Coal Mine Auction: केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने गुरुवार को वाणिज्यिक कोयला खदानों की नीलामी के 16वें दौर की शुरुआत कर दी. इस चरण में देश के 9 कोयला उत्पादक राज्यों में 25 कोयला ब्लॉक नीलामी के लिए पेश किए गए हैं. इसके साथ ही पहले के दौर में नीलाम की गई छह खदानों के सफल बोलीदाताओं को Coal Mine Development and Production Agreements (CMDPAs) भी सौंपे गए. नई दिल्ली में 16वें दौर की नीलामी की शुरुआत केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने की. इस मौके पर कोयला सचिव विक्रम देव दत्त भी मौजूद रहे.
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6 खदानों से 15,700 रोजगार मिलने की उम्मीद
कोयला मंत्रालय के मुताबिक, पहले के दौर में नीलाम की गई छह खदानों के परिचालन में आने के बाद करीब 1,984 करोड़ रुपये का सालाना राजस्व मिलने की उम्मीद है. इन परियोजनाओं में लगभग 1,743 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश होने और करीब 15,700 रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है. इन छह खदानों में Tara (Revised), Margo West, Margo East, Mandla South, Dongeri Tal-II और Dip Side of PKoC शामिल हैं. इनके सफल बोलीदाताओं में CG Syn-Gas & Chemicals Ltd., Jharkhand Exploration & Mining Corporation Limited, Qube Commercial Pvt. Ltd., Gallant Ispat Ltd. और The Singareni Collieries Limited शामिल हैं. छहों खदानों में कुल मिलाकर करीब 1,504 मिलियन टन के भूगर्भीय भंडार हैं, जबकि इनकी संयुक्त Peak Rated Capacity 11.62 MTPA है.
9 राज्यों में 25 कोयला ब्लॉक
16वें दौर की नीलामी में कुल 25 कोयला ब्लॉक पेश किए गए हैं. इनमें 21 पूरी तरह एक्सप्लोर किए गए और चार आंशिक रूप से एक्सप्लोर किए गए ब्लॉक शामिल हैं. ये ब्लॉक अरुणाचल प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में स्थित हैं. इन 25 ब्लॉक्स में से 6 कोयला खदानें Coal Mines (Special Provisions) Act (CMSP) और 19 Mines and Minerals (Development and Regulation) Act (MMDR) के तहत नीलामी के लिए रखी गई हैं.
नई कंपनियों के लिए भी खुला है मौका
मंत्रालय के अनुसार, वाणिज्यिक कोयला खनन व्यवस्था के तहत अनुभवी खनन कंपनियों के साथ-साथ नए प्रवेशकर्ताओं और टेक्नोलॉजी आधारित कंपनियों को भी बोली में हिस्सा लेने का अवसर दिया गया है. इस व्यवस्था में कोयले के अंतिम उपयोग पर कोई प्रतिबंध नहीं है. इसके अलावा ऑटोमैटिक रूट के तहत 100 फीसदी FDI की अनुमति है. कम शुरुआती भुगतान की व्यवस्था भी है, जिसे भविष्य में मिलने वाले रेवेन्यू शेयर के साथ समायोजित किया जा सकता है.
2020 में शुरू हुआ था कमर्शियल कोल माइनिंग
भारत में कमर्शियल कोल माइनिंग के लिए नीलामी प्रक्रिया 2020 में शुरू की गई थी. मंत्रालय के मुताबिक 16वें दौर के साथ अब तक कुल 147 कोयला खदानों की नीलामी हो चुकी है. इन खदानों से नौ कोयला उत्पादक राज्यों में सालाना 47,500 करोड़ रुपये से ज्यादा के अनुमानित राजस्व और 55,000 करोड़ रुपये से अधिक के पूंजी निवेश की उम्मीद है.
देश की ऊर्जा जरूरतों में कोयले की बड़ी भूमिका
नीलामी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में कोयले की भूमिका पर जोर दिया. कोयला मंत्रालय के अनुसार, कोयला भारत की प्राथमिक ऊर्जा जरूरतों का करीब 55 फीसदी और देश के बिजली उत्पादन का 70 फीसदी से अधिक हिस्सा पूरा करता है.
कोयला गैसीकरण पर भी जोर
कोयला मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव और नॉमिनेटेड अथॉरिटी रूपिंदर बरार ने कहा कि कोयला क्षेत्र अधिक पारदर्शी, टेक्नोलॉजी आधारित और प्रतिस्पर्धी इकोसिस्टम की ओर बढ़ रहा है. इससे घरेलू संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, निवेश आकर्षित करने और नए अवसर पैदा करने में मदद मिल सकती है. अतिरिक्त सचिव सानोज कुमार झा ने कोयला गैसीकरण को कोयले के वैल्यू एडिशन और इसके नए तरीके से इस्तेमाल का महत्वपूर्ण माध्यम बताया. उन्होंने भारतीय जरूरतों के अनुरूप नई तकनीकों और वैश्विक स्तर की बेहतर प्रक्रियाओं को तेजी से अपनाने पर जोर दिया. मंत्रालय ने कहा कि सरकार का फोकस कोयला क्षेत्र में सुधार, व्यापक भागीदारी और निवेश बढ़ाने के साथ देश को विश्वसनीय और किफायती ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने पर है.


