जन्म प्रमाण पत्र आज सिर्फ जन्म का रिकॉर्ड नहीं है. जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के तहत जारी यह दस्तावेज कई सरकारी और नागरिक सेवाओं में महत्वपूर्ण है. ऐसे में अगर जन्म प्रमाण पत्र में नाम, जन्मतिथि, माता-पिता का नाम या कोई अन्य जानकारी गलत दर्ज है, तो उसे सही कराना जरूरी हो जाता है.
लेकिन यहां एक जरूरी अंतर समझना होगा. अगर जन्म पहले से रजिस्टर्ड है और रिकॉर्ड में कोई गलती है, तो उसके correction का आधार अलग है. वहीं अगर जन्म का पंजीकरण ही समय पर नहीं हुआ है, तो delayed registration के नियम लागू होते हैं.
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जन्म प्रमाण पत्र में गलती सुधारने का कानूनी आधार क्या है?
पहले से दर्ज जन्म रिकॉर्ड में गलत प्रविष्टि को सुधारने का कानूनी आधार Registration of Births and Deaths Act, 1969 की धारा 15 है. इसके तहत अगर Registrar को संतोष हो जाता है कि जन्म या मृत्यु के रजिस्टर में कोई प्रविष्टि गलत है या गलत तरीके से दर्ज की गई है, तो संबंधित नियमों के अधीन उसमें correction या cancellation किया जा सकता है.
इसका मतलब यह है कि पहले से रजिस्टर्ड जन्म प्रमाण पत्र में विवरण गलत होने की स्थिति को नया जन्म पंजीकरण कराने के मामले से अलग समझना चाहिए.
नाम या जन्मतिथि गलत है तो क्या करें?
अगर जन्म प्रमाण पत्र में नाम, जन्मतिथि, माता-पिता का नाम या कोई अन्य विवरण गलत है, तो सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि गलती मूल जन्म रजिस्टर में है या सिर्फ जारी किए गए प्रमाण पत्र में.
इसके बाद संबंधित क्षेत्र के Birth and Death Registrar के सामने correction के लिए आवेदन किया जाता है. किन दस्तावेजों की जरूरत होगी और प्रक्रिया क्या होगी, यह संबंधित राज्य के नियमों और स्थानीय Registrar की प्रक्रिया पर निर्भर कर सकता है.
धारा 15 के तहत Registrar को उपलब्ध रिकॉर्ड और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर संतुष्ट होना होता है. इसलिए केवल affidavit बनवा लेना हर मामले में correction की गारंटी नहीं है.
2026 के नए नियम किससे जुड़े हैं?
Registration of Births and Deaths (Amendment) Bill, 2026 का मुख्य बदलाव पहले से दर्ज जन्म प्रमाण पत्र की सामान्य correction प्रक्रिया को बदलना नहीं है. यह बदलाव मुख्य रूप से जन्म और मृत्यु के delayed registration से संबंधित है.
2026 में संसद से पारित संशोधन के अनुसार, अगर जन्म या मृत्यु की जानकारी एक साल से ज्यादा लेकिन दो साल के भीतर दी जाती है, तो registration के लिए District Magistrate, Sub-Divisional Magistrate या District Magistrate द्वारा अधिकृत Executive Magistrate के आदेश की जरूरत होगी. संबंधित अधिकारी को जन्म या मृत्यु की correctness verify करनी होगी और निर्धारित fee का भुगतान भी करना होगा.
दो साल से ज्यादा पुराना जन्म है तो क्या होगा?
अगर जन्म या मृत्यु की जानकारी घटना के दो साल से ज्यादा समय बाद दी जाती है, तो registration के लिए Judicial Magistrate First Class के आदेश की जरूरत होगी.
इस स्थिति में भी जन्म या मृत्यु की correctness का verification और निर्धारित fee का भुगतान जरूरी होगा.
यानी delayed registration में देरी की अवधि के आधार पर approval का स्तर अलग किया गया है.
जन्म प्रमाण पत्र में correction और delayed registration में अंतर
दोनों प्रक्रियाओं को एक जैसा समझना सही नहीं होगा.
अगर जन्म पहले से रजिस्टर्ड है लेकिन उसमें कोई गलत जानकारी दर्ज है, तो correction के लिए धारा 15 का प्रावधान लागू होता है. वहीं अगर जन्म का registration ही नहीं हुआ और बाद में registration कराया जा रहा है, तो delayed registration से जुड़े प्रावधान लागू होते हैं.
इसलिए केवल इसलिए कि 2026 में Registration of Births and Deaths Act में संशोधन हुआ है, यह मानना सही नहीं होगा कि जन्म प्रमाण पत्र में हर तरह की गलती सुधारने के लिए नया नियम लागू हो गया है.
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नागरिकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
अगर जन्म पहले से दर्ज है और सिर्फ विवरण गलत है, तो संबंधित Birth and Death Registrar से correction की प्रक्रिया के बारे में जानकारी लें.
अगर जन्म का registration ही नहीं हुआ है, तो delayed registration के नियम लागू हो सकते हैं. खासकर एक साल से ज्यादा और दो साल से ज्यादा की देरी के लिए 2026 के संशोधन में अलग-अलग authority की व्यवस्था की गई है.
राज्यवार documents, forms, fees और online या offline प्रक्रिया अलग हो सकती है. इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित राज्य या स्थानीय Registrar की प्रक्रिया देखना जरूरी है.


