ऊर्जा मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा है कि स्मार्ट मीटर केवल तकनीक लागू करने की प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि इन्हें उपभोक्ताओं और बिजली वितरण कंपनियों यानी डिस्कॉम के बीच एक सार्थक इंटरफेस बनना चाहिए.
नई दिल्ली में Metering India 2026 के 11वें संस्करण को संबोधित करते हुए ऊर्जा मंत्रालय में संयुक्त सचिव (डिस्ट्रिब्यूशन) शशांक मिश्रा ने कहा कि भारत के पावर सेक्टर के डिजिटलाइजेशन के सफर में स्मार्ट मीटरिंग अब एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर रही है.
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RDSS के तहत 20 करोड़ स्मार्ट मीटर स्वीकृत
शशांक मिश्रा ने बताया कि Revamped Distribution Sector Scheme यानी RDSS के तहत 20 करोड़ स्मार्ट मीटर स्वीकृत किए गए हैं. इनमें से 7 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर देशभर में पहले ही लगाए जा चुके हैं.
उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए उपयोगी टूल बनने चाहिए. इसके साथ ही इनसे मिलने वाले डेटा का इस्तेमाल डिस्कॉम के इंजीनियरों और फील्ड स्टाफ को बेहतर फैसले लेने में मदद करने के लिए भी किया जाना चाहिए.
फील्ड स्टाफ को सीधे स्मार्ट मीटर डेटा समझने की जरूरत
संयुक्त सचिव ने कहा कि जूनियर इंजीनियर और वितरण कंपनियों के कर्मचारी केवल कॉरपोरेट कार्यालयों से मिलने वाले निर्देशों पर काम करने तक सीमित नहीं रहने चाहिए.
उन्होंने जोर दिया कि फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों को स्मार्ट मीटर से मिलने वाले डेटा को सीधे समझने और उसका इस्तेमाल करने में सक्षम होना चाहिए. इससे स्मार्ट मीटर से उपलब्ध डेटा को बिजली वितरण व्यवस्था में अधिक उपयोगी बनाया जा सकेगा.
20 प्रतिशत से भी कम उपभोक्ता मोबाइल ऐप इस्तेमाल कर रहे
शशांक मिश्रा ने बताया कि फिलहाल स्मार्ट मीटर वाले 20 प्रतिशत से भी कम उपभोक्ता उनसे जुड़े मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल कर रहे हैं.
उन्होंने इस अंतर को दूर करने की जरूरत पर जोर दिया. साथ ही, उन्होंने उपभोक्ताओं की बेहतर भागीदारी और डेटा आधारित बेहतर समाधानों की आवश्यकता को भी रेखांकित किया.
स्मार्ट मीटरिंग को केवल मीटर लगाने की प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसका इस्तेमाल उपभोक्ताओं और बिजली वितरण कंपनियों के बीच बेहतर संपर्क और डेटा के प्रभावी उपयोग के लिए किया जाना चाहिए.
Metering India 2026 में स्मार्ट मीटरिंग पर चर्चा
Metering India 2026 का आयोजन IEEMA यानी Indian Electrical and Electronics Manufacturers’ Association की ओर से किया जा रहा है.
यह आयोजन नई दिल्ली में शुरू हुआ है और कल तक चलेगा. इस वर्ष कार्यक्रम की थीम ‘Smart Metering – The Catalyst for Power Sector Digitalization’ रखी गई है.
कार्यक्रम को पांच केंद्रित सत्रों में संरचित किया गया है. इन सत्रों के माध्यम से स्मार्ट मीटरिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण चुनौतियों और अवसरों पर व्यापक चर्चा और संवाद का उद्देश्य रखा गया है.
स्मार्ट मीटरिंग से जुड़े प्रमुख आंकड़े
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| योजना | Revamped Distribution Sector Scheme यानी RDSS |
| स्वीकृत स्मार्ट मीटर | 20 करोड़ |
| लगाए जा चुके स्मार्ट मीटर | 7 करोड़ से अधिक |
| स्मार्ट मीटर मोबाइल ऐप इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ता | 20 प्रतिशत से कम |
| आयोजन | Metering India 2026 |
| संस्करण | 11वां |
| आयोजन संस्था | IEEMA |
| स्थान | नई दिल्ली |
| थीम | Smart Metering – The Catalyst for Power Sector Digitalization |
| सत्र | 5 केंद्रित सत्र |
FAQs
1. ऊर्जा मंत्रालय ने स्मार्ट मीटर को लेकर क्या कहा?
ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारी शशांक मिश्रा ने कहा कि स्मार्ट मीटर केवल तकनीक लागू करने तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उपभोक्ताओं और डिस्कॉम के बीच सार्थक इंटरफेस बनना चाहिए.
2. RDSS के तहत कितने स्मार्ट मीटर स्वीकृत हुए हैं?
RDSS के तहत 20 करोड़ स्मार्ट मीटर स्वीकृत किए गए हैं.
3. देश में कितने स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं?
ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, देशभर में 7 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं.
4. कितने स्मार्ट मीटर उपभोक्ता मोबाइल ऐप इस्तेमाल कर रहे हैं?
शशांक मिश्रा के अनुसार, स्मार्ट मीटर वाले 20 प्रतिशत से भी कम उपभोक्ता संबंधित मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल कर रहे हैं.
5. Metering India 2026 की थीम क्या है?
Metering India 2026 की थीम ‘Smart Metering – The Catalyst for Power Sector Digitalization’ है.
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