नई दिल्ली. महाराष्ट्र के बीड की 47 साल की रामाबाई रणवीर बेटियों की पढ़ाई के लिए सिर्फ 3 हजार रुपये जीतने के इरादे से एक रेस में शामिल हुई थीं. पैरों में चप्पल थी और सामने युवा प्रतिभागी दौड़ रहे थे. लेकिन रेस के दौरान जब उनकी चप्पल बार-बार निकलने लगी तो उन्होंने उसे हाथ में उठा लिया और नंगे पैर दौड़ती रहीं.
रामाबाई ने न सिर्फ रेस पूरी की, बल्कि जीत भी हासिल की. उन्हें 3 हजार रुपये मिले. लेकिन उनकी यह छोटी सी जीत जल्द ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और इसके बाद उनकी जिंदगी में मदद का ऐसा सिलसिला शुरू हुआ, जिसकी उन्होंने शायद कल्पना भी नहीं की होगी.
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बेटियों की पढ़ाई के लिए दौड़ीं रामाबाई
रेस के दौरान ज्यादातर प्रतिभागी स्पोर्ट्स शूज और ट्रैक सूट में नजर आ रहे थे. रामाबाई रणवीर साड़ी पहनकर चप्पल में दौड़ रही थीं. उनका मकसद किसी बड़ी खेल प्रतियोगिता में नाम कमाना नहीं था. वह अपनी बेटियों की पढ़ाई के लिए जरूरी सामान जुटाने के लिए 3 हजार रुपये जीतना चाहती थीं.
रेस शुरू होने के बाद कई युवा प्रतिभागी उनसे आगे निकल गए. लेकिन रामाबाई ने दौड़ना नहीं छोड़ा. कुछ दूर पहुंचने के बाद उनकी चप्पल बार-बार निकलने लगी.
आखिरकार उन्होंने चप्पल हाथ में ली और नंगे पैर दौड़ना शुरू कर दिया. उनकी यही तस्वीर और वीडियो लोगों के दिल को छू गई.
रेस जीतीं तो सोशल मीडिया पर छा गईं
रामाबाई ने आखिरकार रेस जीत ली और 3 हजार रुपये का इनाम भी हासिल किया. लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने उनकी कहानी को पूरे देश तक पहुंचा दिया.
रेस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. क्रिकेट के दिग्गज राहुल द्रविड़ ने भी इस वीडियो को शेयर किया. इसके बाद रामाबाई की मदद के लिए लोग आगे आने लगे.
उनकी कहानी सोशल मीडिया के जरिए तेजी से फैली और कई लोगों ने आर्थिक मदद भेजनी शुरू कर दी.
सचिन तेंदुलकर की ओर से जूते देने की बात
रामाबाई की कहानी क्रिकेट के महान खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर तक भी पहुंची. उनके बारे में सामने आया कि सचिन तेंदुलकर की ओर से रामाबाई से उनके जूतों का साइज पूछा गया.
जिस महिला ने बेटियों की पढ़ाई के लिए चप्पल उतारकर नंगे पैर रेस पूरी की थी, उसके लिए यह मदद चर्चा का विषय बन गई.
रामाबाई की कहानी में यह पहल उनके खेल के जज्बे और संघर्ष के साथ-साथ सोशल मीडिया के जरिए लोगों के जुड़ने की मिसाल भी बनी.
बीड के कलेक्टर ने दिए 50 हजार रुपये
रामाबाई की मदद के लिए बीड के जिला कलेक्टर भी आगे आए. उन्हें 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद का चेक दिया गया.
इससे उनकी शुरुआती जरूरतों में मदद मिली. वहीं, देश के अलग-अलग हिस्सों से लोगों ने भी उनके बैंक खाते में छोटी-बड़ी रकम भेजनी शुरू कर दी.
एक हफ्ते में खाते में पहुंचे 1.50 लाख से ज्यादा रुपये
रामाबाई के संघर्ष और बेटियों की पढ़ाई के लिए उनके जज्बे से प्रभावित होकर लोगों ने आर्थिक मदद करनी शुरू की. बताया गया है कि करीब एक हफ्ते के भीतर उनके बैंक खाते में 1.50 लाख रुपये से ज्यादा पहुंच चुके थे.
यानी जिस रेस में वह सिर्फ 3 हजार रुपये जीतने पहुंची थीं, उसी रेस ने उनके लिए लोगों की मदद का एक बड़ा रास्ता खोल दिया.
साड़ी, चप्पल और नंगे पैर दौड़ने की तस्वीर बनी पहचान
रामाबाई की कहानी इसलिए भी चर्चा में आई क्योंकि उन्होंने सीमित साधनों के बावजूद हिम्मत नहीं छोड़ी. जब उनकी चप्पल साथ नहीं दे रही थी, तब उन्होंने दौड़ रोकने के बजाय उसे हाथ में लिया और नंगे पैर आगे बढ़ती रहीं.
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रेस जीतने के बाद वायरल हुए वीडियो ने लोगों का ध्यान उनकी तरफ खींचा. इसके बाद राहुल द्रविड़ के वीडियो शेयर करने से लेकर सचिन तेंदुलकर की ओर से मदद की बात और जिला प्रशासन की आर्थिक सहायता तक, रामाबाई की कहानी लगातार सुर्खियों में बनी रही.
उनका शुरुआती लक्ष्य सिर्फ बेटियों की पढ़ाई के लिए 3 हजार रुपये जुटाना था, लेकिन उनकी मेहनत और हिम्मत ने उन्हें देशभर के लोगों से जोड़ दिया.


