नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली की करीब 1200 सहकारी ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों के लिए बड़ी राहत की खबर है. पुरानी और जर्जर इमारतों के पुनर्विकास का रास्ता आसान होने जा रहा है. दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम तैयार करेगा, जिससे सोसायटियों को अलग-अलग विभागों से मंजूरी लेने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा. प्रस्तावित व्यवस्था के तहत फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) को 160 से बढ़ाकर 300 करने का प्रावधान भी है. इससे सोसायटियों में निर्माण क्षेत्र और आवासीय फ्लैटों की संख्या बढ़ सकती है.
इस संबंध में रोहिणी फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव ग्रुप ऑफ हाउसिंग सोसायटी के अध्यक्ष आर्य मुनि और वरिष्ठ उपाध्यक्ष हर्ष जीन्दगर ने जानकारी दी. दोनों पदाधिकारियों के मुताबिक, उनके प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को दिल्ली के आईएनए स्थित DDA कार्यालय में उपाध्यक्ष से मुलाकात की. बैठक में मास्टर प्लान दिल्ली-2047 के तहत सोसायटियों के पुनर्विकास से जुड़े प्रावधानों पर चर्चा हुई.
दो महीने में शुरू हो सकती है सिंगल विंडो सुविधा
पुनर्विकास की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए DDA सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने की तैयारी कर रहा है. इसके माध्यम से सोसायटियां पुनर्विकास से संबंधित विभिन्न मंजूरियों के लिए एक ही स्थान पर आवेदन कर सकेंगी.
फेडरेशन के पदाधिकारियों के अनुसार, इस व्यवस्था से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश करीब दो महीने में जारी किए जाने की बात कही गई है. इससे पुरानी इमारतों में रहने वाले लोगों को पुनर्विकास की प्रक्रिया समझने और आगे बढ़ाने में सुविधा मिलने की उम्मीद है.
4 हेक्टेयर की शर्त हटने से छोटी सोसायटियों को भी मौका
पुनर्विकास से जुड़े प्रस्तावित बदलावों में चार हेक्टेयर क्षेत्रफल की पुरानी शर्त हटाना भी अहम है. जानकारी के मुताबिक, अब करीब 3,000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाली सोसायटियां भी निर्धारित शर्तों को पूरा करने पर पुनर्विकास का विकल्प अपना सकेंगी. हालांकि, इसके लिए सोसायटी के सभी फ्लैटों का फ्रीहोल्ड होना जरूरी बताया गया है. इस बदलाव से उन सोसायटियों को भी लाभ मिलने की संभावना है, जो पहले क्षेत्रफल संबंधी शर्तों के कारण पुनर्विकास की योजना नहीं बना पा रही थीं.
70 प्रतिशत सदस्यों की मंजूरी के बिना नहीं होगा पुनर्विकास
सोसायटी में पुनर्विकास कराने के लिए कम से कम 70 प्रतिशत सदस्यों की सहमति आवश्यक होगी. इसके अलावा, हर सोसायटी के लिए पूरी इमारत का एक साथ पुनर्विकास कराना अनिवार्य नहीं होगा. जरूरत के मुताबिक चरणबद्ध या आंशिक पुनर्विकास का विकल्प भी अपनाया जा सकेगा. इससे उन सोसायटियों को राहत मिल सकती है, जहां इमारत के कुछ हिस्सों की स्थिति खराब है या जहां सभी भवनों का एक साथ पुनर्निर्माण करना व्यावहारिक नहीं है.
FAR 160 से बढ़कर 300, फ्लैटों की संख्या में 50% तक बढ़ोतरी की उम्मीद
प्रस्तावित प्रावधानों के तहत सोसायटियों का FAR 160 से बढ़ाकर 300 तक किया जा सकता है. FAR बढ़ने का मतलब है कि भूखंड के आकार के मुकाबले अधिक कुल निर्माण क्षेत्र उपलब्ध हो सकेगा. इससे पुनर्विकास के बाद आवासीय इकाइयों की संख्या में मौजूदा संख्या के मुकाबले करीब 50 प्रतिशत तक वृद्धि की संभावना जताई गई है. हालांकि, वास्तविक बढ़ोतरी संबंधित सोसायटी के भूखंड, स्वीकृत योजना और लागू नियमों पर निर्भर करेगी.
पुनर्विकास परियोजना में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 15 प्रतिशत क्षेत्र आरक्षित रखने का प्रावधान भी बताया गया है.
सोसायटी प्रबंधन को खुद कराने होंगे निर्माण कार्य
प्रस्तावित व्यवस्था में पुनर्विकास से जुड़े निर्माण और अन्य कार्यों की जिम्मेदारी सोसायटी की प्रबंधन समिति की होगी. वहीं, DDA की सिंगल विंडो व्यवस्था का उद्देश्य विभिन्न विभागों से मंजूरी लेने की प्रक्रिया को आसान बनाना है. यदि प्रस्तावित प्रावधान तय समयसीमा के अनुसार लागू होते हैं, तो दिल्ली की करीब 1200 सहकारी ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में पुराने भवनों के पुनर्विकास को गति मिल सकती है. इससे निवासियों को बेहतर आवासीय सुविधाएं मिलने की संभावना है. हालांकि, अंतिम नियमों और पात्रता की स्थिति DDA की आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी.
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