नई दिल्ली, 28 अगस्त 2026: चीन-नेपाल सीमा पर ग्लेशियर टूटने के बाद मलबे से बनी नई झील को लेकर खतरा बढ़ गया है. झील में पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है और इसमें अब 25 लाख क्यूबिक मीटर से अधिक पानी जमा होने की बात सामने आई है. बढ़ते जल दबाव के बीच झील के टूटने या ओवरफ्लो होने की आशंका को देखते हुए तिब्बत से लेकर नेपाल तक फिर से अलर्ट जारी किया गया है.
चीनी अधिकारियों के अनुसार, स्थिति को देखते हुए बचाव कार्य रोक दिए गए हैं. झील में पानी की मात्रा लगातार बढ़ने के कारण किसी भी संभावित जोखिम पर नजर रखी जा रही है.
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झील में 25 लाख क्यूबिक मीटर से ज्यादा पानी
चीन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, नई बनी झील में अब 25 लाख क्यूबिक मीटर से अधिक पानी जमा हो चुका है. एक दिन पहले चीन की आठ सदस्यीय टीम ने झील में करीब 15 से 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी होने का अनुमान लगाया था.
यानी थोड़े समय में झील में पानी की मात्रा में काफी बढ़ोतरी हुई है. पानी के इस तेजी से बढ़ते स्तर ने अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है.
तीन दिन में 30 लाख क्यूबिक मीटर और पानी आने की चेतावनी
चीन ने गुरुवार को चेतावनी दी थी कि अगले तीन दिनों के दौरान झील में करीब 30 लाख क्यूबिक मीटर और पानी पहुंच सकता है.
इतनी बड़ी मात्रा में पानी जमा होने से झील पर दबाव और बढ़ने की आशंका है. यही वजह है कि प्रभावित इलाके में सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी गई है.
30 लाख क्यूबिक मीटर पानी कितना ज्यादा है?
रिपोर्ट के मुताबिक, 30 लाख क्यूबिक मीटर पानी करीब 1,200 ओलंपिक आकार के swimming pools भरने के बराबर है.
इस तुलना से अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले दिनों में झील में पहुंचने वाले पानी की मात्रा कितनी बड़ी हो सकती है. हालांकि, वास्तविक असर पानी के प्रवाह, झील की संरचना और आसपास के भौगोलिक हालात पर निर्भर करेगा.
बढ़ते दबाव से झील टूटने का खतरा
नई झील के बनने की वजह ग्लेशियर टूटने के बाद जमा हुआ मलबा बताया गया है. अब लगातार पानी जमा होने के कारण झील पर दबाव बढ़ रहा है.
चीनी अधिकारियों की चेतावनी के मुताबिक, पानी के बढ़ते दबाव से झील के टूटने का जोखिम बढ़ गया है. ऐसी स्थिति में बड़ी मात्रा में पानी अचानक नीचे की ओर बह सकता है, जिससे downstream इलाकों के लिए खतरा पैदा हो सकता है.
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में झील के निश्चित रूप से टूटने की बात नहीं कही गई है. फिलहाल अधिकारियों की चिंता संभावित खतरे और बढ़ते water pressure को लेकर है.
तिब्बत से नेपाल तक फिर अलर्ट
झील से जुड़े संभावित खतरे को देखते हुए तिब्बत से लेकर नेपाल तक alert बढ़ाया गया है. सीमा के दोनों ओर प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रखी जा रही है.
ऐसे हालात में नदी और जलधाराओं के downstream हिस्सों में पानी के स्तर में अचानक बदलाव की आशंका रहती है. इसलिए संबंधित प्रशासन को सतर्क रखा गया है.
नेपाल में हाल में आई भोटेकोशी नदी की भीषण बाढ़ के बाद पहले से ही आपदा प्रबंधन एजेंसियां सक्रिय हैं. ऐसे में नई ग्लेशियर झील से जुड़ा खतरा क्षेत्रीय स्तर पर अतिरिक्त चिंता पैदा कर रहा है.
बचाव कार्य क्यों रोके गए
चीनी अधिकारियों के अनुसार, झील की मौजूदा स्थिति को देखते हुए rescue operations रोक दिए गए हैं. इसका सीधा कारण इस समय उपलब्ध सामग्री में विस्तार से नहीं बताया गया है.
हालांकि, तेजी से बढ़ते पानी और संभावित खतरे के बीच क्षेत्र में राहत एवं बचाव टीमों के लिए काम करना जोखिमपूर्ण हो सकता है. फिलहाल प्राथमिकता स्थिति की निगरानी और संभावित downstream impact का आकलन करने पर है.
ग्लेशियर टूटने के बाद बनी नई झील बनी चिंता
ग्लेशियर के टूटने के बाद मलबा जमा होने से पानी का रास्ता बाधित हुआ और नई झील बनने की स्थिति पैदा हुई. ऐसी झील में अगर लगातार पानी पहुंचता रहे और निकासी पर्याप्त न हो, तो water pressure बढ़ सकता है.
मौजूदा स्थिति में भी चिंता इसी बात को लेकर है कि झील में जमा पानी तेजी से बढ़ रहा है. चीन के अनुमान के मुताबिक अगले कुछ दिनों में इसमें और बड़ी मात्रा में पानी पहुंच सकता है.
फिलहाल निगरानी और अलर्ट पर जोर
इस समय उपलब्ध जानकारी के अनुसार स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. चीन की ओर से पानी की मात्रा और संभावित खतरे को लेकर चेतावनी जारी की गई है, जबकि तिब्बत और नेपाल में सतर्कता बढ़ाई गई है.
झील के वास्तविक जोखिम का स्तर आगे पानी के प्रवाह और उसके जलस्तर में होने वाले बदलाव पर निर्भर करेगा. इसलिए फिलहाल अधिकारियों का जोर monitoring, alertness और संभावित downstream खतरे से निपटने की तैयारी पर है.
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चीन की चेतावनी के बाद अगले कुछ दिनों में झील में पानी की मात्रा और उसके दबाव पर खास नजर रहेगी. स्थिति में बदलाव होने पर प्रभावित इलाकों के लिए आगे नए निर्देश जारी किए जा सकते हैं.


