Security Deposit Dispute: किराए का घर खाली करते समय सबसे बड़ी चिंता अक्सर सिक्योरिटी मनी को लेकर होती है. किरायेदार ने घर लेते समय मकान मालिक को जो सिक्योरिटी डिपॉजिट दिया था, वह घर खाली करने के बाद वापस मिलना चाहिए. लेकिन कई मामलों में मकान मालिक पैसे लौटाने में टालमटोल करता है या बिना उचित कारण पूरी रकम रोक लेता है.
ऐसी स्थिति में किरायेदार को घबराने या विवाद बढ़ाने के बजाय दस्तावेज और सबूत संभालकर कानूनी तरीके से पैसे की मांग करनी चाहिए. हालांकि, सिक्योरिटी डिपॉजिट से जुड़े नियम हर राज्य में एक जैसे नहीं हैं और किराए के एग्रीमेंट की शर्तें भी महत्वपूर्ण होती हैं.
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सबसे पहले Rent Agreement चेक करें
सिक्योरिटी मनी वापस लेने के मामले में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज Rent Agreement होता है. इसमें यह देखना चाहिए कि सिक्योरिटी कितनी ली गई थी और घर खाली करने पर इसे वापस करने की क्या शर्त तय हुई थी.
अगर एग्रीमेंट में लिखा है कि मकान खाली करने के बाद तय समय में सिक्योरिटी वापस होगी, तो यह शर्त आपके दावे को मजबूत कर सकती है. साथ ही यह भी देखें कि मकान मालिक किन परिस्थितियों में सिक्योरिटी से कोई रकम काट सकता है.
कुछ राज्यों के tenancy कानूनों में सिक्योरिटी डिपॉजिट की वापसी से संबंधित विशेष प्रावधान हैं. उदाहरण के लिए, उत्तराखंड टेनेंसी एक्ट में निर्धारित परिस्थितियों में मकान का खाली कब्जा लेने के समय सिक्योरिटी वापस करने का प्रावधान है. इसलिए अपने राज्य के लागू कानून को देखना जरूरी है.
बिना वजह पूरी सिक्योरिटी रोकना सही नहीं
अगर मकान मालिक बिजली-पानी के बकाया बिल, किराया या घर को हुए वास्तविक नुकसान की रकम का दावा करता है, तो उसका हिसाब मांगा जा सकता है. केवल मनमाने तरीके से पूरी सिक्योरिटी रोक लेने की स्थिति में किरायेदार लिखित रूप से रकम वापस मांग सकता है.
अगर घर में सामान्य इस्तेमाल से होने वाली मामूली टूट-फूट है, तो उसे वास्तविक नुकसान से अलग माना जा सकता है. इसलिए घर खाली करते समय कमरे, दीवार, फर्नीचर, मीटर रीडिंग और अन्य सामान की फोटो या वीडियो रखना उपयोगी होता है.
मकान मालिक को लिखित में पैसे मांगें
सबसे पहले मकान मालिक को WhatsApp, ईमेल या लिखित नोटिस के जरिए स्पष्ट रूप से सिक्योरिटी वापस करने के लिए कहें.
मैसेज में ये बातें जरूर लिखें:
- आपने घर कब खाली किया.
- कितनी सिक्योरिटी जमा की थी.
- घर और चाबी कब वापस की.
- कोई किराया या बिल बकाया है या नहीं.
- कितनी रकम वापस मिलनी है.
- रकम वापस करने के लिए उचित समय.
सिर्फ फोन पर बातचीत करने के बजाय लिखित रिकॉर्ड रखना बेहतर है. इससे आगे विवाद होने पर यह दिखाया जा सकता है कि आपने पहले शांतिपूर्ण तरीके से भुगतान मांगने की कोशिश की थी.
कौन-कौन से सबूत संभालकर रखें?
सिक्योरिटी मनी वापस लेने के लिए सबूत बहुत महत्वपूर्ण हैं. किरायेदार को Rent Agreement, सिक्योरिटी जमा करने का बैंक ट्रांजैक्शन या रसीद, किराए के भुगतान की जानकारी, मकान खाली करने के मैसेज, बिजली-पानी के बिल और घर खाली करते समय ली गई फोटो-वीडियो संभालकर रखनी चाहिए.
अगर मकान मालिक ने WhatsApp पर सिक्योरिटी वापस करने की बात कही है, तो उस बातचीत को भी सुरक्षित रखें.
Legal Notice भेज सकते हैं
अगर बार-बार मांग करने के बावजूद मकान मालिक पैसा नहीं लौटाता है, तो वकील के माध्यम से Legal Notice भेजा जा सकता है. नोटिस में सिक्योरिटी की रकम, घर खाली करने की तारीख और पैसे वापस करने की मांग स्पष्ट की जा सकती है.
कानूनी नोटिस भेजने से पहले Rent Agreement और दूसरे दस्तावेज किसी वकील को दिखाना बेहतर रहेगा, क्योंकि सही कानूनी रास्ता मामले और राज्य के कानून पर निर्भर कर सकता है.
Lok Adalat भी हो सकता है विकल्प
अगर मकान मालिक और किरायेदार विवाद को कोर्ट में ले जाने के बजाय आपसी समझौते से खत्म करना चाहते हैं, तो Lok Adalat एक विकल्प हो सकता है. NALSA के अनुसार, अदालत में लंबित मामले के अलावा ऐसे विवाद भी Lok Adalat में प्री-लिटिगेशन स्तर पर लाए जा सकते हैं, जिनके अदालत में जाने की संभावना हो. समझौता होने पर Lok Adalat का award सिविल कोर्ट की डिक्री के समान माना जाता है.
राजस्थान में भी Rajasthan State Legal Services Authority के माध्यम से Lok Adalat में प्री-लिटिगेशन विवाद को समझौते के लिए ले जाने की व्यवस्था है.
जरूरत पड़ने पर कोर्ट का रास्ता
अगर बातचीत, लिखित मांग और समझौते की कोशिश के बाद भी मकान मालिक सिक्योरिटी नहीं लौटाता, तो परिस्थितियों के अनुसार रकम की वसूली के लिए उचित कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. किस अदालत या कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल होगा, यह राज्य, Rent Agreement, रकम और विवाद की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.
इसलिए कोर्ट में मामला दाखिल करने से पहले स्थानीय वकील से सलाह लेना बेहतर है.
पैसे कम हों तो Free Legal Aid भी मिल सकती है
अगर किरायेदार वकील की फीस वहन नहीं कर सकता, तो Legal Services Authority से मुफ्त कानूनी सहायता के बारे में जानकारी ली जा सकती है. NALSA के अनुसार, पात्र लोगों को सिविल और क्रिमिनल मामलों में मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध हो सकती है. इसके लिए संबंधित District Legal Services Authority, Taluk Legal Services Committee या अन्य Legal Services Authority से संपर्क किया जा सकता है. NALSA की हेल्पलाइन 15100 भी उपलब्ध है.
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मकान खाली करते समय ये गलती न करें
भविष्य में सिक्योरिटी मनी को लेकर विवाद से बचने के लिए घर खाली करने से पहले मकान की स्थिति की फोटो-वीडियो बना लें. बिजली और पानी के मीटर की अंतिम रीडिंग रिकॉर्ड करें. सभी बकाया बिलों का भुगतान करें और मकान की चाबी सौंपने का लिखित रिकॉर्ड रखें.
अगर मकान मालिक सिक्योरिटी से कोई रकम काटता है, तो उससे कटौती का कारण और उपलब्ध बिल या हिसाब मांगें. इससे विवाद की स्थिति में आपके पास पूरा रिकॉर्ड रहेगा.


