवत्ता और विशेषज्ञता को मजबूत करना है. इसके साथ ही मरीजों को बेहतर नेत्र चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भी इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
एक तरफ बच्चों में स्क्रीन के बढ़ते इस्तेमाल से मायोपिया और ड्राई आई जैसी समस्याओं को लेकर चिंता जताई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ रेटिना से जुड़ी गंभीर बीमारियों के इलाज और प्रशिक्षण के लिए आधुनिक सुविधा शुरू की गई है.
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बच्चों की आंखों के स्वास्थ्य को लेकर अभिभावकों के लिए स्क्रीन के इस्तेमाल पर ध्यान देना और आंखों से जुड़ी किसी भी समस्या को नजरअंदाज न करना महत्वपूर्ण है.


