वाराणसी, 27 अगस्त 2026: भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को एक और बड़ी वैश्विक पहचान मिली है. उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ को UNESCO World Heritage List में शामिल कर लिया गया है. यह फैसला दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित World Heritage Committee के 48वें सत्र के दौरान लिया गया. इसके साथ ही UNESCO World Heritage properties की भारत की कुल संख्या 45 हो गई है, जिनमें 37 सांस्कृतिक, सात प्राकृतिक और एक मिश्रित स्थल शामिल हैं.
सारनाथ को UNESCO की मान्यता मिलने के बाद यह स्थल वैश्विक स्तर पर बौद्ध धर्म, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के एक महत्वपूर्ण केंद्र के तौर पर और मजबूत हुआ है. सारनाथ गौतम बुद्ध के जीवन और उनकी शिक्षाओं से सीधे जुड़े प्रमुख स्थलों में शामिल है.
सारनाथ क्यों है इतना खास
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित सारनाथ बौद्ध परंपरा से जुड़े चार प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है. बौद्ध परंपरा में इसे ऋषिपत्तन, इशिपत्तन और मृगदाव जैसे नामों से भी जाना जाता है.
मान्यता के अनुसार, गौतम बुद्ध ने यहीं अपने ज्ञान प्राप्त करने के बाद पहला उपदेश दिया था. इसे धर्मचक्र प्रवर्तन, यानी “Turning of the Wheel of the Law” कहा जाता है. इसी घटना को बौद्ध संघ की शुरुआत और Noble Eightfold Path के सिद्धांतों की स्थापना से जोड़ा जाता है.
UNESCO की सूची में किन हिस्सों को मिली जगह
UNESCO की inscription में सारनाथ के दो जुड़े हुए हिस्से शामिल हैं. इनमें चौखंडी स्तूप और सारनाथ के पुरातात्विक अवशेष शामिल हैं.
पुरातात्विक परिसर में धामेक स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, मूलगंधकुटी विहार और अशोक स्तंभ जैसे महत्वपूर्ण अवशेष मौजूद हैं. ये संरचनाएं उस ऐतिहासिक landscape को संरक्षित करती हैं, जो करीब 16 सदियों के दौरान विकसित हुआ.
सारनाथ का विकास राजाओं, बौद्ध मठों और स्थानीय श्रद्धालुओं के संरक्षण और patronage से हुआ. यहां कई स्तूप, मंदिर और विहार बनाए गए. ये निर्माण उस स्थान की निरंतर धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को दर्शाते हैं.
16 सदियों की कहानी समेटे हुए है सारनाथ
सारनाथ के स्मारक और पुरातात्विक अवशेष एक लंबे ऐतिहासिक दौर को अपने भीतर समेटे हुए हैं. यहां की संरचनाएं pre-Mauryan period के चौथी से तीसरी शताब्दी BCE से लेकर 12वीं शताब्दी CE तक के अलग-अलग दौर की गवाही देती हैं.
12वीं शताब्दी में इस स्थल का महत्व कम हुआ और बाद में यह क्षेत्र नष्ट हो गया. इसके बाद 18वीं शताब्दी में सारनाथ को दोबारा खोजा गया.
UNESCO मान्यता का सफर 1998 से शुरू हुआ था
सारनाथ की UNESCO World Heritage List तक पहुंचने की प्रक्रिया हाल की नहीं है. इसे भारत की Tentative List of World Heritage में 1998 में शामिल किया गया था.
इसके बाद भारत ने जनवरी 2025 में सारनाथ को World Heritage List में शामिल करने का proposal World Heritage Committee के सामने पेश किया. nomination के बाद करीब 18 महीने तक technical evaluation की प्रक्रिया चली. इसमें UNESCO की advisory bodies के साथ technical meetings और International Council on Monuments and Sites यानी ICOMOS का evaluation mission भी शामिल था.
अंततः बुसान में World Heritage Committee के 48वें सत्र में सारनाथ के नाम पर फैसला हुआ.
दो UNESCO criteria के आधार पर मिली मान्यता
सारनाथ को UNESCO World Heritage Convention के criteria (iii) और (vi) के तहत nominate किया गया था.
Criterion (iii) सारनाथ की उस स्थायी आध्यात्मिक और धार्मिक महत्ता को मान्यता देता है, जो इसे बौद्ध तीर्थयात्रा के चार प्रमुख केंद्रों में से एक बनाती है. सदियों के दौरान यहां बनाए और दोबारा बनाए गए धार्मिक भवन इस निरंतर महत्व को दर्शाते हैं.
वहीं Criterion (vi) सारनाथ को बुद्ध के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं से सीधे और tangible association के आधार पर पहचान देता है. इसमें उनका पहला उपदेश और ज्ञान प्राप्त करने के बाद अपने पहले पांच शिष्यों से मिलना शामिल है.
दुनिया भर के बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए बड़ा केंद्र
सारनाथ सिर्फ archaeological site नहीं है. यह आज भी जापान, थाईलैंड, श्रीलंका, म्यांमार, वियतनाम, दक्षिण कोरिया, कंबोडिया, मंगोलिया और कई दूसरे देशों से आने वाले बौद्ध श्रद्धालुओं का प्रमुख pilgrimage destination है.
इसलिए UNESCO का यह recognition केवल heritage conservation तक सीमित नहीं है. इसका संबंध भारत के बौद्ध देशों के साथ cultural और international engagement से भी है.
सारनाथ के शामिल होने के बाद बुद्ध से जुड़े चार प्रमुख बौद्ध तीर्थस्थलों में से तीन अब UNESCO World Heritage List का हिस्सा हैं. इनमें नेपाल का लुंबिनी और बिहार का महाबोधि मंदिर, बोधगया भी शामिल हैं.
भारत की UNESCO World Heritage संपदा अब 45
सारनाथ की inscription के बाद भारत की UNESCO World Heritage properties की संख्या 45 हो गई है. इनमें 37 cultural, 7 natural और 1 mixed property शामिल हैं.
भारत की पहली UNESCO World Heritage inscriptions 1983 में हुई थीं. उस समय आगरा फोर्ट, ताजमहल, एलोरा गुफाएं और अजंता गुफाएं इस सूची में शामिल हुए थे. इसके बाद भारत की सूची में किले, मंदिर, गुफाएं, रेलवे सिस्टम, बावड़ियां, ऐतिहासिक शहर, archaeological sites और national parks जैसे कई प्रकार के heritage sites जुड़े.
2025 में Maratha Military Landscapes of India को UNESCO सूची में शामिल किया गया था. अब 48वें सत्र में सारनाथ की inscription के साथ देश की कुल संख्या 45 हो गई है.
UNESCO सूची में भारत की वैश्विक स्थिति
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, भारत की 45 World Heritage properties उसे विश्व स्तर पर छठे स्थान पर रखती हैं और Asia Pacific region में भारत दूसरे स्थान पर है. भारत से आगे इटली के 62, चीन के 61, फ्रांस के 56, जर्मनी के 55 और स्पेन के 50 World Heritage properties हैं.
साथ ही भारत की Tentative List में 69 properties शामिल हैं. किसी property को UNESCO World Heritage nomination के लिए आगे बढ़ाने से पहले Tentative List में शामिल करना एक जरूरी शुरुआती चरण है.
सारनाथ के संरक्षण की जिम्मेदारी भी बढ़ी
UNESCO recognition के साथ heritage site की authenticity और integrity को बनाए रखने की जिम्मेदारी भी बढ़ती है. सरकार ने कहा है कि सारनाथ में tourism को sustainable तरीके से manage किया जाएगा और buffer zone के भीतर unplanned development को रोकने पर ध्यान दिया जाएगा.
उद्देश्य यह है कि सारनाथ का Outstanding Universal Value आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहे. UNESCO की World Heritage व्यवस्था में किसी site का महत्व सिर्फ उस देश तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि उसकी heritage value को पूरी मानवता से जुड़ा माना जाता है.
भारत में heritage conservation का काम कितना बड़ा
सारनाथ की UNESCO recognition भारत में चल रहे व्यापक heritage conservation efforts का हिस्सा भी है. Ministry of Culture UNESCO से जुड़े cultural matters में भारत की भूमिका का नेतृत्व करता है, जबकि Archaeological Survey of India यानी ASI World Heritage से जुड़े मामलों में सरकार की nodal agency है.
ASI देशभर में 3,688 centrally protected monuments की conservation और maintenance करता है, जिनमें 28 World Heritage properties शामिल हैं. इसके अलावा यह Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains Act, 1958 और Antiquities and Art Treasures Act, 1972 के तहत कई जिम्मेदारियां निभाता है.
Heritage conservation अब सिर्फ monuments तक सीमित नहीं
भारत में heritage protection का दायरा केवल World Heritage sites तक सीमित नहीं है. देश ने antiquities की वापसी, heritage sites पर visitor amenities और manuscripts की digitisation जैसे क्षेत्रों में भी काम आगे बढ़ाया है.
दिए गए दस्तावेज के मुताबिक, भारत अब तक 669 antiquities को वापस ला चुका है, जिनमें 2014 के बाद 656 antiquities शामिल हैं. वहीं Adopt a Heritage 2.0 programme के तहत मार्च 2026 तक 30 MoUs signed किए जा चुके थे.
इसी तरह Gyan Bharatam Mission के तहत manuscripts की preservation और digitisation पर काम किया जा रहा है. मार्च 2026 तक national manuscript survey में 1.19 करोड़ से अधिक manuscripts report किए गए थे और 8 लाख से अधिक manuscripts digitise किए जा चुके थे.
सारनाथ का UNESCO World Heritage List में शामिल होना ऐसे समय में हुआ है, जब भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर लगातार मजबूत तरीके से सामने रख रहा है. बुद्ध के पहले उपदेश से जुड़ा यह स्थल अब औपचारिक रूप से UNESCO की विश्व विरासत सूची का हिस्सा है और भारत की World Heritage संपदा में 45वीं property के रूप में जुड़ गया है.


