UPI MDR Charges: त्योहारी सीजन के बीच यूपीआई भुगतान को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. यूपीआई एवं सेवा संचालन समिति ने चुनिंदा व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का फैसला दिवाली के तुरंत बाद तक टालने का निर्णय लिया है. इसे लागू करने की तारीख की अलग से अधिसूचना जारी की जाएगी. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी यूपीआई भुगतानों पर शुल्क लगेगा. यह व्यवस्था चुनिंदा व्यापारी भुगतानों से संबंधित है.
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क्या है MDR, दुकानदारों पर कैसे पड़ेगा असर?
MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी के लेनदेन पर लगाया जा सकता है. यह शुल्क लागू होने पर इसकी जिम्मेदारी और दर संबंधित भुगतान व्यवस्था के नियमों पर निर्भर करेगी. P2M का मतलब है व्यक्ति से व्यापारी को किया जाने वाला भुगतान. उदाहरण के लिए, किसी दुकान, रेस्टोरेंट या अन्य कारोबारी प्रतिष्ठान पर यूपीआई के जरिए भुगतान करना. प्रस्तावित व्यवस्था में किन भुगतानों पर MDR लागू होगा, इसकी विस्तृत जानकारी और आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार है. इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि हर दुकानदार को शुल्क देना पड़ेगा या ग्राहकों से सीधे अतिरिक्त पैसे लिए जाएंगे.
दिवाली के बाद क्यों टाला गया फैसला?
समिति ने त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए चुनिंदा P2M यूपीआई लेनदेन पर MDR लागू करने के फैसले को दिवाली के तुरंत बाद तक टालने का निर्णय लिया है. इससे संबंधित व्यवस्था लागू होने की तारीख अलग से अधिसूचित की जाएगी. त्योहारी दिनों में बाजारों में खरीदारी और डिजिटल भुगतान बढ़ जाते हैं. ऐसे समय में भुगतान से जुड़े नियमों में बदलाव का असर व्यापारियों और भुगतान सेवाओं पर पड़ सकता है. हालांकि, समिति के निर्णय के पीछे बताए गए कारणों में त्योहारी सीजन का ध्यान रखना शामिल है.
क्या आम UPI यूजर्स को भी देना होगा चार्ज?
इस अपडेट का सबसे अहम सवाल यही है कि क्या मोबाइल से यूपीआई भुगतान करने वाले आम लोगों को भी अतिरिक्त पैसे देने होंगे. फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में चुनिंदा व्यापारी भुगतानों पर MDR का जिक्र है. सभी यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने की घोषणा नहीं की गई है. किन श्रेणियों के भुगतान पर शुल्क लागू होगा, यह अंतिम अधिसूचना से स्पष्ट होगा. इसलिए आम ग्राहकों को अभी यह मानकर चलने की जरूरत नहीं है कि हर बार QR कोड स्कैन करके भुगतान करने पर अतिरिक्त चार्ज लगेगा.
UPI से लेकर RuPay तक, NPCI की क्या है भूमिका?
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) भारत में खुदरा डिजिटल भुगतान और निपटान प्रणालियों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसकी स्थापना भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय बैंक संघ (IBA) की पहल पर की गई थी.
NPCI ने देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए कई सेवाएं विकसित की हैं. इनमें प्रमुख हैं.
- UPI: मोबाइल के जरिए तुरंत डिजिटल भुगतान
- RuPay: भारत का घरेलू कार्ड भुगतान नेटवर्क
- IMPS: तत्काल बैंक हस्तांतरण सेवा
- NACH: नियमित और बड़े पैमाने पर होने वाले भुगतानों की इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था
- NETC: इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली, जिसका इस्तेमाल FASTag में होता है
- AePS: आधार आधारित बैंकिंग लेनदेन की सुविधा
- e-RUPI: विशिष्ट उद्देश्य के लिए इस्तेमाल होने वाला डिजिटल वाउचर
NPCI का उद्देश्य भुगतान व्यवस्था को अधिक सुलभ, कुशल और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना है. संस्था की चार पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियां भी हैं, जो अंतरराष्ट्रीय भुगतान, भारत बिलपे, भीम सेवाओं और तकनीकी समाधानों से जुड़े काम करती हैं.
अब किस बात पर रहेगी नजर?
दिवाली के बाद चुनिंदा P2M यूपीआई लेनदेन पर MDR लागू करने की तारीख और इससे संबंधित विस्तृत नियमों की आधिकारिक अधिसूचना महत्वपूर्ण होगी. उसी से पता चलेगा कि किन श्रेणियों के भुगतान पर शुल्क लागू होगा और व्यापारियों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा.
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