Murlidhar Gyanchandani UP richest businessman: उत्तर प्रदेश के बड़े कारोबारियों की चर्चा होती है तो कानपुर का नाम भी प्रमुखता से सामने आता है. इसी शहर से निकलकर मुरलीधर ज्ञानचंदानी ने साबुन और डिटर्जेंट के कारोबार को एक बड़े कारोबारी समूह में बदल दिया. घड़ी डिटर्जेंट के नाम से घर-घर पहचान बनाने वाले मुरलीधर ज्ञानचंदानी को 2025 की Hurun आधारित रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश के सबसे अमीर लोगों की सूची में पहला स्थान दिया गया है. इस रिपोर्ट में उनकी अनुमानित संपत्ति 15,800 करोड़ रुपये बताई गई है. इससे पहले 2024 की खबरों में उनकी संपत्ति करीब 12,000 करोड़ रुपये बताई गई थी. ऐसे में अलग-अलग वर्षों के आंकड़ों में अंतर दिखाई देना स्वाभाविक है.
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कानपुर से शुरू हुआ कारोबारी सफर
मुरलीधर ज्ञानचंदानी की कारोबारी कहानी कानपुर से शुरू हुई. RSPL Group की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वर्ष 1988 में मुरलीधर ज्ञानचंदानी और उनके भाई बिमल कुमार ज्ञानचंदानी ने घड़ी के साथ कारोबार की शुरुआत की. उस समय बाजार में पहले से कई स्थापित ब्रांड मौजूद थे, लेकिन दोनों भाइयों ने आम परिवारों की जरूरत और उनकी खरीद क्षमता को समझते हुए अपने कारोबार को आगे बढ़ाया.
घड़ी डिटर्जेंट की कीमत और उसकी पहुंच ने इसे धीरे-धीरे आम ग्राहकों के बीच पहचान दिलाई. समय के साथ यह ब्रांड इतना लोकप्रिय हुआ कि घड़ी नाम डिटर्जेंट के बाजार में एक जाना-पहचाना नाम बन गया. कानपुर से शुरू हुआ यह सफर आगे चलकर कई अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंच गया.
पिता के कारोबार से मिली शुरुआती सीख
मुरलीधर और बिमल ज्ञानचंदानी के कारोबार की जड़ें उनके पारिवारिक व्यवसाय से जुड़ी बताई जाती हैं. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनके पिता दयालदास ज्ञानचंदानी साबुन बनाने के कारोबार से जुड़े हुए थे. ऐसे में दोनों भाइयों को कारोबार की बुनियादी समझ परिवार से ही मिली.
हालांकि अगली पीढ़ी ने पुराने अनुभव को नए तरीके से इस्तेमाल किया. उन्होंने रोजमर्रा की जरूरत वाले उत्पादों पर ध्यान केंद्रित किया और कम कीमत में डिटर्जेंट उपलब्ध कराने की रणनीति अपनाई. घड़ी को शुरुआत में बड़े और स्थापित ब्रांडों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ी, लेकिन धीरे-धीरे इसकी पहुंच आम घरों तक बढ़ती गई. यही बाजार की समझ आगे चलकर कारोबार की सबसे बड़ी ताकत बनी.
मुरलीधर के भाई बिमल भी बड़े कारोबारी
इस कारोबारी सफर में मुरलीधर ज्ञानचंदानी अकेले नहीं हैं. उनके भाई बिमल कुमार ज्ञानचंदानी भी RSPL Group के कारोबार में महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं. 2025 की Hurun आधारित उत्तर प्रदेश की सूची में बिमल की अनुमानित संपत्ति 10,500 करोड़ रुपये बताई गई है. इस आंकड़े के आधार पर उन्हें राज्य के अमीर लोगों की सूची में दूसरा स्थान मिला.
इससे पहले 2024 की खबरों में बिमल की संपत्ति करीब 8,000 करोड़ रुपये बताई गई थी. दोनों भाइयों की संपत्ति के आंकड़ों में अलग-अलग वर्षों में बदलाव दिखाई देता है. इसका कारण रिपोर्ट तैयार किए जाने की तारीख और संपत्ति के मूल्यांकन में होने वाला बदलाव हो सकता है. इसलिए किसी भी आंकड़े को देखते समय संबंधित रिपोर्ट का वर्ष जरूर देखना चाहिए.
घड़ी से आगे बढ़ा RSPL Group का कारोबार
आज RSPL Group की पहचान सिर्फ घड़ी डिटर्जेंट तक सीमित नहीं है. कंपनी की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, समूह होम और पर्सनल केयर के अलावा डेयरी, फुटवियर, रियल एस्टेट, एग्री-बिजनेस और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में भी कारोबार करता है.
फुटवियर कारोबार में रेड चीफ एक प्रमुख ब्रांड के रूप में जाना जाता है. यानी जिस कारोबारी समूह की शुरुआत डिटर्जेंट से हुई, उसने समय के साथ अपने कारोबार को कई अलग-अलग क्षेत्रों में फैलाया. कंपनी की जानकारी के मुताबिक उसका अंतरराष्ट्रीय कारोबार बांग्लादेश, नेपाल, इथियोपिया और दुबई जैसे बाजारों तक भी पहुंचा है.
कारोबार के साथ सामाजिक पहल भी
मुरलीधर ज्ञानचंदानी और उनके परिवार से जुड़ी कहानी में सामाजिक कार्यों का पहलू भी सामने आता है. उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में कानपुर में परिवार के नाम से चैरिटेबल अस्पताल चलाए जाने का उल्लेख मिलता है. इससे पता चलता है कि कारोबारी गतिविधियों के साथ सामाजिक क्षेत्र में भी परिवार की भागीदारी रही है.
हालांकि संपत्ति से जुड़े आंकड़ों को लेकर सावधानी जरूरी है. अलग-अलग वर्षों और रिपोर्टों में संपत्ति की रकम अलग हो सकती है. 2025 की Hurun आधारित सूची में मुरलीधर ज्ञानचंदानी की संपत्ति 15,800 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि पुराने आंकड़ों में यह रकम करीब 12,000 करोड़ रुपये थी.
देसी ब्रांड से हजारों करोड़ की संपत्ति तक
मुरलीधर ज्ञानचंदानी की कहानी इसलिए खास है क्योंकि इसकी शुरुआत किसी बड़े कॉरपोरेट घराने से नहीं, बल्कि कानपुर के पारिवारिक साबुन कारोबार से हुई. घड़ी डिटर्जेंट ने आम ग्राहकों के बीच अपनी जगह बनाई और इसी ब्रांड की सफलता के आधार पर कारोबार का दायरा लगातार बढ़ता गया.
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2025 की Hurun आधारित उत्तर प्रदेश की अमीरों की सूची के मुताबिक मुरलीधर ज्ञानचंदानी 15,800 करोड़ रुपये की अनुमानित संपत्ति के साथ पहले स्थान पर हैं. उनके भाई बिमल कुमार ज्ञानचंदानी 10,500 करोड़ रुपये के साथ दूसरे स्थान पर हैं. दोनों भाइयों की कहानी बताती है कि बाजार की जरूरत को समझकर बनाया गया देसी ब्रांड किस तरह समय के साथ एक बड़े बहु-क्षेत्रीय कारोबारी समूह का आधार बन सकता है.


